ऋषिकेश आने वाला हर पर्यटक कभी लक्ष्मण झूले तक जरूर पहुंचता था, लेकिन आज इसी पुल की हालत देखकर लोग ठिठक जाते हैं. जंग खाई रेलिंग, उखड़ता पेंट और जगह-जगह कमजोर पड़ती संरचना अब इस मशहूर पुल की पहचान बन गई है. यहां पहुंचने वाले सैलानी अक्सर पूछते हैं कि क्या यही वह लक्ष्मण झूला है, जिसकी तस्वीरें कभी दुनिया भर में मशहूर थीं.
सुरक्षा के चलते बंद हुआ था पुल
करीब छह साल पहले सुरक्षा कारणों से लक्ष्मण झूले पर आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी. उम्मीद थी कि वक्त के साथ पुल की मरम्मत होगी और यह दोबारा खुल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके उलट, रखरखाव की कमी के चलते पुल की हालत लगातार बिगड़ती चली गई. लोहे के कई हिस्सों पर जंग लग चुकी है और पुरानी चमक देने वाला पेंट भी जगह-जगह से उखड़ गया है.
जब यहां हर वक्त लगती थी भीड़
एक दौर ऐसा भी था जब ऋषिकेश घूमने आया कोई भी पर्यटक लक्ष्मण झूले पर गए बगैर वापस नहीं लौटता था. लोग यहां खड़े होकर गंगा का नजारा निहारते, तस्वीरें खिंचवाते और घंटों इसी जगह बिता देते थे. सुबह से शाम तक पुल पर चहल-पहल बनी रहती थी. इसका सीधा फायदा आसपास की दुकानों और छोटे कारोबारियों को भी मिलता था. लक्ष्मण झूला सिर्फ आने-जाने का जरिया नहीं, बल्कि शहर की पहचान और लोगों की यादों का हिस्सा बन चुका था.
हनुमान सेतु बनते ही बदल गया पूरा नजारा
लक्ष्मण झूले के ठीक बगल में अब नया हनुमान सेतु तैयार हो चुका है और गंगा पार करने के लिए लोगों की आवाजाही अब इसी नए पुल से होती है. नया पुल बनने के बाद से पुराना लक्ष्मण झूला पूरी तरह सुनसान पड़ गया है. जहां पहले पर्यटकों की भीड़ नजर आती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा रहता है. ज्यादातर लोग अब पुराने पुल की ओर सिर्फ दूर से नजर डालते हैं या कुछ तस्वीरें लेकर आगे हनुमान सेतु की तरफ बढ़ जाते हैं. पहले जैसी रौनक अब यहां कहीं नजर नहीं आती.
स्थानीय लोगों ने बताया, कैसे बदला माहौल
पुल के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले यहां हर समय चहल-पहल बनी रहती थी और दुकानों पर भी अच्छी बिक्री होती थी. पर्यटक घंटों इसी इलाके में समय बिताते थे. लेकिन पुल बंद होने के बाद से पूरा माहौल बदल चुका है. अब सैलानी सीधे हनुमान सेतु की तरफ चले जाते हैं, जिससे यह इलाका पहले जैसा जीवंत नहीं रह गया है.
यादों से जुड़ा है यह पुल, फिर भी दिखती है निराशा
इसके बावजूद लक्ष्मण झूला लोगों की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है. जो पुराने पर्यटक दोबारा ऋषिकेश पहुंचते हैं, वे इस पुल को देखकर अपनी पुरानी यादें ताजा करते हैं. लेकिन इसकी बिगड़ी हुई हालत देखकर उन्हें निराशा भी होती है. सोशल मीडिया पर भी अक्सर लक्ष्मण झूले की तस्वीरें सामने आती रहती हैं, जिनमें लोग इसकी मरम्मत और संरक्षण की जरूरत पर बात करते हैं. हर कोई चाहता है कि यह ऐतिहासिक धरोहर दोबारा संवरी हुई नजर आए.
क्यों जरूरी है इस धरोहर को बचाना
लक्ष्मण झूला महज लोहे से बना एक पुल भर नहीं है, यह ऋषिकेश के इतिहास और यहां के पर्यटन की पहचान रहा है. इसकी बदहाल तस्वीरें एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं कि विरासत को समय रहते संभालना कितना जरूरी होता है. अगर इस ऐतिहासिक पुल का सही तरीके से संरक्षण किया जाए, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बना रह सकता है.
आज भले ही लोगों की आवाजाही हनुमान सेतु से हो रही हो, लेकिन इससे लक्ष्मण झूले की अहमियत कम नहीं हुई है. जरूरत इस बात की है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संवारने की दिशा में ठोस कदम जल्द उठाए जाएं, ताकि आने वाला हर पर्यटक सिर्फ इसकी पुरानी कहानी सुनकर न लौटे, बल्कि इसे उसी शान और खूबसूरती के साथ अपनी आंखों से भी देख सके, जिसके लिए यह कभी पूरी दुनिया में मशहूर हुआ करता था.











