तेलंगाना के मशहूर भुवनगिरी किले की पहचान अब बदलने वाली है। राज्य सरकार इस ऐतिहासिक किले को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल में तब्दील करने की तैयारी में जुट गई है और इसके लिए काम तेज रफ्तार से चल रहा है। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 56.81 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इस पूरी कायापलट का सबसे बड़ा आकर्षण यहां बन रहा आधुनिक पैसेंजर रोपवे सिस्टम है, जो किले तक पहुंचने का पूरा अनुभव ही बदल देगा।
राज्य के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जूपल्ली कृष्ण राव ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि हर हाल में सारा काम 2 अक्टूबर तक पूरा हो जाना चाहिए। मंत्री ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े तो मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाए और चौबीसों घंटे पारियों में काम कराया जाए, ताकि तय समय सीमा किसी भी सूरत में न टूटे।
रोपवे क्यों है इस प्रोजेक्ट की जान
भुवनगिरी किले तक पहुंचने के लिए पहाड़ की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। यही वजह है कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और छोटे बच्चों के लिए किले के शीर्ष तक पहुंचना बेहद थका देने वाला और मुश्किल काम रहा है। इसी परेशानी को खत्म करने के लिए करीब 17.91 करोड़ रुपए की लागत से 1.02 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जा रहा है।
यह रोपवे मोनोकेबल जिग बैक सिस्टम पर आधारित होगा, जिसमें कुल 6 केबिन चलेंगे। हर केबिन में एक बार में 6 यात्री बैठ सकेंगे और वे महज 3 से 4 मिनट में नीचे से सीधे किले की चोटी तक का सफर तय कर लेंगे। खास बात यह है कि यह सिस्टम हर घंटे 250 से 300 यात्रियों को ऊपर-नीचे ले जाने में सक्षम होगा, जिससे भीड़ के बावजूद आवाजाही आसान बनी रहेगी।
रोपवे के साथ कई और सुविधाएं
किले के परिसर में पर्यटकों की सहूलियत के लिए सिर्फ रोपवे ही नहीं, बल्कि कई और निर्माण भी किए जा रहे हैं। यहां एक नया कैफेटेरिया, फूड कोर्ट, इंटरप्रिटेशन सेंटर, बच्चों के खेलने का क्षेत्र और एक खूबसूरत व्यूइंग गैलरी तैयार की जा रही है। इसके साथ ही किले की पुरानी भव्यता को बरकरार रखते हुए इसके प्राचीन ढांचे का जीर्णोद्धार पुरातात्विक नियमों के तहत किया जा रहा है। रात के वक्त किले की खूबसूरती और निखर कर सामने आए, इसके लिए विशेष डेकोरेटिव लाइटिंग भी लगाई जा रही है।
अक्टूबर से शुरू होगा पर्यटकों का स्वागत
राज्य सरकार तेलंगाना को देश का अग्रणी पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में भुवनगिरी किले, यादाद्री और कोलनुपाका सोमेश्वर मंदिर को आपस में जोड़कर एक एकीकृत आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि अक्टूबर में जैसे ही रोपवे और बाकी नई सुविधाएं शुरू होंगी, देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे।













