घरों में गमलों के भीतर पौधे लगाना बहुत आसान और सुखद काम लगता है, लेकिन कुछ ही समय बीतने के बाद यदि मिट्टी सख्त होना शुरू हो जाए, पत्तियां कमजोर दिखने लगें या फिर पौधों की नई ग्रोथ धीमी पड़ जाए, तो चिंता होना स्वाभाविक है। ऐसे हालात में हर बार बाजार से महंगे खाद या केमिकल फर्टिलाइजर खरीदना बिल्कुल जरूरी नहीं होता है। घर पर ही आसानी से मिलने वाली कुछ खास चीजों की मदद से जीवामृत तैयार किया जा सकता है जो पौधों की बेहतरीन देखभाल करने में काफी मददगार साबित हो सकता है। प्राकृतिक खेती के दौरान मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाने और सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को तेजी से बढ़ाने के लिए खासतौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।
गमले के पौधों में इस जैविक घोल का इस्तेमाल करने से पहले इसकी सही मात्रा और इस्तेमाल करने के पूरे तरीके को भली-भांति समझ लेना बेहद आवश्यक है। यदि गलत तरीके से तैयार किया गया या फिर जरूरत से ज्यादा मात्रा में जीवामृत पौधों में डाल दिया जाए, तो फायदे की जगह पौधों को गंभीर नुकसान भी पहुंच सकता है। यही मुख्य वजह है कि इसकी बहुत ही आसान विधि और इसके सही इस्तेमाल के बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है ताकि पौधों को सुरक्षित रखा जा सके।
जीवामृत क्या है और पौधों के लिए क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
जीवामृत असल में एक जैविक घोल होता है जिसे आमतौर पर गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और पेड़ के नीचे की थोड़ी सी मिट्टी जैसी प्राकृतिक चीजों को मिलाकर तैयार किया जाता है। प्राकृतिक खेती की पद्धति में मिट्टी के भीतर सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को बढ़ाने के उद्देश्य से इसका मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया का मकसद केवल किसी पौधे को सीधा खाद देना भर नहीं होता, बल्कि इसके माध्यम से मिट्टी के पूरे जैविक वातावरण को और अधिक बेहतर बनाना भी होता है। जब किसी गमले की मिट्टी काफी लंबे समय तक एक ही जगह पर स्थिर रहती है, तो वह धीरे-धीरे सख्त हो जाती है। ऐसे समय में यदि सही जैविक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाए, तो यह मिट्टी की मूल संरचना और उसके अंदर होने वाली प्राकृतिक गतिविधियों को सुचारू रूप से बनाए रखने में बड़ी मदद करता है। हालांकि यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए कि जीवामृत किसी भी पौधे के लिए कोई जादुई टॉनिक नहीं है। पौधे की स्वस्थ और तेज ग्रोथ के लिए पर्याप्त धूप या रोशनी, नियमित पानी, अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी और उचित जल निकासी यानी ड्रेनेज भी उतनी ही ज्यादा जरूरी होती है।
गमलों के लिए जीवामृत बनाने की आवश्यक सामग्री
घर पर ही लगभग 10 लीटर जीवामृत आसानी से तैयार करने के लिए आपको कुल 10 लीटर पानी, करीब 500 ग्राम ताजा गाय का गोबर, 500 मिलीलीटर गोमूत्र, 100 ग्राम गुड़, 100 ग्राम बेसन और किसी पेड़ के नीचे की थोड़ी सी मिट्टी की जरूरत पड़ती है। इस मिश्रण में मिट्टी को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य उसमें पहले से मौजूद प्राकृतिक रूप से सक्रिय सूक्ष्मजीवों को इस घोल का हिस्सा बनाना होता है।
इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बिल्कुल साफ बाल्टी में 10 लीटर पानी भर लें। अब इस पानी के अंदर गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और वह थोड़ी सी मिट्टी डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह से मिला लें। इसके बाद इस पूरे मिश्रण को एक साफ लकड़ी की छड़ी की मदद से कुछ देर तक अच्छी तरह चलाएं। इस बाल्टी को पूरी तरह से किसी ढक्कन से बंद करने के बजाय एक सूती कपड़े से ढककर किसी छायादार स्थान पर रख दें। इस तैयार हो रहे मिश्रण को रोजाना कम से कम एक बार साफ लकड़ी की छड़ी से धीरे-धीरे हिलाना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में कुछ ही दिनों के भीतर यह मिश्रण बनकर पूरी तरह तैयार हो जाता है। मौसम और आसपास के तापमान के हिसाब से इसमें लगने वाले समय में थोड़ा बदलाव आ सकता है। यदि तैयार किए गए घोल के अंदर से किसी तरह की तेज सड़ांध, कोई असामान्य फफूंद या फिर कोई अन्य संदिग्ध बदलाव दिखाई दे, तो ऐसे घोल को पौधों की मिट्टी में डालने से पूरी तरह बचना चाहिए।
गमलों में जीवामृत डालने का सही तरीका
तैयार किए गए जीवामृत को हमेशा गाढ़े रूप में सीधे तौर पर छोटे गमलों में डालने की गलती बिल्कुल न करें। हमेशा इसे पानी में अच्छी तरह से पतला करके इस्तेमाल करना सबसे बेहतर रहता है। सामान्य नियम के अनुसार 1 भाग जीवामृत को करीब 10 भाग पानी के साथ अच्छी तरह मिलाकर ही मिट्टी में डालना चाहिए। यदि आप इसका इस्तेमाल पहली बार करने जा रहे हैं, तो हमेशा बहुत कम मात्रा से शुरुआत करना ही समझदारी भरा कदम होता है। इस घोल को सीधे पौधे के मुख्य तने पर डालने के बजाय पौधे की मिट्टी के आसपास देना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। किसी बहुत छोटे गमले में जरूरत से ज्यादा मात्रा में घोल डाल देने की वजह से मिट्टी काफी लंबे समय तक अत्यधिक गीली बनी रह सकती है। इसलिए हमेशा पौधे की वास्तविक जरूरत, उस गमले के आकार और मिट्टी में पहले से मौजूद नमी की स्थिति को देखकर ही इसकी मात्रा तय करनी चाहिए। इसके अलावा दो बार जीवामृत देने के बीच में पर्याप्त समय का अंतर रखना भी बहुत जरूरी है।
किन पौधों में किया जा सकता है इसका इस्तेमाल?
जीवामृत का उपयोग मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की सब्जियों, सुंदर फूलों वाले पौधों, फलदार पेड़ों और कई तरह के सजावटी पौधों की देखभाल के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा तुलसी जैसे पवित्र और औषधीय पौधों की मिट्टी में भी इसे उचित रूप से पतला करके दिया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर कैक्टस और अन्य सभी प्रकार के रसीले यानी सेक्युलेंट पौधों में इसका इस्तेमाल करते समय बहुत अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इन पौधों को ज्यादा नमी बिल्कुल पसंद नहीं होती है। इस बात का भी खास ख्याल रखना चाहिए कि किसी पौधे की खराब हालत के पीछे सिर्फ और सिर्फ पोषण की कमी ही एकमात्र वजह नहीं होती है। जरूरत से ज्यादा पानी देना, बहुत कम रोशनी मिलना, खराब ड्रेनेज होना या फिर कीटों का हमला हो जाना भी पौधे की ग्रोथ को पूरी तरह रोक सकता है। इसलिए हमेशा समस्या की असली वजह को देखकर ही सही उपाय का चुनाव करना बेहतर होता है।
जीवामृत से क्या फायदे मिल सकते हैं?
यदि इस जैविक घोल का इस्तेमाल बिल्कुल सही तरीके और उचित मात्रा में किया जाए, तो जीवामृत मिट्टी के अंदर जैविक गतिविधि को तेजी से बढ़ाने में बहुत मदद कर सकता है। इसमें मौजूद तमाम प्राकृतिक जैविक पदार्थों के कारण मिट्टी की समग्र गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में भी काफी मदद मिल सकती है। इसके नियमित और सही उपयोग से पौधों की जड़ों के आसपास का पूरा वातावरण बेहद अनुकूल और उपजाऊ बन जाता है।



















