छुट्टियों का समय आते ही लोग अक्सर गोवा के समुद्र तटों या मनाली की ठंडी पहाड़ियों की तरफ रुख करते हैं। हालांकि, इन लोकप्रिय जगहों पर घूमना काफी महंगा साबित हो सकता है। होटल का किराया, आने-जाने का खर्च और वहां की गतिविधियां मिलकर आपके ट्रैवल बजट को काफी बढ़ा देती हैं। एक बेहतरीन और आनंददायक अवकाश बिताने के लिए हमेशा किसी मशहूर पर्यटन केंद्र पर जाना आवश्यक नहीं है। भारत में कई ऐसी छिपी हुई और खूबसूरत जगहें मौजूद हैं, जहां आप पहाड़ों की शांति, समुद्र के किनारे का सुकून, ऐतिहासिक इमारतें और जंगलों का प्राकृतिक सौंदर्य बेहद कम खर्च में अनुभव कर सकते हैं।
तीर्थन घाटी और जिभी: मनाली का शांत और किफायती विकल्प
हिमाचल प्रदेश की तीर्थन घाटी और जिभी उन लोगों के लिए एकदम सही जगह हैं जो मनाली की अत्यधिक भीड़भाड़ और महंगे होटलों से बचना चाहते हैं। यहां आपको प्रकृति के बीच ठहरने के लिए छोटे होमस्टे, बहती हुई पहाड़ी नदियां और शांत जंगल मिलते हैं। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के आसपास का इलाका प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकिंग के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित करता है। दिल्ली से दो लोगों के लिए दो रात और तीन दिन की इस यात्रा का अनुमानित खर्च ₹11,500 से ₹17,000 के बीच बैठता है।
यहां पहुंचने के लिए दिल्ली से मनाली जाने वाली रात की बसें मिल जाती हैं, जिनसे यात्रियों को औट तक पहुंचकर आगे टैक्सी लेनी पड़ती है। इसके अलावा भुंतर हवाई अड्डा भी इस क्षेत्र के नजदीक एक विकल्प है, हालांकि वहां से उड़ानुल की उपलब्धता सीमित हो सकती है। जाने से पहले वहां के मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य जुटा लें ताकि यात्रा में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
गोकर्ण: गोवा जैसी नाइटलाइफ और बीच का बजट संस्करण
गोवा अपनी पार्टी संस्कृति, शानदार रिसॉर्ट्स और नाइटलाइफ के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। लेकिन यदि आप भीड़भाड़ से दूर समुद्र के किनारे शांति से कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो कर्नाटक का गोकर्ण एक बेहतरीन और किफायती विकल्प है। यहां के बीच पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य के बेहद करीब लाते हैं और दोस्तों या पार्टनर के साथ सुकून भरा समय बिताने का अवसर देते हैं। हालांकि, यहां मिलने वाली सुविधाएं और मनोरंजन के साधन गोवा के बड़े और लोकप्रिय इलाकों से कुछ अलग हो सकते हैं।
गोकर्ण की यात्रा का खर्च इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप आवागमन के लिए किस साधन का चुनाव करते हैं। यदि आप गोवा के लिए फ्लाइट लेते हैं तो आपका बजट बढ़ सकता है, जबकि गोकर्ण जाने के लिए ट्रेन या बस चुनने से पैसों की काफी बचत होती है। बेंगलुरु या मुंबई से गोकर्ण के लिए रातभर की ट्रेन और बस सेवाएं आसानी से मिल जाती हैं, जिससे यात्रा बेहद सुगम हो जाती है।
बूंदी: उदयपुर के महलों के मुकाबले इतिहास और वास्तुकला से भरपूर शहर
राजस्थान के ऐतिहासिक किलों, महलों और पुरानी हवेलियों को देखने की इच्छा रखने वाले पर्यटक अक्सर उदयपुर जाते हैं, लेकिन इसी राज्य में स्थित बूंदी भी एक शानदार ऐतिहासिक स्थल है। उदयपुर जहां अपनी झीलों और लग्जरी होटलों के लिए जाना जाता है, वहीं बूंदी अपनी प्राचीन बावड़ियों, दीवारों पर बनी कलाकृतियों और पुरानी इमारतों के लिए खास पहचान रखता है। यहां स्थित तारागढ़ किला, बूंदी पैलेस और रानीजी की बावड़ी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।
इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह कम बजट में एक नया और समृद्ध अनुभव प्रदान करती है। दिल्ली से दो लोगों के लिए दो रात और तीन दिन की इस ट्रिप का आनंद लेने के लिए आप ट्रेन के जरिए कोटा तक जा सकते हैं और वहां से सड़क मार्ग से बूंदी पहुंच सकते हैं। जयपुर हवाई अड्डे से भी सड़क मार्ग के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है, और अक्टूबर से मार्च के बीच का समय इस शहर की यात्रा के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।
राजाजी नेशनल पार्क: जिम कॉर्बेट के विकल्प के रूप में वन्यजीव प्रेमियों की पसंद
जंगलों और वन्यजीवों के बीच समय बिताने के शौकीन लोग आमतौर पर जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जाना पसंद करते हैं। हालांकि, उत्तराखंड में ही स्थित राजाजी नेशनल पार्क भी एक बेहतरीन और कम खर्चीला विकल्प है। राजाजी नेशनल पार्क अपनी समृद्ध जैव विविधता, हाथियों, विभिन्न प्रजाति के पक्षियों और प्राकृतिक नजारों के लिए प्रसिद्ध है। हरिद्वार और ऋषिकेश के बेहद नजदीक होने के कारण पर्यटक इस यात्रा में धार्मिक स्थलों और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों का भी आनंद उठा सकते हैं.
दो लोगों के लिए दो रात और तीन दिन के सफर में जिम कॉर्बेट का अनुमानित खर्च ₹30,000 से ₹48,000 के बीच आता है, जबकि राजाजी नेशनल पार्क की यात्रा ₹17,500 से ₹27,500 में पूरी हो जाती है। दिल्ली से हरिद्वार तक ट्रेन से पहुंचकर राजाजी के चिल्ला गेट की तरफ आसानी से जाया जा सकता है। जिम कॉर्बेट जाने के लिए रामनगर तक ट्रेन या सड़क मार्ग का उपयोग किया जाता है। ध्यान रखें कि जंगलों में किसी खास जानवर को देखने की कोई गारंटी नहीं होती और सफारी का संचालन मौसम तथा स्थानीय नियमों के अधीन होता है।



















