प्यार की राहों में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जिनकी उम्मीद किसी ने नहीं की होती है। रिश्तों की अहमियत और अनकहे जज्बातों से भरी एक ऐसी ही दिलचस्प कहानी सिया और कबीर की है। सिया कोई आम पारंपरिक लड़की नहीं थी, जिसे अपने बाहरी लुक्स, कपड़ों या खुद के फेमिनिन अंदाज की कोई परवाह हो। उसे ओवरसाइज टी-शर्ट, जींस, स्नीकर्स पहनना, खुले बिखरे बालों के साथ रहना और दोस्तों के साथ बास्केटबॉल के मैदान पर पसीना बहाना बेहद पसंद था। वह अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने में यकीन रखती थी, लेकिन इसी बेफिक्र और बिंदास लड़की के दिल में कॉलेज के सबसे चर्चित लड़के कबीर के लिए एक खास जगह थी। मुश्किल सिर्फ इतनी थी कि कबीर का दिल किसी और के लिए धड़कता था।
कॉलेज की टॉमबॉय और उसकी अनकही चाहत
सिया उन चुनिंदा लड़कियों में से थी जिन्हें समाज या आसपास के लोगों की राय से कोई खास फर्क नहीं पड़ता था। कॉलेज के लड़के उसे अक्सर प्यार से टॉमबॉय कहकर पुकारते थे और वह इस बात पर बुरा मानने के बजाय हंसकर आगे बढ़ जाती थी। दूसरी तरफ कबीर कॉलेज की हर गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाला, दोस्तों की महफिल की जान और अपनी मुस्कान से सबका दिन बना देने वाला लड़का था। सिया को कबीर की यह खूबी सबसे ज्यादा भाती थी कि वह हर किसी के साथ बेहद दोस्ताना और अच्छा व्यवहार रखता था। इन दोनों की दोस्ती की शुरुआत भी काफी दिलचस्प अंदाज में एक बास्केटबॉल कोर्ट पर हुई थी। उस मैच में कबीर की टीम हार की कगार पर थी और आखिरी मिनटों में लगातार दो बेहतरीन बास्केट करके सिया ने हारी हुई बाजी पूरी तरह पलट दी थी।
मैच के मैदान से शुरू हुई खट्टी-मीठी नोकझोंक
मैच खत्म होने के बाद कबीर ने अपनी मुस्कान के साथ सिया की तारीफ करते हुए कहा था कि तुम्हारे अंदर तो पूरा हीरो छिपा हुआ है। इसके जवाब में सिया ने भी तंज कसते हुए कहा था कि तुम्हें हारना भी सीखना चाहिए। बस उसी दिन से दोनों के बीच एक प्यारी सी नोकझोंक और बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। वक्त बीतने के साथ-साथ सिया के दिल में कबीर के लिए भावनाएं गहरी होती चली गईं और वह उससे प्यार करने लगी। वह कबीर की छोटी से छोटी पसंद और नापसंद का ख्याल रखती, उसके मूड को भांप लेती और बिना कहे उसकी हर संभव मदद के लिए तैयार रहती। हालांकि कबीर के नजरिए से सिया केवल उसकी सबसे अच्छी और पक्की दोस्त थी, क्योंकि उसका दिल कॉलेज की ही एक अन्य लड़की अनाया पर आया हुआ था।
अनाया का जिक्र और सिया के दिल की कसक
कबीर अक्सर सिया के पास आकर अनाया की बातें करता था और उससे सलाह मांगा करता था। एक दिन कैंटीन में बैठे हुए उसने झिझकते हुए पूछा कि वह अनाया को कॉफी के लिए कैसे आमंत्रित करे। उस पल सिया के हाथ में पकड़ा हुआ कॉफी का कप हवा में ही थम गया, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए मुस्कुराकर कहा कि सीधी बात है, हर बात का प्रेजेंटेशन थोड़ी तैयार करना होता है। उसने उस वक्त कबीर की पूरी मदद की, लेकिन कॉलेज से घर लौटते वक्त उसे अपनी ही दी हुई सलाह पर पहली बार भीतर तक बहुत दुख हुआ। कुछ दिनों बाद कबीर ने हिम्मत जुटाकर अनाया को कॉफी के लिए पूछ लिया, लेकिन अनाया की तरफ से वैसी दिलचस्पी नहीं दिखाई गई और वह उसे केवल एक अच्छा दोस्त ही मानती थी। जब कबीर ने यह बात निराश होकर सिया को बताई, तो सिया ने उसे बहुत समझाया कि किसी का तुम्हें पसंद न करना तुम्हारी कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि सबकी भावनाएं अलग-अलग होती हैं।
दूरी ने दिलाई कबीर को सिया की अहमियत
कबीर ने पहली बार सिया को इतने गौर से देखा और महसूस किया कि वह खुद अंदर से दुखी होने के बावजूद उसे संभाल रही थी। कॉलेज फेस्ट की तैयारियां शुरू होने पर सिया ने खुद को पूरी तरह व्यस्त कर लिया और कबीर के हर मैसेज का तुरंत जवाब देना बंद कर दिया। अब वह कैंटीन में भी अपने अन्य दोस्तों के साथ बैठती और प्रैक्टिस खत्म होते ही सीधे घर निकल जाती। कबीर को धीरे-धीरे सिया की यह दूरी और उसकी कमी खलने लगी। पहले वह अपनी हर छोटी-बड़ी बात सिया के साथ साझा करता था, लेकिन अब अजीब सी खालीपन का अहसास होने लगा था। एक शाम कबीर ने आखिरकार उससे पूछ ही लिया कि वह उससे इस तरह क्यों बच रही है। सिया ने कुछ पल की खामोशी के बाद जवाब दिया कि वह भाग नहीं रही है, बल्कि खुद को उस जगह से बाहर निकाल रही है जहां उसकी भावनाओं की कोई कद्र या जगह नहीं है।
आखिरकार बयां हो गए दिल के जज्बात
फेस्ट की अंतिम शाम सिया को एक दूसरे कॉलेज की बास्केटबॉल टीम से खेलने का एक बेहतरीन ऑफर मिला, जिससे वह बेहद खुश थी। कबीर ने उसे इस कामयाबी की बधाई दी, लेकिन उसके चेहरे पर खुशी से ज्यादा एक गहरी उदासी छाई हुई थी। जब सिया ने मजाक में पूछा कि क्या वह चाहती है कि वह यहीं रुक जाए, तो कबीर ने बिना हंसे जवाब दिया कि शायद वह सच में यही चाहता है कि सिया उसके साथ रहे। सिया ने पूछा कि क्या दोस्त की तरह, तो कबीर ने कुछ देर सोचने के बाद स्वीकार किया कि पहले वह उसे सिर्फ पक्की दोस्त समझता था, लेकिन जब सिया ने अपनी दुनिया में उसे प्राथमिकता देना बंद किया तब उसे समझ आया कि वह उसकी जिंदगी में कितनी अहम है। कबीर ने यह भी साफ किया कि वह किसी की नापसंद से बचने के लिए नहीं, बल्कि खुद सिया के लिए उसके मन में प्यार जागने की वजह से उसे चुन रहा है।
एक नई शुरुआत और रिश्ते की खूबसूरत दास्तान
सिया ने कबीर की बात ध्यान से सुनी और अपनी शर्त रखते हुए कहा कि वह किसी की दूसरी पसंद नहीं बनना चाहती, बल्कि उसे वही अपनाएगी जो सच्चे दिल से उसे चाहे। कबीर ने उसकी बात को पूरी तरह समझते हुए सहमति जताई कि सिया के सामने उसे किसी तरह का कोई बनावटी नाटक नहीं करना पड़ता और वह उसके साथ रहकर बिल्कुल सहज महसूस करता है। सिया के चेहरे पर एक मीठी सी मुस्कान आ गई और उसने कहा कि इस बार रिश्ते की शुरुआत पूरी ईमानदारी के साथ दोस्ती से ही करते हैं। इसके बाद सिया ने उसका हाथ थाम लिया और हंसते हुए एक डील पक्की की कि अगला बास्केटबॉल मैच वही जीतेगी। उस शाम उन्होंने अपने रिश्ते को कोई भारी-भरकम नाम तो नहीं दिया, लेकिन पहली बार दोनों ने अपने दिल के सारे राज एक-दूसरे के सामने खोल दिए थे और एक नए सफर की तरफ कदम बढ़ाए थे।



















