स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की रसोई में रागी ने अपनी खास जगह बना ली है, लेकिन इसका आटा संभालना अक्सर एक बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार बेलन चलाते ही लोई किनारों से फटने लगती है, तो कभी तवे पर सेकने के बाद रोटी इतनी सख्त हो जाती है कि उसे चबाना भी मुश्किल लगने लगता है। गेहूं के आटे से इतर, रागी के साथ काम करने का अपना एक अलग विज्ञान है। इस मोटे अनाज से मुलायम रोटी तैयार करने का असल राज सिर्फ जोर लगाकर गूंथने में नहीं, बल्कि आटे में नमी और तापमान के सही तालमेल में छिपा है।
ग्लूटेन की कमी बनती है टूटने की मुख्य वजह
गेहूं के आटे में भरपूर मात्रा में ग्लूटेन मौजूद होता है, जो उसे एक खास लचीलापन और खिंचाव देता है। इसी लचीलेपन के कारण गेहूं की रोटियां चकले पर बिना किसी झंझट के पतली बेल ली जाती हैं। दूसरी तरफ, रागी पूरी तरह ग्लूटेन मुक्त अनाज है। जब इसे सामान्य ठंडे पानी से गूंथा जाता है, तो इसके कण आपस में चिपक नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि बेलते समय लोई में दरारें आ जाती हैं और तवे पर डालते ही रोटी बिखरने लगती है। इस परेशानी से निपटने का सबसे कारगर तरीका उबलते पानी का इस्तेमाल करना है। गर्म पानी के संपर्क में आते ही आटे का स्टार्च फूल जाता है, जिससे आटे में एक स्वाभाविक चिपचिपापन पैदा होता है और रोटियां नरम बनती हैं।
सामग्री और सही अनुपात का रखें ध्यान
स्वादिष्ट और बिल्कुल सॉफ्ट रोटियां बनाने के लिए सामग्री का सटीक नाप बेहद जरूरी है। इसके लिए आपको चाहिए
- रागी का आटा: एक कप छना हुआ ताजा आटा।
- पानी: लगभग एक कप साफ पानी।
- नमक: स्वादानुसार।
- घी या तेल: थोड़ा सा आटा गूंथने और ऊपर लगाने के लिए।
- अतिरिक्त स्वाद: बारीक कटी हरी मिर्च या साबुत जीरा, यदि आप रोटी को थोड़ा चटपटा बनाना चाहते हैं।
उबलते पानी से आटा तैयार करने का सही तरीका
सबसे पहले किसी गहरे पैन में एक कप पानी डालें और उसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर आंच पर चढ़ा दें। जब पानी में अच्छा उबाल आने लगे, तो गैस की आंच तुरंत बंद कर दें। अब उबलते पानी में धीरे-धीरे एक कप रागी का आटा डालते जाएं और चम्मच या कलछी की मदद से लगातार चलाते रहें। ध्यान रखें कि आटे में गुठलियां बिल्कुल न पड़ने पाएं। जब आटा सारा पानी सोख ले, तब बर्तन पर ढक्कन लगाकर उसे करीब 8 से 10 मिनट के लिए भाप में छोड़ दें। यह ठहराव बेहद जरूरी है, क्योंकि भाप के असर से आटा भीतर तक पककर बेहद लचीला हो जाता है।
जब यह मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तब अपने हाथों में थोड़ा सा पानी या तेल लगाकर इसे अच्छी तरह मसलना शुरू करें। आटे को जितना चिकना और एकसार गूंथा जाएगा, रोटियां बेलना उतना ही सरल होगा। जब आटा बिल्कुल नरम और मुलायम डो की शक्ल ले ले, तब इसकी छोटी-छोटी लोइयां काट लें।
बेलने के लिए अपनाएं बटर पेपर या प्लास्टिक शीट
रागी की लोई को सूखे परथन के सहारे सीधे बेलन से बेलने की कोशिश करेंगे, तो वह टूट सकती है। इससे बचने के लिए दो प्लास्टिक शीट या बटर पेपर के टुकड़ों का उपयोग करें। दोनों शीट्स के बीच लोई रखें और हल्के हाथों से बेलन चलाते हुए या उंगलियों के पोरों से दबाते हुए गोल आकार दें। इस प्रक्रिया से रोटी बिना किसी खिंचाव या दबाव के बेहद पतली और बिना फटे तैयार हो जाती है।
तवे पर सही आंच और सेकने का सलीका
रोटी सेकने से पहले तवे को मध्यम आंच पर अच्छी तरह गर्म कर लें। प्लास्टिक शीट से रोटी को बहुत सावधानी से उठाकर गर्म तवे पर डालें। जब निचली सतह पर हल्के सुनहरे चित्तीदार निशान दिखने लगें, तब इसे पलट दें। दूसरी तरफ भी अच्छी तरह सिंकने दें। यदि आप किसी साफ सूती कपड़े या स्पैचुला से किनारों को हल्का-हल्का दबाएंगे, तो यह रोटी गुब्बारे की तरह फूलने लगेगी। तवे से उतारते ही गरमा-गरम रोटी पर थोड़ा सा देसी घी लगाएं।
इन रोटियों को ताजा बनी दाल, रसेदार सब्जी, गाढ़े दही या तीखी हरी चटनी के साथ परोसें। यदि आपको रोटियां कुछ घंटों बाद खानी हैं, तो उन्हें हवा में खुला छोड़ने के बजाय साफ सूती कपड़े में लपेटकर कैसरोल में रखें, ताकि उनकी प्राकृतिक नमी बरकरार रहे और वे बिल्कुल भी सख्त न हों।
पोषक तत्वों का भंडार, पर व्यक्तिगत जरूरत भी जरूरी
रागी एक बेहद पौष्टिक अनाज है, जो प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर, कैल्शियम और कई जरूरी मिनरल्स से भरा होता है। हालांकि, हर व्यक्ति के शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। आपकी दैनिक डाइट में रागी की कितनी मात्रा शामिल होनी चाहिए, यह आपकी कुल जीवनशैली, उम्र, शारीरिक गतिविधि और मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए किसी एक सामान्य नियम को सभी के लिए अनिवार्य मान लेने के बजाय अपने खानपान का संतुलन बनाए रखना ही सबसे उचित उपाय है।



















