बरसात का मौसम ढलते ही अक्सर बालों की बनावट और चमक में अचानक गिरावट दर्ज की जाती है। किसी दिन सिर की त्वचा जरूरत से ज्यादा तेल छोड़ने लगती है, तो अगले ही दिन बाल रूखे, बिखरे और एकदम निर्जीव दिखाई देने लगते हैं। वातावरण की भारी नमी, चिपचिपा पसीना, बरसात के पानी में बार-बार भीगना और सिर की त्वचा की सही देखभाल न हो पाना इस मौसम की आम परेशानियां हैं। मौसम के इस बदलाव में ढेरों रासायनिक उत्पादों का ढेर लगाने के बजाय सात दिनों का एक संतुलित और व्यवस्थित कार्यक्रम अपनाना कहीं अधिक असरदार साबित होता है।
सिर की त्वचा की गहराई से सफाई, सही नमी प्रदान करने वाली कंडीशनिंग और धोने के बाद बालों को सुखाने की सही तकनीक को समझकर लटों को फिर से रेशमी और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। जब तक बुनियाद मजबूत नहीं होगी, तब तक बालों में मनचाही चमक लौटना नामुमकिन रहता है।
बरसात के बाद लटों की विशेष देखभाल की जरूरत क्यों पड़ती है
लगातार बरसते पानी के दौरान सिर और लटों में नमी का स्तर असामान्य रूप से ऊंचा बना रहता है। वातावरण में मौजूद धूलकण और प्रदूषण पसीने के साथ मिलकर सिर की त्वचा पर जमने लगते हैं। भीगने के बाद अगर लटें घंटों गीली रह जाएं, तो सिर की त्वचा में असहजता पनपने लगती है और लटें आपस में बुरी तरह उलझ जाती हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के मुताबिक देखभाल तय करना सबसे समझदारी भरा कदम है।
यदि किसी व्यक्ति की सिर की त्वचा स्वाभाविक रूप से तैलीय है, तो बार-बार अतिरिक्त तेल की मालिश करना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। इसके विपरीत, जिन लोगों की लटें शुष्क और बेजान हो चुकी हैं, उन्हें अतिरिक्त कंडीशनिंग और पोषण की सबसे अधिक दरकार होती है।
सप्ताह में दो बार की नियमित धुलाई से सिर को रखें साफ
नुकसान की भरपाई करने के क्रम में सबसे पहला और बुनियादी कदम सिर की त्वचा की व्यवस्थित धुलाई है। सात दिनों के भीतर दो बार किसी सौम्य शैंपू का इस्तेमाल करना एक आदर्श शुरुआत मानी जाती है। हालांकि, धोने का यह चक्र पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि सिर की सतह कितनी तैलीय अथवा शुष्क है। जिन लोगों के सिर में तेल का स्राव तेजी से होता है, वे आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बार भी बाल धो सकते हैं।
धुलाई के दौरान सबसे जरूरी बात यह है कि लटों की पूरी लंबाई को हाथों से रगड़ने की गलती बिल्कुल न की जाए। केवल सिर की त्वचा पर उंगलियों के पोरों से हल्का दबाव बनाते हुए मालिश करनी चाहिए। सिर धोने के दौरान बनने वाला झाग पानी के बहाव के साथ लटों के अंतिम छोर तक स्वाभाविक रूप से पहुंच जाता है, जिससे पूरी लंबाई बिना घर्षण के साफ हो जाती है।
धोने के बाद लटों को गीला छोड़ने से बचें
धुलाई के तुरंत बाद की जाने वाली गलतियां अक्सर बालों की जड़ों को सबसे ज्यादा कमजोर करती हैं। पानी सोखने के लिए मोटे तौलिए से लटों को झटकना या रगड़ना बेहद नुकसानदेह है। इसके बजाय किसी मुलायम कपड़े से हल्के हाथों से थपथपाकर अतिरिक्त पानी सोखा जाना चाहिए।
नमी से भरी लटों को घंटों कसकर बांधे रखना टूटने का मुख्य कारण बनता है। बेहतर यही है कि पहले लटों को कमरे के सामान्य तापमान पर प्राकृतिक हवा में सूखने का मौका दिया जाए। यदि किसी कारणवश हेयर ड्रायर का सहारा लेना भी पड़े, तो बहुत तेज गर्म हवा के संपर्क से बचना चाहिए, ताकि लटों की प्राकृतिक नमी सुरक्षित रहे।
हफ्ते में एक बार पोषण देने वाली डीप कंडीशनिंग
लटों में अगर रूखापन और उलझन हद से ज्यादा बढ़ गई हो, तो हर सात दिन में एक बार डीप कंडीशनिंग की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। इसके लिए अपने बालों की बनावट के अनुकूल हेयर मास्क या गाढ़े कंडीशनिंग फॉर्मूले का चयन करना जरूरी है। इस उत्पाद को केवल लटों के बीच के हिस्से से लेकर सिरों तक लगाया जाता है।
अत्यधिक मात्रा में मास्क थोप लेने से बाल कोमल होने के बजाय चिपचिपे और भारी दिखने लगते हैं। डिब्बे पर लिखी समय सीमा के अनुसार उत्पाद को बालों पर टिकने दें और फिर सामान्य पानी से अच्छी तरह खंगाल लें, ताकि कोई अवशेष बाकी न रहे।
तेल की सही मालिश और आम गलतियों से बचाव
पारंपरिक रूप से तेल लगाने के शौकीन लोग हफ्ते में एक बार हल्का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं। तेल को सिर पर रात भर या अनावश्यक रूप से कई घंटों तक लगाए रखने की कोई आवश्यकता नहीं होती। हथेलियों पर कुछ बूंदें लेकर सिर की त्वचा और लटों पर बहुत हल्के हाथों से लगाएं, तेज रगड़ से परहेज करें।
यदि सिर की सतह पर पहले से ही खुजली, चिपचिपाहट या पपड़ीदार डैंड्रफ की परत मौजूद है, तो तेल लगाने से पहले मौजूदा स्थिति का आकलन करें। यह याद रखना आवश्यक है कि हर किस्म की समस्या का उपाय केवल सिर में तेल उड़ेलना नहीं हो सकता।
दैनिक आदतों और जीवनशैली का सीधा प्रभाव
लटों की मजबूती केवल हफ्ते में एक या दो बार किए गए उपचारों पर टिकी नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा के तौर-तरीके भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लटों को बहुत कसकर बांधने वाले हेयरस्टाइल बनाने से बचें और उलझन सुलझाते समय लटों को झटके से न खींचे।
गीली अवस्था में लटों की जड़े कमजोर होती हैं, इसलिए हमेशा चौड़े दांतों वाली कंघी की मदद से नीचे के सिरों से शुरू करते हुए धीरे-धीरे ऊपर की ओर सुलझाना चाहिए। सिर के संपर्क में आने वाले तकिए के गिलाफ और तौलिए की नियमित स्वच्छता भी जरूरी है। इसके साथ ही, भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, पौष्टिक आहार, प्रचुर मात्रा में पानी पीने की आदत और पूरी नींद बालों के स्वास्थ्य की प्राथमिक नींव हैं। यदि बालों का गिरना अनियंत्रित हो जाए या सिर में छाले व असहनीय खुजली बनी रहे, तो घरेलू उपायों के भरोसे रहने के बजाय सीधे त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।


















