लंबे इस्तेमाल के बाद सफेद तकिए पर पीलापन उभर आना एक आम बात है। नींद के दौरान निकलने वाला पसीना, शरीर का प्राकृतिक तेल, लार और धूल की परतें मिलकर तकिए के कपड़े को बदरंग बना देती हैं। केवल तकिए का कवर धो लेने से अंदर तक समा चुकी बासी गंध और गहरे जिद्दी दाग खत्म नहीं होते। ऐसे में नए तकिए पर खर्च करने से पहले घर पर ही सही देखभाल और गहरी सफाई की तकनीक अपनाकर उन्हें दोबारा इस्तेमाल लायक बनाया जा सकता है। तकिए की सामग्री अलग-अलग होने के कारण हर तकिए को एक ही ढर्रे से धोना नुकसानदेह भी साबित हो सकता है।
सफाई शुरू करने से पहले पहचानें तकिए का प्रकार
तकिए को साफ करने का सबसे पहला कदम उस पर लगा केयर लेबल पढ़ना है। फाइबर और पॉलिएस्टर से तैयार किए गए अधिकांश तकिए वॉशिंग मशीन में आसानी से धोए जा सकते हैं। कुछ पंख और डाउन वाले तकियों को भी सावधानी बरतते हुए मशीन में धोया जा सकता है। इसके विपरीत मेमोरी फोम और लेटेक्स से बने तकियों को वॉशिंग मशीन के ड्रम में डालना पूरी तरह गलत है, क्योंकि पानी और तेज घुमाव से उनका आंतरिक ढांचा टूट सकता है। मेमोरी फोम और लेटेक्स वाले तकियों के लिए सिर्फ दाग वाली सतह को साफ करना, जिसे स्पॉट क्लीनिंग कहा जाता है, सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। यदि तकिए पर कोई निर्देश लेबल मौजूद नहीं है, तो उसे अत्यंत नाजुक मानकर हल्के हाथों से ही साफ करना चाहिए।
नींबू और बेकिंग सोडा से हटाएं जिद्दी पीलापन
हल्के पीले दागों और जमी हुई दुर्गंध को दूर करने के लिए घरेलू रसोई के नुस्खे बेहद कारगर साबित होते हैं। लगभग आधा कप बेकिंग सोडा लेकर उसमें कुछ बड़े चम्मच ताजे नींबू का रस और जरूरत अनुसार थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें। इस तैयार पेस्ट को दाग वाली जगह पर किसी मुलायम कपड़े की मदद से धीरे-धीरे लगाएं। लगभग 30 मिनट तक पेस्ट को दाग पर लगा रहने दें ताकि वह गंदगी को ढीला कर सके। इसके बाद एक साफ गीले कपड़े से पेस्ट को अच्छी तरह पोंछ लें। सफाई के तुरंत बाद तकिए को पूरी तरह सुखाना जरूरी है, क्योंकि भीतरी हिस्सों में बची रह गई नमी बाद में फफूंद और तीव्र बासी गंध का कारण बन जाती है। पूरे तकिए पर यह लेप लगाने से पहले किसी अनदेखे छोटे कोने पर इसका परीक्षण कर लेना बेहतर रहता है।
मशीन में धोने योग्य तकियों की सही प्रक्रिया
यदि तकिए का लेबल मशीन से धोने की अनुमति देता है, तो मशीन में हमेशा एक साथ दो तकिए डालने चाहिए। ऐसा करने से धुलाई के दौरान वॉशिंग मशीन का ड्रम दोनों तरफ से संतुलित रहता है और मशीन पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। धुलाई के लिए सामान्य डिटर्जेंट का उपयोग करें और लेबल के निर्देशों के अनुसार गर्म पानी का चयन करें। धुलाई चक्र पूरा होने के बाद एक अतिरिक्त रिंस चक्र जरूर चलाएं, जिससे तकिए के रेशों में डिटर्जेंट का कोई भी रासायनिक अंश न बचा रहे। सफाई के बाद तकिए को अंदर तक सुखाना सबसे अहम प्रक्रिया है। यदि ड्रायर का प्रयोग कर रहे हैं तो तापमान को कम पर सेट रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में तकिए को निकालकर जांचते रहें कि अंदर नमी तो नहीं रह गई।
केमिकल मिलावट से बचें और धूप में सुखाएं
सफाई करते समय रसायनों के इस्तेमाल को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। सिरका, ब्लीच या किसी अन्य क्लीनिंग उत्पाद को बिना लेबल पढ़े कभी भी आपस में न मिलाएं। विशेष रूप से ब्लीच और सिरके को एक साथ मिलाना खतरनाक गैसें पैदा कर सकता है, इसलिए इस मिश्रण से पूरी तरह परहेज करें। धुलाई पूरी होने के बाद तकिए को कुछ घंटों के लिए धूप और खुली हवा वाली सूखी जगह पर रखना चाहिए। धूप प्राकृतिक रूप से बची हुई नमी को सुखा देती है और तकिए को ताजी हवा मिलती है। दोनों तरफ बराबर धूप और हवा लगे, इसके लिए कुछ घंटों के अंतराल पर तकिए को उलटते रहें। हालांकि रंगीन तकियों के गिलाफ को तेज धूप में ज्यादा देर न छोड़ें, क्योंकि तेज पराबैंगनी किरणों से कपड़े का रंग उड़ सकता है।
तकिए को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के बचाव
तकिए को बार-बार गंदा होने और पीला पड़ने से बचाने का सबसे सरल उपाय एक अच्छी गुणवत्ता वाला तकिया प्रोटेक्टर लगाना है। यह सुरक्षात्मक परत पसीने, त्वचा के तेल और धूल को सीधे तकिए के भीतरी रेशों में जाने से रोक देती है। तकिए के कवर को नियमित अंतराल पर धोते रहें और प्रोटेक्टर की भी समय-समय पर धुलाई करें। बीच-बीच में तकिए को धूप और ताजी हवा दिखाना उसके रेशों को जीवंत बनाए रखता है। यदि तकिया अत्यधिक पुराना हो चुका है, उसके अंदर की भराई गांठदार या खराब हो चुकी है और गंध पूरी तरह नहीं निकल रही, तो केवल सफाई के भरोसे रहने के बजाय नया तकिया खरीदना ही बुद्धिमानी है।



















