घर के फर्श पर बिछा हुआ एक सुंदर गलीचा कमरे के समूचे माहौल को निखार देता है, लेकिन इसके लिए हर दफा बाजार से महंगा कारपेट खरीदना कतई जरूरी नहीं होता। आपके घर की अलमारी में पड़े पुराने कपड़े, बेकार हो चुकी जींस, पुरानी सूती साड़ियां, जूट की मोटी रस्सी या बुनाई वाला यार्न भी शानदार फर्श की सजावट का जरिया बन सकते हैं। इन अप्रयुक्त वस्तुओं को फेंकने की बजाय थोड़ा सा समय और रचनात्मकता लगाकर आप ऐसा गलीचा बना सकते हैं जो पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल हो, आपकी पसंद के रंगों और आकार में ढला हो और आपके कमरे की सजावट में एकदम अनूठा आकर्षण भर दे।
खुद गलीचा बनाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपने कमरे के खाली स्थान और रंग संयोजन के हिसाब से उसकी लंबाई, चौड़ाई और डिजाइन तय कर सकते हैं। अपनी जरूरत और सहूलियत के आधार पर आप सिलाई वाली या बिना सिलाई वाली तकनीकों का चुनाव कर सकते हैं। यहां ऐसे सात व्यावहारिक और आसान तरीके बताए जा रहे हैं जिनकी मदद से बेकार सामान को नया रूप दिया जा सकता है।
पुरानी टी-शर्ट की चोटी बनाकर तैयार करें गोल गलीचा
अलमारी में रखी ऐसी टी-शर्ट जिनका रंग उड़ चुका हो या जो छोटी हो गई हों, गलीचा बनाने के लिए सबसे उपयुक्त सामग्री हैं। इस तकनीक के लिए सबसे पहले टी-शर्ट को लगभग दो इंच की चौड़ाई वाली लंबी पट्टियों में काट लें। इसके बाद तीन पट्टियों को एक सिरे पर मजबूती से बांधें और सामान्य बालों की तरह उनकी एक लंबी चोटी गूंथ लें। जब चोटी तैयार हो जाए, तो उसे केंद्र से शुरू करते हुए गोल-गोल घुमाते जाएं और हर नए घेरे को पिछले घेरे के साथ सपाट रखकर सिलते रहें। इस दौरान यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि पट्टियों को बहुत ज्यादा खींचकर न गूंथा जाए, क्योंकि अधिक खिंचाव से तैयार गलीचे के किनारे ऊपर की तरफ मुड़ने लगते हैं और वह फर्श पर चपटा नहीं बैठता।
मोटी जूट की रस्सी और ग्लू गन से बनाएं टिकाऊ रग
प्राकृतिक और देहाती बनावट पसंद करने वालों के लिए जूट की रस्सी का विकल्प सबसे बेहतरीन है। इसके निर्माण के लिए आपको केवल एक मजबूत मोटी जूट की रस्सी और एक गर्म गोंद देने वाली ग्लू गन की आवश्यकता होती है। रस्सी के एक सिरे से शुरुआत करते हुए उसे सपाट गोल चकती की तरह लपेटते जाएं और प्रत्येक नए घेरे की भीतरी सतह पर ग्लू गन से गोंद लगाकर पिछले हिस्से से अच्छी तरह चिपकाते रहें। ग्लू गन का उपयोग करते वक्त हाथों की सुरक्षा का खास ध्यान रखें, क्योंकि अत्यधिक गर्म गोंद से त्वचा जलने का जोखिम रहता है। इस तरह तैयार किया गया खुरदरा और मजबूत जूट रग मुख्य प्रवेश द्वार अथवा बालकनी के पास बिछाने के लिए सबसे बढ़िया साबित होता है।
सूती साड़ी की पट्टियों को नेट मैट पर बांधकर बनाएं फूला हुआ गलीचा
घर में मौजूद पुरानी सूती साड़ी से भी बेहद आरामदायक और रंगीन गलीचा बनाया जा सकता है। इसके लिए सूती साड़ी को बराबर चौड़ाई वाली पट्टियों में हाथ से फाड़ लें या कैंची से काट लें। इसके बाद बाजार में मिलने वाली एक प्लास्टिक या कपड़े की नेट मैट लें और साड़ी की इन पट्टियों को नेट के छेदों में से गुजारकर एक-एक करके कसकर बांधते जाएं। पट्टियों को बिल्कुल पास-पास बांधना चाहिए ताकि बीच में कोई खाली जगह न बचे और गलीचा पूरी तरह घना तथा फूला हुआ दिखाई दे। मुलायम सूती कपड़े से बना यह गलीचा शयनकक्ष में बिस्तर के पास या भोजन की मेज के नीचे रखने पर पैरों को बेहद सुकून देता है।
कैनवास के कपड़े पर पेंटर टेप से बनाएं मनचाहा ज्यामितीय पैटर्न
यदि आपको रंगों और ब्रश के साथ काम करना पसंद है, तो एक सादा कैनवास कपड़ा आपके लिए सुंदर कैनवास गलीचा बन सकता है। इसके लिए एक भारी कैनवास फैब्रिक लें और उस पर पेंटर टेप चिपकाकर अपनी पसंद की धारियां, चौकोर खाने या जिगजैग जैसी ज्यामितीय आकृतियां बना लें। इसके बाद टेप के बीच की खुली जगहों पर पसंदीदा फैब्रिक पेंट भरें। जैसे ही पेंट का काम पूरा हो और रंग हल्का गीला ही रहे, तुरंत सावधानी से पेंटर टेप को हटा दें, जिससे सभी रेखाओं के किनारे एकदम साफ और स्पष्ट बने रहें। रंग पूरी तरह सूख जाने के बाद गलीचे की सतह पर एक सुरक्षात्मक क्लियर कोट लगा दें, ताकि रोजाना चलने-फिरने से रंग सुरक्षित रहे और लंबे समय तक न छूटे।
सादे कॉयर डोरमैट को स्टैंसिल और स्पंज से दें नया रूप
प्रवेश द्वार पर रखा हुआ साधारण नारियल के रेशों वाला कॉयर डोरमैट अगर दिखने में उबाऊ लग रहा है, तो उसे आकर्षक बनाने के लिए स्टैंसिल तकनीक का सहारा लिया जा सकता है। इसके लिए आप परिवार का नाम, कोई सुंदर बॉर्डर या फिर पत्तियों जैसी किसी आकृति वाला स्टैंसिल चुन सकते हैं। स्टैंसिल को डोरमैट के ऊपर सही जगह पर रखें और ब्रश का उपयोग करने के बजाय पेंट में हल्के भीगे स्पंज से हल्के हाथों से थपथपाएं। स्पंज का इस्तेमाल करने से सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि पेंट स्टैंसिल के किनारों के नीचे नहीं रिसता और डिजाइन बिल्कुल साफ उभरती है। तैयार किए गए डोरमैट को इस्तेमाल में लाने से पहले खुली हवा में पूरी तरह सूखने दें।
यार्न के छोटे पोम-पोम जोड़कर तैयार करें मुलायम गलीचा
ऊन अथवा बुनाई वाले यार्न से बनाए गए पोम-पोम बच्चों के कमरे के लिए एक बेहद कोमल और आकर्षक गलीचा बना सकते हैं। घर पर पोम-पोम बनाने के लिए रसोई में इस्तेमाल होने वाले कांटे के चारों ओर यार्न को लगभग 30 बार कसकर लपेटें। इसके बाद लपेटे गए हिस्से के ठीक बीच में एक धागा डालकर मजबूती से गांठ बांध दें और दोनों किनारों पर बने लूप को कैंची से काट दें। ऐसा करने से एक गोल और फूला हुआ पोम-पोम बनकर तैयार हो जाएगा। इस तरह के कई पोम-पोम बनाकर उन्हें सुई-धागे की मदद से एक सादी जालीदार या कपड़े की मैट पर पास-पास सिल दें। यदि आपके पास घर पर इतने सारे पोम-पोम बनाने का समय न हो, तो आप बाजार से तैयार पोम-पोम खरीदकर भी उन्हें मैट पर सिल सकते हैं।
पुरानी जींस के डेनिम पैचवर्क से बनाएं मजबूत कारपेट
जींस का डेनिम कपड़ा अपनी मजबूती और लंबे समय तक चलने वाले गुणों के लिए जाना जाता है, इसलिए यह उच्च आवाजाही वाले क्षेत्रों के कारपेट के लिए सबसे उपयुक्त है। पुरानी जींस के सही और बिना फटे हिस्सों को चौकोर या आयताकार बराबर टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इन सभी डेनिम टुकड़ों को एक क्रम में रखकर आपस में सिलते हुए एक बड़ा पैचवर्क कपड़ा तैयार करें। गलीचे को नीचे से आधार देने और जमीन पर फिसलने से रोकने के लिए इसके पिछले हिस्से पर एक मजबूत बैकिंग कपड़ा सिलें। चूंकि डेनिम का कपड़ा काफी मोटा होता है और कई परतों को हाथ की सुई से सिलना मुश्किल हो सकता है, इसलिए सिलाई मशीन का उपयोग करना अधिक आसान और टिकाऊ रहता है।



















