त्योहारों और शादियों के सीजन में रेशमी साड़ियों की खरीदारी करते समय सिर्फ उनका आकर्षक रंग और खूबसूरत डिजाइन देखना ही काफी नहीं होता है। किसी भी साड़ी में इस्तेमाल किया जाने वाला रेशम और जरी का काम उसकी कुल कीमत, दिखने वाले लुक और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता पर बहुत गहरा असर डालता है। खासकर जब बात बनारसी, कांजीवरम और पैठनी जैसी पारंपरिक साड़ियों की हो, तो खरीदार के लिए यह समझना और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि कपड़ा असल में किस श्रेणी का है और उसमें लगी हुई जरी की सामग्री कैसी है।
बाजार में पारंपरिक शुद्ध रेशम के विकल्प के रूप में सिल्क ब्लेंड और आर्ट सिल्क जैसी कई अलग-अलग वैरायटी आसानी से उपलब्ध होती हैं। ऐसी स्थिति में कपड़े के धागे की बनावट, उसकी चमक, उसके कुल वजन और उत्पाद के लेबल पर दी गई जरूरी जानकारियों को ध्यान से पढ़कर शुरुआती अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, घर पर अपनी तरफ से किए जाने वाले किसी भी तरह के परीक्षण को हमेशा अंतिम और पुख्ता प्रमाण नहीं मान लेना चाहिए, क्योंकि कई बार इनसे सही स्थिति का पता नहीं चल पाता है।
शुद्ध रेशम और सिल्क ब्लेंड के बीच का मुख्य अंतर
रेशम मुख्य रूप से एक प्राकृतिक प्रोटीन फाइबर होता है। शहतूत रेशम को विशेष रूप से इसकी बेहद चिकनी बनावट और प्राकृतिक चमक के लिए जाना जाता है। इसके विपरीत, टसर या कोसा सिल्क की बनावट की बात करें तो वह अपेक्षाकृत रूप से काफी ज्यादा टेक्सचर्ड हो सकती है। इसके मुकाबले जब बात सिल्क ब्लेंड की आती है, तो उसमें शुद्ध रेशम के साथ अन्य प्रकार के दूसरे फाइबर भी मिलाए जा सकते हैं। आर्ट सिल्क या सिंथेटिक फैब्रिक को मुख्य रूप से असली रेशम जैसी चमक पैदा करने के लिए ही तैयार किया जाता है। यही कारण है कि केवल साड़ियों की चमक को देखकर ही उन्हें शुद्ध रेशम मान लेना बिल्कुल भी सही नहीं है। जब भी आप बाजार में कोई साड़ी खरीदें, तो उसके बिल या फिर प्रोडक्ट के लेबल पर फैब्रिक से जुड़ी जानकारी को जरूर जांच लें। अगर आप कोई महंगी साड़ी खरीद रहे हैं, तो दुकानदार से स्पष्ट रूप से यह भी पूछना चाहिए कि उसमें 100 प्रतिशत सिल्क का इस्तेमाल हुआ है या फिर वह किसी अन्य फाइबर का मिश्रण है।
बर्न टेस्ट से जुड़ी जरूरी बातें और सावधानियां
चूंकि रेशम एक प्राकृतिक प्रोटीन फाइबर होता है, इसलिए यह जलने पर किसी भी सिंथेटिक फाइबर की तुलना में बिल्कुल अलग तरह की प्रतिक्रिया देता है। पारंपरिक तरीकों के अनुसार कपड़े के किसी ढीले धागे को जलाकर उसकी उठने वाली गंध और बची हुई राख को परखा जाता है। प्राकृतिक रेशम जब जलता है, तो उससे ठीक वैसे ही जले हुए बालों जैसी गंध आती है और उसकी राख भी भुरभुरी होती है, जबकि पॉलिएस्टर जैसे कृत्रिम फाइबर जलने पर पिघलकर एक कठोर गांठ का रूप ले लेते हैं। लेकिन इस तरह के टेस्ट को घर पर सीधे साड़ी के ऊपर आजमाना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। ऐसा करने से आपका कीमती कपड़ा पूरी तरह से खराब हो सकता है और आग की वजह से चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। इसके अलावा, यदि कपड़ा मिश्रित है तो इस परीक्षण से सही परिणाम नहीं मिल पाते हैं। इसलिए इस विधि को केवल किसी प्रशिक्षित व्यक्ति या विशेषज्ञ की जांच के तौर पर ही देखा जाना सबसे बेहतर रहता है।
जरी की गुणवत्ता और उसे परखने का सही तरीका
जरी की बात करें तो यह किसी भी साड़ी के बॉर्डर, पल्लू और पूरे डिजाइन को एक खास तरह की चमक और खूबसूरती प्रदान करती है, लेकिन जरी भी कई प्रकार की हो सकती है। इसमें मुख्य रूप से असली धातु वाली जरी, सिल्वर या गोल्ड प्लेटेड जरी और सिंथेटिक मेटैलिक जरी शामिल होती हैं। केवल अपनी आंखों से देखकर यह तय करना बेहद कठिन हो सकता है कि जरी के निर्माण में किस विशिष्ट धातु का उपयोग किया गया है। जरी को किसी नुकीली चीज से खुरचकर उसके अंदर की धातु देखने जैसे घरेलू तरीके अपनाने से साड़ी को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए जब भी कोई महंगी साड़ी खरीदी जाए, तो विक्रेता से ही जरी की संरचना और उसके प्रमाण पत्र से जुड़ी पूरी जानकारी मांगना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है। यदि आप इस साड़ी को किसी पारिवारिक विरासत या फिर निवेश के उद्देश्य से खरीद रहे हैं, तो इसके बिल में फैब्रिक और जरी का पूरा विवरण लिखवाना भी काफी फायदेमंद साबित होता है। किसी भी महंगी जरी को केवल उसकी बाहरी चमक देखकर असली सोना या चांदी मान लेना समझदारी नहीं है।
साड़ी खरीदते समय इन बातों का रखें खास ख्याल
बाजार से कोई भी साड़ी खरीदने से पहले कपड़े को अपने हाथों से छूकर उसकी वास्तविक बनावट को महसूस करना चाहिए। रेशम की चमक आमतौर पर कभी भी एक जैसी सपाट नहीं दिखाई देती है, बल्कि अलग-अलग कोणों और रोशनी के पड़ने पर उसका पूरा लुक बदल जाता है। साड़ी की बुनाई को भी बहुत गौर से देखें और उसके बॉर्डर तथा पल्लू पर किए गए काम की करीब से जांच करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप सीधे तौर पर दुकानदार से सवाल करें कि क्या यह साड़ी सौ फीसदी शुद्ध सिल्क है, सिल्क ब्लेंड है या फिर केवल आर्ट सिल्क है। इसके अलावा जरी के संबंध में भी यह जरूर पूछें कि उसे बनाने के लिए किस प्रकार की धातु या सामग्री का प्रयोग किया गया है।



















