पाकिस्तान की सियासत में इस समय भारी उबाल देखा जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों विशेष तौर पर खैबर पख्तूनख्वा में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखा संघर्ष हुआ है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें गोलियां चलाने और प्रदर्शनकारियों की पिटाई की घटनाएं सामने आई हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई संवेदनशील इलाकों में शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार को सेना की तैनाती करनी पड़ी है ताकि व्यवस्था को संभाला जा सके।
राज्यपाल शासन और मंत्रियों पर कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत खैबर पख्तूनख्वा में राज्यपाल शासन लागू किए जाने के बाद हुई। सरकार ने इमरान खान की रिहाई के लिए चलाए जा रहे आंदोलन और उनके समर्थकों के लॉन्ग मार्च को विफल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसके तहत प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया है और चीफ मिनिस्टर सुहैल आफरीदी समेत कई प्रमुख मंत्रियों को प्रिवेंटिव कस्टडी में ले लिया गया है। राजधानी इस्लामाबाद पहुंचने का प्रयास कर रहे समर्थकों को रास्ते में ही खदेड़ दिया गया, जिससे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और अधिक भड़क गया और वे सड़कों पर उतर आए।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खूनी संघर्ष
प्रशासनिक कार्रवाई से आक्रोशित भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं। खैबर पख्तूनख्वा में नियंत्रण बनाए रखना स्थानीय पुलिस के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। एक तरफ जहाँ आंतरिक अशांति अपने चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी बदहाली के दौर से गुजर रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को कर्ज मिलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार और सेना का पूरा ध्यान केवल इमरान खान के समर्थकों को कुचलने पर केंद्रित है, जिसकी वजह से देश को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
आपातकाल के खिलाफ कानूनी चुनौती
इससे पहले रविवार को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रांतीय क्षेत्र में आपातकाल की घोषणा की थी। उन्होंने बढ़ते आतंकवादी हमलों, संवैधानिक व्यवस्था के पूरी तरह ठप होने और बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234(1) के तहत यह कदम उठाया। पीटीआई के अनुसार, इस विवादास्पद फैसले को चुनौती देते हुए सोमवार को पेशावर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया है कि यह आपातकाल और राज्यपाल शासन पूरी तरह से अवैध, असंवैधानिक और दुर्भावनापूर्ण है, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है।



















