राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का चित्तरंजन पार्क (CR पार्क), जिसे प्यार से देशवासी 'मिनी कोलकाता' के नाम से भी जानते हैं, इस साल के सबसे बड़े बंगाली उत्सव यानी दुर्गा पूजा के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है। स्थानीय कलाकार इन दिनों दिन-रात एक करके मूर्तियों और विशाल पंडालों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। यदि आप इस वर्ष दक्षिण दिल्ली में आयोजित होने वाले इस भव्य और सांस्कृतिक उत्सव की रौनक देखना चाहते हैं, तो यहां के विभिन्न पंडालों की अनूठी थीम और उनकी खासियतों के बारे में जानना बेहद दिलचस्प होगा।
जीके 2 दुर्गोत्सव में गूंजेगी वंदे मातरम की गूंज
यदि आप दिल्ली मेट्रो के सफर के जरिए CR पार्क पहुंचने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी शुरुआत जीके 2 दुर्गोत्सव पंडाल से कर सकते हैं। यह पंडाल ग्रेटर कैलाश मेट्रो स्टेशन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु और दर्शक को देशभक्ति की एक अलग ही अलख जगती हुई महसूस होगी, क्योंकि इस साल इस प्रमुख पंडाल की मुख्य थीम 'वंदे मातरम' तय की गई है।
इस अनूठी थीम के पीछे के विचारों को साझा करते हुए दुर्गात्सव GK2 कमिटी के वाइस प्रेसिडेंट सम्राट बनर्जी ने कहा कि वे आज की आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में 'वंदे मातरम' के असली और गहरे अर्थ को जीवंत करने का प्रयास कर रहे हैं। इस भव्य पंडाल के भीतर महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध 'बंग माता' से जुड़ी सुंदर कलाकृतियां प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएंगी। इसके साथ ही, यहां रोजाना वंदे मातरम की धुन पर आधारित मनमोहक गाने, शास्त्रीय संगीत और नाट्य प्रस्तुतियां जैसे कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
सम्राट बनर्जी ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि उनकी समिति पूरे साल अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से वंदे मातरम की इस महान और प्रेरक भावना को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि नई पीढ़ी इससे गहराई से जुड़ सके।
को-ऑपरेटिव ग्राउंड में दिखेगी बंगाल की पारंपरिक जूट विरासत
जीके 2 दुर्गोत्सव से ठीक एक किलोमीटर की दूरी पर एक और प्रमुख आकर्षण आपका इंतजार कर रहा है, जिसे देखने के लिए दर्शनार्थी को-ऑपरेटिव ग्राउंड दुर्गा पूजा और सीआर पार्क काली मंदिर का रुख कर सकते हैं। अपनी स्थापना के 51वें वर्ष में प्रवेश कर रहा को-ऑपरेटिव ग्राउंड दुर्गा पूजा समिति इस बार अपने पंडाल के जरिए बंगाल की प्राचीन और समृद्ध 'जूट विरासत' को कलात्मक रूप से पेश करने जा रही है।
इस पंडाल के निर्माण कार्य और उसकी तैयारियों के बारे में बताते हुए को-ऑपरेटिव ग्राउंड दुर्गा पूजा समिति के सांस्कृतिक सचिव कल्लोल आचार्य्य ने कहा कि पूरा पंडाल और वहां प्रदर्शित किए जा रहे विभिन्न कला रूप मुख्य रूप से पर्यावरण के अनुकूल जूट और बांस का उपयोग करके तैयार किए जा रहे हैं।
इस भव्य पंडाल का औपचारिक उद्घाटन रामकृष्ण मिशन, नई दिल्ली के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद के कर-कमलों द्वारा संपन्न कराया जाएगा। उद्घाटन की यह खास रस्म पूरी होने के बाद गुरुवार, 15 अक्टूबर को यह पंडाल आम जनता और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा।
सीआर पार्क में इन अन्य प्रमुख पंडालों के भी करें दर्शन
दक्षिण दिल्ली के इस इलाके में केवल गिने-चुने पंडाल ही नहीं हैं, बल्कि यहां घूमने के लिए कई और शानदार पंडाल भी मौजूद हैं जो अपनी भव्यता के लिए जाने जाते हैं। CR पार्क में आने वाले लोग अपनी पसंद के अनुसार बी-ब्लॉक दुर्गा पूजा, नवापल्ली या पॉकेट 40 दुर्गा पूजा, डी-ब्लॉक दुर्गा पूजा, पूर्वाचल दुर्गा पूजा और मिलन समिति दुर्गा पूजा पंडालों का भी दौरा कर सकते हैं, जहां हर साल की तरह इस बार भी भारी भीड़ जुटने की पूरी संभावना है।
अलकनंदा के कात्यायनी ट्रस्ट में दिखेगा रवींद्रनाथ टैगोर का सहज पाठ
जो लोग मुख्य CR पार्क की सीमा से थोड़ा आगे बढ़कर भी पंडालों की खूबसूरती और उनकी थीम का आनंद लेना चाहते हैं, वे पास ही स्थित अलकनंदा और गोविंद पुरी के इलाकों का रुख कर सकते हैं। इस विशेष वर्ष में, अलकनंदा क्षेत्र स्थित कात्यायनी ट्रस्ट का पंडाल बंगाली भाषा की बेहद प्रसिद्ध और लोकप्रिय प्रारंभिक पुस्तक 'सहज पाठ' पर आधारित होने जा रहा है।
कात्यायनी ट्रस्ट के सेक्रेटरी अर्नब भट्टाचार्य ने इस थीम के महत्व को समझाते हुए कहा कि आज के समय में हमारी समृद्ध बंगाली भाषा और सांस्कृतिक जड़ें धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। विशेष तौर पर महानगरों और अन्य जगहों पर रहने वाले 'प्रवासी बंगाली बच्चों' के लिए अपनी मातृभाषा को उसकी असल गहराई के साथ जानना और समझना काफी कठिन होता जा रहा है।
'सहज पाठ' की थीम पर सजाया जा रहा यह विशेष पंडाल उसी सुदूर बंगाल को फिर से टटोलने और जानने की एक बेहद विनम्र कोशिश है, जिसे समय की धूल धीरे-धीरे धुंधला करती जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उस संस्कृति की सदाबहार सुंदरता को फिर से खोजना और उसकी जीवंत भावना को आने वाली पीढ़ियों तक पूरी सहजता के साथ पहुंचाना है। आयोजकों का मानना है कि कुछ सांस्कृतिक परंपराएं केवल कि किताबों में याद रखने के लिए नहीं होतीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में जीना पड़ता है, उन्हें संजोना पड़ता है और बड़े प्यार से एक पीढ़ी से उठाकर दूसरी पीढ़ी के हाथों में सौंपना पड़ता है।
CR पार्क पहुंचने के लिए अपनाएं ये आसान रास्ते
यदि आप त्योहारों के इन खास दिनों में CR पार्क और उसके आसपास के पंडालों का दीदार करने जाने की सोच रहे हैं, तो यहां पहुंचना बेहद आसान है। CR पार्क के सबसे पास स्थित मेट्रो स्टेशन नेहरू एन्क्लेव है, जो मैजेंटा लाइन के अंतर्गत आता है। इसके अलावा, आने वाले लोग अपनी सुविधा और पंडाल में एंट्री की सुगमता के हिसाब से ग्रेटर कैलाश मेट्रो स्टेशन (जो भी मैजेंटा लाइन पर ही स्थित है) से भी बहुत आसानी से CR पार्क पहुंच सकते हैं। ये दोनों ही मेट्रो स्टेशन प्रमुख पूजा पंडालों से केवल 5 से 10 मिनट की पैदल दूरी पर स्थित हैं, जिससे त्योहारों के दौरान होने वाली भारी भीड़-भाड़ और ट्रैफिक जाम से बचकर आना-जाना काफी सुविधाजनक हो जाता है।


















