गर्मियों के मौसम में मिट्टी के मटके का ठंडा और सौंधी खुशबू वाला पानी पीने का आनंद ही कुछ अलग होता है। हालांकि लगातार इस्तेमाल करने के बाद मटके की अंदरूनी सतह पर काई जमने लगती है, गंदगी इकट्ठा हो जाती है और कई बार बदबू भी आने लगती है। ऐसे हालात में सिर्फ बर्तन का पानी बदल देना ही काफी नहीं होता है, बल्कि उसकी नियमित रूप से गहरी सफाई करना भी बहुत जरूरी हो जाता है। खासकर उस मटके की देखभाल में विशेष सावधानी रखनी चाहिए जिसमें रोजाना पीने का पानी स्टोर किया जाता है। अच्छी बात यह है कि इस पारंपरिक बर्तन को चमकाने और उसकी महक वापस लाने के लिए बाजार से किसी महंगे या केमिकल युक्त सामान को लाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है।
सफाई से पहले अपनाएं शुरुआती चरण
मटके की सफाई का काम शुरू करने से सबसे पहले बर्तन के अंदर बचे हुए पुराने पानी को पूरी तरह खाली कर देना चाहिए। इसके बाद उसे सामान्य साफ पानी से एक बार अच्छी तरह धो लें ताकि ढीली गंदगी निकल जाए। यदि बर्तन के भीतर काई की एक परत जमी हुई दिखाई दे रही है, तो उसे साफ करने के लिए हमेशा किसी नरम ब्रश या मुलायम स्क्रबर का ही इस्तेमाल करें। इस दौरान कभी भी बहुत कठोर या नुकीले ब्रश का प्रयोग न करें, क्योंकि ऐसा करने से मिट्टी की पकी हुई सतह खुरदरी हो सकती है और बर्तन अंदर से कमजोर हो कर टूट सकता है। मटके की बाहरी परत को नुकसान पहुँचाए बिना उसकी उम्र बढ़ाने के लिए हल्के हाथों से ही पूरी प्रक्रिया को पूरा करना समझदारी होती है।
नींबू और बेकिंग सोडा का जादुई असर
घरेलू सामग्री के तौर पर नींबू मटके की बदबू और गंदगी दूर करने में बेहद असरदार साबित होता है। नींबू के रस को थोड़े से पानी में अच्छी तरह मिलाकर घोल तैयार कर लें और इसे मटके की अंदरूनी सतह पर चारों तरफ लगा दें। इस लेप को कुछ देर के लिए बर्तन के अंदर वैसे ही छोड़ दें ताकि मैल फूल जाए। इसके बाद एक मुलायम ब्रश की मदद से हल्के हाथों से अंदरूनी हिस्से को साफ कर लें। मटके के बाहरी हिस्से को भी नींबू के छिलके की मदद से हल्के हाथों से रगड़ा जा सकता है ताकि उस पर जमा चिकनाई या मैल हट जाए। सफाई की इस प्रक्रिया के बाद मटके को साफ पानी से इतनी बार धोएं कि नींबू का कोई भी अवशेष अंदर बाकी न रह जाए।
यदि बर्तन के भीतर गंदगी या काई की परत कुछ ज्यादा ही जिद्दी हो गई है, तो ऐसी स्थिति में बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना एक बेहतरीन विकल्प होता है। थोड़े से पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर एक हल्का घोल तैयार कर लें और इस मिश्रण से मटके के अंदरूनी हिस्से की सतह को धीरे-धीरे साफ करें। इसके बाद बर्तन को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। ध्यान रखने वाली बात यह है कि बेकिंग सोडा या किसी भी अन्य सफाई सामग्री का बहुत ज्यादा मात्रा में प्रयोग करने से बचना चाहिए। पानी स्टोर करने वाले किसी भी बर्तन की सफाई में सबसे जरूरी हिस्सा यह सुनिश्चित करना होता है कि धोने के बाद उसकी अच्छी तरह कुल्ला की जाए ताकि कोई भी केमिकल या सोडा बर्तन के अंदर न बचा रहे।
धोने के बाद सूखने का रखें ध्यान
मटके को अच्छी तरह से धोने और साफ पानी से कुल्ला करने के बाद उसे तुरंत इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। बर्तन को कुछ समय के लिए उल्टा करके या धूप में खुला छोड़ देना चाहिए ताकि उसकी अंदरूनी सतह पूरी तरह से सूख सके। जब मटका अंदर से बिल्कुल सूख जाए, तभी उसमें दोबारा ताजा पीने का पानी भरना चाहिए। गर्मियों के दिनों में मटके में रखे हुए पानी को रोजाना बदलना भी सेहत के लिहाज से बेहद फायदेमंद होता है। यदि कभी पानी का प्राकृतिक स्वाद या उसकी महक में थोड़ा सा भी बदलाव महसूस हो, तो उसे पीने के काम में लेने के बजाय तुरंत मटके को दोबारा से साफ करना चाहिए। मिट्टी के इस बर्तन में लंबे समय तक बिना सफाई के पानी जमा रहने से बैक्टीरिया और गंदगी तेजी से बढ़ सकती है, इसलिए गर्मियों के पूरे सीजन में मटके की नियमित साफ-सफाई को अपनी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बनाना चाहिए।



















