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झारखंड के बोकारो थर्मल पावर स्टेशन की चिमनियां याद दिलाती हैं पबजी का मिल्टा पावर, जानिए इसका नेहरू कालीन इतिहासट्रेंड्स
26 अग॰ 2026, 7:08 am (1 घंटे पहले)· 3

झारखंड के बोकारो थर्मल पावर स्टेशन की चिमनियां याद दिलाती हैं पबजी का मिल्टा पावर, जानिए इसका नेहरू कालीन इतिहास

झारखंड के बोकारो जिले में स्थित बोकारो थर्मल पावर स्टेशन की ऊंची चिमनियां युवाओं को पबजी गेम के प्रसिद्ध मिल्टा पावर की याद दिलाती हैं। 1952 में स्थापित इस ऐतिहासिक प्लांट का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था।

प्रसिद्ध वीडियो गेम पबजी (PUBG) खेलने वाले गेमर इसके चर्चित नक्शे की लोकेशन 'मिल्टा पावर' से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इस वर्चुअल बैटलग्राउंड में बनी विशाल चिमनियों और ऊंचे टावरों का नजारा अब झारखंड के बोकारो जिले में भी देखने को मिल रहा है। बेरमो क्षेत्र में स्थित बोकारो थर्मल पावर स्टेशन (BTPS) का विशाल औद्योगिक ढांचा पहली ही नजर में गेमर्स को पबजी के उसी मशहूर इलाके की याद दिला देता है। यह अनोखा दृश्य स्थानीय युवाओं और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच कौतूहल और चर्चा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

गेमिंग दुनिया की लोकेशन और असल जिंदगी का पावर प्लांट

पबजी गेम के भीतर 'मिल्टा पावर' अपनी ऊंची-ऊंची चिमनियों, बड़े-बड़े स्ट्रक्चर और रोमांचक मुकाबलों के लिए जाना जाता है। गेम के खिलाड़ी अक्सर वहां हथियारों, एयरड्रॉप और रणनीतिक बढ़त के लिए उतरते हैं। इसके विपरीत, बोकारो थर्मल पावर स्टेशन में यही दृश्य वास्तविक जीवन में बिजली उत्पादन के एक बड़े केंद्र के रूप में कार्य करता है। यह पावर प्लांट झारखंड के साथ-साथ आसपास के कई अन्य क्षेत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आभासी दुनिया की रोमांचक लोकेशन और वास्तविक जीवन के औद्योगिक केंद्र के बीच का यह मेल लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है।

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वर्ष 1952 का इतिहास और पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा उद्घाटन

बोकारो थर्मल पावर स्टेशन का इतिहास भारत के शुरुआती औद्योगिक विकास से गहराई से जुड़ा हुआ है। इस परियोजना की स्थापना वर्ष 1952 में की गई थी, और इसे पूरे एशिया की शुरुआती बहुउद्देशीय थर्मल पावर परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। देश के लिए इस महत्वपूर्ण पावर प्लांट का आधिकारिक उद्घाटन 21 फरवरी 1953 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण बोकारो का यह क्षेत्र केवल बिजली उत्पादन का केंद्र ही नहीं है, बल्कि देश की समृद्ध ऐतिहासिक और औद्योगिक विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है।

युवाओं में बढ़ता क्रेज और सोशल मीडिया पर तस्वीरें

आज के दौर में बोकारो और आसपास के क्षेत्रों के युवा गेमर्स के लिए यह पावर प्लांट सिर्फ एक औद्योगिक इमारत नहीं रह गया है। इसकी विशाल चिमनियां और जटिल ढांचा पबजी के 'मिल्टा पावर' जैसा आभास देता है, जिसके कारण युवा इस स्थान के प्रति विशेष रूप से आकर्षित हो रहे हैं। कई स्थानीय युवा और गेम लवर्स इस पावर प्लांट के आसपास पहुंचकर इसके सुंदर और भव्य नजारों की तस्वीरें खींचते हैं तथा वीडियो बनाते हैं। इन तस्वीरों और वीडियो को इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जा रहा है, जिससे यह रियल लाइफ स्पॉट लगातार चर्चा में बना हुआ है।

बोकारो थर्मल क्षेत्र तक पहुंचने का सड़क मार्ग

यदि आप भी गेमिंग दुनिया के इस मशहूर स्पॉट से मिलते-जुलते वास्तविक स्थान को करीब से देखना चाहते हैं, तो यहां पहुंचना काफी आसान है। यात्री और गेम लवर्स कथारा और गोमिया की तरफ जाने वाले मुख्य सड़क मार्ग का उपयोग करके बोकारो थर्मल क्षेत्र तक आसानी से पहुंच सकते हैं। सड़क से गुजरते समय पावर प्लांट का विहंगम दृश्य और इसकी गगनचुंबी चिमनियां दूर से ही दिखाई देती हैं, जो हर राहगीर और पर्यटक का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं।

सवाल-जवाब

बोकारो थर्मल पावर स्टेशन की तुलना किस गेमिंग लोकेशन से की जाती है?
इसकी ऊंची चिमनियों और औद्योगिक ढांचे की तुलना प्रसिद्ध गेम पबजी (PUBG) के 'मिल्टा पावर' (Mylta Power) लोकेशन से की जाती है।
बोकारो थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना कब हुई थी?
इस थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना वर्ष 1952 में हुई थी।
बोकारो थर्मल पावर स्टेशन का उद्घाटन किसने किया था?
इस परियोजना का उद्घाटन 21 फरवरी 1953 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था।
बोकारो थर्मल पावर स्टेशन किस जिले में स्थित है और वहां कैसे पहुंचें?
यह झारखंड के बोकारो जिले के बेरमो क्षेत्र में स्थित है। यहां कथारा और गोमिया जाने वाले सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।
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