करेला अपनी कड़वाहट के कारण अक्सर बच्चों और बड़ों की पसंद से दूर रहता है, लेकिन जब इसे तीखे मसालों, भरपूर लहसुन और कच्चे आम के साथ अचार का रूप दिया जाता है, तो इसकी कड़वाहट पूरी तरह संतुलित हो जाती है। यह खास अचार न केवल पराठों और दाल-चावल का स्वाद दोगुना करता है, बल्कि रोटी के साथ परोसे जाने पर हर कोई इसे मांगकर खाता है। कच्चे आम की प्राकृतिक खटास और बारीक कटे लहसुन की तीखी खुशबू मिलकर करेले के इस पारंपरिक अचार को एक लाजवाब जायका प्रदान करती हैं।
करेले के अचार के लिए जरूरी सामग्री
इस चटपटे और खुशबूदार अचार को तैयार करने के लिए रसोई में मौजूद बुनियादी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। मुख्य सामग्री के रूप में करेला, बारीक कटी हुई लहसुन की कलियां और मोटे या मध्यम आकार में कद्दूकस किया हुआ कच्चा आम लिया जाता है। सूखे मसालों में सौंफ, राई, मेथी दाना और अजवाइन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा 1 से 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, हींग, स्वादानुसार नमक और आवश्यकतानुसार सफेद सिरका भी शामिल किया जाता है। अचार को पकाने और सुरक्षित रखने के लिए करीब आधा कप सरसों का तेल इस्तेमाल होता है।
करेले की कड़वाहट दूर करने की शुरुआती तैयारी
अचार बनाने से पहले करेले को अच्छी तरह धोकर एक साफ और सूखे कपड़े से पूरी तरह पोंछ लें। इसके बाद करेले को पतले-पतले गोल या लंबे टुकड़ों में काटें और उनके अंदर के बीजों को बाहर निकाल दें। कटे हुए करेले के टुकड़ों में थोड़ा नमक डालकर हाथों से अच्छी तरह मिलाएं और 2 से 3 घंटे के लिए एक बर्तन में रख दें। इस प्रक्रिया से करेले का अतिरिक्त कड़वा पानी बाहर निकल आता है और कड़वाहट काफी हद तक कम हो जाती है। 2 से 3 घंटे बाद करेले को हल्का दबाकर कड़वा पानी निचोड़ लें, फिर उन्हें साफ पानी से धोकर पूरी तरह सुखा लें। ध्यान रखें कि अचार की तैयारी के दौरान करेले के टुकड़ों में जरा सी भी नमी या पानी नहीं रहना चाहिए।
अचार के खास मसाले और आम-लहसुन का मिश्रण
अचार का असली स्वाद उसके ताजे भुने मसालों पर निर्भर करता है। एक पैन में सौंफ, राई, मेथी दाना और अजवाइन को धीमी आंच पर हल्का सा भून लें ताकि उनकी प्राकृतिक नमी निकल जाए और खुशबू आने लगे। मसालों को भूनते समय ध्यान रखें कि वे जलने न पाएं। ठंडा होने पर इन भुने हुए मसालों को मिक्सी या ओखली में दरदरा पीस लें। इसके बाद लहसुन की कलियों को छीलकर एकदम बारीक चॉप कर लें। इस अचार में लहसुन की मात्रा थोड़ी ज्यादा रखी जाती है क्योंकि यह अचार को एक खास तीखापन और मनभावन सुगंध देता है। कच्चे आम को धोकर, छीलकर कद्दूकस कर लें। यदि कद्दूकस किए आम में ज्यादा रस या पानी दिखे, तो उसे हाथों से हल्का निचोड़कर अलग कर दें।
पकाने की सही विधि और मसालों का मिलावट
एक बड़ी और भारी कड़ाही में करीब आधा कप सरसों का तेल डालकर तेज गर्म करें। जब तेल से हल्का धुआं निकलने लगे, तो गैस की आंच धीमी कर दें। गर्म तेल में सबसे पहले हींग और बारीक कटा हुआ लहसुन डालें। लहसुन को हल्का सा भूनें, लेकिन ध्यान रखें कि वह ज्यादा भूरा या काला न हो। अब इसमें कद्दूकस किया हुआ कच्चा आम मिलाएं और 2 से 3 मिनट तक भूनें ताकि आम का कच्चापन और नमी समाप्त हो जाए। इसके बाद सूखे और तैयार करेले के टुकड़े कड़ाही में डालें और अच्छी तरह चलाएं। अब इसमें दरदरा पिसा हुआ अचार मसाला, हल्दी पाउडर, 1 से 2 छोटे चम्मच लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें। यदि आप अचार में हल्की खटास और शेल्फ लाइफ बढ़ाना चाहते हैं, तो अपनी पसंद के अनुसार थोड़ा सफेद सिरका भी मिला सकते हैं। सभी सामग्रियों को आपस में मिलाकर धीमी आंच पर कुछ मिनटों तक पकाएं।
लंबे समय तक अचार सुरक्षित रखने के जरूरी नियम
पकने के बाद गैस बंद कर दें और अचार को कड़ाही में ही पूरी तरह ठंडा होने दें। जब अचार कमरे के तापमान पर आ जाए, तो इसे एक साफ, सूखे और रोगाणुरहित कांच के जार में भरें। अचार को खराब होने से बचाने के लिए नमी से दूर रखना सबसे महत्वपूर्ण नियम है। जार और इस्तेमाल में आने वाला चम्मच पूरी तरह सूखा होना चाहिए। अचार भरने के बाद जार को 2 से 3 दिनों के लिए हल्की धूप में रखें, इससे मसालों का स्वाद करेले में अच्छी तरह समा जाता है। जब भी अचार निकालना हो, हमेशा सूखे चम्मच का ही प्रयोग करें। यदि आप इस अचार को महीनों तक सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो जार में ऊपर तक सरसों के तेल की एक पर्याप्त परत बनी रहनी चाहिए। यह तेल की परत अचार को फंगस और हवा से बचाती है, जिससे इसका स्वाद लंबे समय तक एकदम ताजा बना रहता है।


















