अक्टूबर का महीना चढ़ते ही और राजधानी की आबोहवा में हल्की सिहरन घुलते ही, रास्तों पर एक जानी-पहचानी सी महक लोगों का ध्यान खींचने लगती है। भोर के वक्त टहलने वाले हों या दफ्तर जाने की जल्दी में रहने वाले लोग, हवा में तैरती यह मीठी खुशबू हर किसी का अनुभव अलग बना देती है। किसी को यह महक बेहद भानी लगती है, तो कोई इसकी अधिकता से असहज भी हो जाता है। अगर आप भी इन दिनों ऐसी ही किसी तेज खुशबू से वाकिफ हुए हैं, तो इसके पीछे किसी इत्र या कृत्रिम सुगंध का हाथ नहीं है, बल्कि यह प्रकृति का अपना चमत्कार है जो शहर के पेड़ों से जुड़ा है।
सप्तपर्णी के फूलों का जादू
दिल्ली के कई हिस्सों में पाई जाने वाली इस महक का मुख्य स्रोत सप्तपर्णी का पेड़ होता है। वानस्पतिक भाषा में इसे Alstonia scholaris के नाम से जाना जाता है, जबकि अंग्रेजी में इसे डेविल ट्री या ब्लैकबोर्ड ट्री भी कहा जाता है। शहर के अलग-छोटे बड़े पार्कों और सड़कों के किनारे यह आसानी से नजर आ जाता है। इसके फूल भले ही आकार में काफी छोटे होते हैं, लेकिन उनमें महक बिखेरने की अद्भुत क्षमता होती है जो दूर-दूर तक महसूस की जा सकती है।
मसालेदार और मीठी सुगंध
इस पौधे के फूलों की खुशबू में एक अजीब सी मिठास के साथ-साथ मसालों जैसी तीक्ष्णता भी घुली होती है। बहुत से लोग इसकी तुलना इलायची की महक से भी करते हैं। जब एक ही इलाके में खड़े कई पेड़ों पर एक साथ बहार आती है, तो पूरा माहौल महक उठता है। यही वजह है कि राहगीरों को ऐसा महसूस होता है जैसे आसपास किसी ने कोई तेज इत्र छिड़क दिया हो।
सर्दियों की आहट के साथ संबंध
इन पेड़ों में अमूमन अक्टूबर से लेकर दिसंबर के बीच फूल खिलने का सिलसिला शुरू होता है, हालांकि यह स्थानीय मौसम पर भी निर्भर करता है। ठीक इसी समय राष्ट्रीय राजधानी में गर्मी विदा होने लगती है और सुबह-शाम ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। इस प्रकार यह महक शहर के मौसम में बदलाव का एक बड़ा संकेत बन जाती है। इस सुगंध का आनंद लेने के लिए आपको किसी खास बाग में जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि सड़क पर चलते हुए ही इसका अहसास हो जाता है.
सबकी पसंद नहीं है यह महक
इसकी खुशबू को लेकर लोगों के विचार बंटे हुए हैं। जहाँ कुछ लोग इसे सर्दियों की सौगात मानते हैं, वहीं कई लोगों को यह भारी या चुभने वाली लगती है। जिन लोगों को एलर्जी की समस्या है, उन्हें इस तीव्र गंध से छींक या सांस की हल्की परेशानी भी हो सकती है, हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग होता है।
शहर की हरियाली का अहम हिस्सा
यह एक सदाबहार पौधा है जो शहरी माहौल में भी खुद को ढालकर तेजी से बढ़ता है। दिल्ली की वन संपदा में इसकी बड़ी भूमिका है। आने वाले दिनों में जब भी आपको ऐसी कोई महक महसूस हो, तो समझ जाइए कि मौसम ने करवट ले ली है और आसपास कोई सप्तपर्णी का पेड़ खड़ा है।



















