टेलीविजन धारावाहिक अनुपमा की कहानी में आने वाले दिनों में उत्सव के उल्लास के बीच भारी तनाव और खतरा देखने को मिलने वाला है। शाह परिवार में गरबा की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं, जहां रिश्तों के नए समीकरण, पुरानी तकरार और रोमांस एक साथ नजर आएंगे। एक तरफ राही और प्रेम अपने आने वाले बच्चे के भविष्य और अपनी जिम्मेदारियों को लेकर बातचीत में व्यस्त रहते हैं, तो दूसरी तरफ घर के भीतर माही और लीला के बीच आरवी को लेकर नोकझोंक होती है। हालांकि, इस पूरे जश्न के बीच सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब गरबा के दौरान अनुपमा की जान पर अप्रत्याशित खतरा मंडराने लगता है।
राही और प्रेम के बीच भविष्य को लेकर चर्चा
घटनाक्रम की शुरुआत राही और प्रेम के खूबसूरत पलों से होती है। राही जब प्रेम से पूछती है कि वह उसे इस कदर क्यों निहार रहा है, तो प्रेम उसकी तुलना चांद से करते हुए तारीफों के पुल बांध देता है। हालांकि राही उसे ज्यादा तारीफ करने से रोकती है, जिसके बाद दोनों गरबा के पारंपरिक परिधान चुनने लगते हैं। इस दौरान राही बहुत संजीदगी से बात रखते हुए कहती है कि आने वाले बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ उन्हें अपने व्यक्तिगत सपनों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वह जोर देती है कि दोनों को जीवन के हर मोड़ पर एक-दूसरे का सहारा बनना होगा। प्रेम उसे पूरी तरह आश्वस्त करता है कि उसने बच्चे के आने के बाद की हर योजना पहले ही सोच रखी है, और वह मन ही मन यह सोचकर खुश होता है कि गर्भावस्था के दौरान राही कितनी प्यारी दिखेगी।
रत्ना और पारुल का आगमन और अनुपमा का आशीर्वाद
इसी बीच अनुपमा के घर पारुल और रत्ना का आगमन होता है। रत्ना के नवजात शिशु को देखकर अनुपमा की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। रत्ना बताती है कि प्रसव के समय और उससे पहले राही ने उसका बहुत अच्छे से मार्गदर्शन किया और पूरी हिम्मत बंधाई। यह सुनकर अनुपमा गर्व से भर जाती है और राही की जमकर सराहना करती है। अनुपमा राही को भावुक होकर आशीर्वाद देती है कि अगली नवरात्रि आने तक वह खुद भी मां बन चुकी होगी। रत्ना इसके बाद राही को अपने घर आने का न्योता देती है।
शाह निवास में गरबा की तैयारी और आरवी की एंट्री से बढ़ी तनातनी
उधर शाह परिवार के घर पर गरबा को लेकर चहल-पहल जारी रहती है। लीला और वसुंधरा के बीच माही के व्यवहार को लेकर चर्चा चल रही होती है। तभी माही सामने आकर लीला से सीधा सवाल करती है कि क्या उसे इस बात का डर सता रहा है कि वह आरवी के साथ गरबा में डांडिया या डांस करेगी। लीला जब इस बात को स्वीकार करती है, तो माही दो टूक कहती है कि लीला का यह डर बिल्कुल सच साबित होने वाला है। जब पूरा शाह परिवार पूजा-आरती में लीन होता है, तभी आरवी अचानक वहां पहुंचकर सबको चौंका देता है। माही को आरवी के साथ देखकर पाखी बुरी तरह नाराज और असहज हो जाती है।
पूजा का माहौल और अनुपमा की चिंता
पूजा के दौरान इशानी और बांकू एक साथ मिलकर आरती संपन्न करते हैं और बाद में एक-दूसरे के साथ शांति से वक्त गुजारते हैं। वहीं पारिकित और किंजल के बीच भी जरूरी बातचीत होती है। दूसरी ओर प्रेम पाखी के पास जाकर उसे तनाव न लेने की सलाह देता है और कहता है कि उसे आज की शाम गरबा और डांस का आनंद लेना चाहिए तथा हर छोटी-बड़ी बात को दिल से लगाकर ज्यादा नहीं सोचना चाहिए। इधर अनुपमा माहौल को भांपते हुए दिग्विजय से बात करती है। वह दिग्विजय को सुझाव देती है कि वह आरवी को समझाए ताकि वह माही को नजरअंदाज करे और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। दिग्विजय अनुपमा की इस बात पर पूरी सहमति जताता है।
मथेला का जानलेवा हमला और मची अफरातफरी
उत्सव का यह रंग बहुत जल्द दहशत में बदल जाता है जब आने वाले दृश्यों में अनुपमा पर जानलेवा हमला होता है। अनुपमा को अचानक मथेला दिखाई देता है और वह किसी अनहोनी को टालने के लिए प्रेम के साथ मिलकर मथेला का पीछा करने लगती है। खुद को घिरता देख मथेला उन दोनों की तरफ सीधे गोली चला देता है। अनुपमा बाल-बाल बचती है, लेकिन गोलियों की तड़तड़ाहट से शाह परिवार के तमाम लोग सन्न रह जाते हैं। अचानक हुए इस खूनी हमले के बाद अब यह बड़ा सवाल बन गया है कि क्या अनुपमा और प्रेम मथेला को पकड़ पाने में कामयाब होंगे या इस अफरातफरी में किसी और की जान को भारी जोखिम उठाना पड़ेगा।



















