लोकप्रिय धारावाहिक अनुपमा के हालिया घटनाक्रम में दर्शकों को जबरदस्त टकराव और तीखा ड्रामा देखने को मिला। गौतम ने अनुपमा को आर्थिक रूप से तबाह करने की नीयत से एक बेहद शातिर साजिश तैयार की थी। इस पूरे षड्यंत्र का मकसद एक नकली फाइनेंस कंपनी की आड़ में अनुपमा को कर्ज के जाल में उलझाना था। हालांकि, अनुपमा की सतर्कता और सूझबूझ ने इस धोखाधड़ी की हवा निकाल दी और जालसाज बेनकाब हो गए। आने वाले एपिसोड की एक झलक में यह भी दिखाया गया कि जब अनुपमा भगवान गणेश की प्रतिमा गढ़ रही होती है, तभी कुछ युवक उत्सव के नाम पर 51,000 रुपये के भारी चंदे की मांग लेकर आ धमकते हैं।
उस दौरान हसमुख उन युवकों को 1,100 रुपये देने की पेशकश करते हैं, मगर वे युवक अपनी जिद पर अड़े रहते हुए कम से कम 21,000 रुपये वसूलने की बात कहते हैं। इस पर अनुपमा सीधे आगे आती है और चंदा मांगने वालों को एक खुला चैलेंज दे देती है। अनुपमा दो टूक शर्त रखती है कि यदि वे उसके पूछे गए 3 सरल सवालों का सही उत्तर दे देंगे, तो वह उन्हें बिना किसी हिचकिचाहट के पूरे 21,000 रुपये सौंप देगी।
लीला की नसीहत और कर्ज के दस्तावेजों में छिपे धोखे की कलई खुली
कहानी के शुरुआती घटनाक्रम में लीला अनुपमा को अपने अलग घर का ख्वाब त्यागने और शाह निवास में ही टिके रहने का मशविरा देती है। इसके उलट अनुपमा अपने खुद के मकान के संकल्प पर पूरी मजबूती से कायम रहती है। इसी दौरान राय ब्रदर्स अनुपमा को केवल एक ही दिन में कर्ज स्वीकृत कराने का लुभावना झांसा देकर जरूरी दस्तावेजों पर दस्तखत करने का दबाव बनाते हैं। दरअसल, इस पूरे प्रपंच के पीछे गौतम का शातिर दिमाग काम कर रहा था, जो अनुपमा को फर्जी कागजी दांवपेच में जकड़ना चाहता था।
जब अनुपमा उन दस्तावेजों को एक-एक कर गहराई से परखती है, तो उसकी नजर उन गुप्त और संदिग्ध शर्तों पर पड़ जाती है जो जानबूझकर छिपाई गई थीं। फर्जीवाड़े की सच्चाई सामने आते ही अनुपमा का आक्रोश चरम पर पहुंच जाता है। वह मौके पर मौजूद अधिकारियों को सीधे आड़े हाथों लेती है और पुलिस बुलाने का अल्टीमेटम दे डालती है। कानूनी कार्रवाई के खौफ से वे फर्जी अधिकारी घुटनों पर आ जाते हैं और हाथ जोड़कर क्षमा मांगने लगते हैं। इसके बाद अनुपमा उन्हें महिलाओं की बौद्धिक क्षमता और सतर्कता पर कड़ा सबक सिखाती है।
पारिवारिक कलह, नए व्यवसाय का विरोध और अनुज की स्मृतियां
दूसरी तरफ घर के भीतर परी और ईशानी के नए व्यवसाय तथा स्टूडियो के शुभारंभ को लेकर एक बड़ा विवाद छिड़ जाता है। वसुंधरा परी की गर्भावस्था का हवाला देते हुए उसे आराम करने की हिदायत देती है और साथ ही अनुपमा पर व्यंग्य कसती है। परिवार के अन्य सदस्य पाखी और पारितोष भी बिना पूर्व सूचना दिए नया काम शुरू करने पर ईशानी के ऊपर बुरी तरह बरस पड़ते हैं। वे तंज कसते हुए अनुपमा को बड़प्पन का वायरस करार देते हैं। इन तमाम विरोधों के बीच अनुपमा और किंजल डटकर ईशानी के पक्ष में खड़ी होती हैं और उसका हौसला बढ़ाती हैं।
दिन भर के इस भारी तनाव और पारिवारिक ड्रामे के शांत होने पर अनुपमा एकांत में बैठकर पूरी आस्था के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा का निर्माण करने लगती है। मिट्टी को आकार देते हुए वह अनुज की स्मृतियों में खो जाती है और जीवन के हर मोड़ पर उसका संबल बने रहने के लिए उसका आभार व्यक्त करती है।



















