टेलीविजन धारावाहिक अनुपमा के आगामी घटनाक्रम में दर्शकों को भारी भावनात्मक उथल-पुथल देखने को मिलने वाली है। अस्पताल के तनावपूर्ण माहौल में अनुपमा अपने बेटे प्रेम की नाजुक स्थिति को लेकर गहरी चिंता में डूबी हुई है, वहीं दूसरी ओर राही भी खुद को संभालने और पूरे परिवार को ढांढस बंधाने का भरसक प्रयास कर रही है। कहानी में उस वक्त एक महत्वपूर्ण मोड़ आता है जब आरवी समय पर आगे आकर प्रेम की जिंदगी बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। प्रेम की जान बच जाने के बाद अब आरवी का अगला कदम गौतम को उसकी साजिशों का कड़ा सबक सिखाना है, जिससे आने वाले दिनों में दोनों के बीच का टकराव और गहराने वाला है।
घर और बाहर एक साथ कई संकटों से जूझ रहे अनुपमा के परिवार के सामने नई परेशानियां लगातार दस्तक दे रही हैं। इन तेजी से बदलते समीकरणों ने कहानी में आगे आने वाले नए मोड़ों को लेकर उत्सुकता को काफी बढ़ा दिया है।
राही का छलका दर्द और प्रेम के लिए अनुपमा का कठोर संकल्प
आने वाले प्रसंग की शुरुआत राही और अनुपमा के बीच बेहद भावुक संवाद के साथ होती है। प्रेम की गंभीर हालत देखकर टूटी हुई राही अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहती है कि प्रेम के बिना उसका संसार पूरी तरह बिखर चुका है। वह बेहद हताश होकर अनुपमा से कहती है कि प्रेम के बिना उसके जीवन का कोई अर्थ नहीं रह जाता और वह अनुपमा से प्रेम की जिंदगी के लिए ईश्वर से विशेष प्रार्थना करने का आग्रह करती है। अनुपमा एक मां के रूप में खुद को मजबूत रखते हुए राही को दिलासा देती है और ईश्वर के न्याय पर पूरा विश्वास बनाए रखने की सलाह देती है।
इसी बातचीत के दौरान अनुपमा को यह जानकारी मिलती है कि आरवी ने आपात स्थिति में आगे आकर प्रेम के लिए अपना खून दान किया है। यह जानकर अनुपमा भावुक हो जाती है और हाथ जोड़कर आरवी का आभार प्रकट करती है। आरवी पूरी शालीनता से जवाब देता है कि उसे बार-बार धन्यवाद कहने की कोई आवश्यकता नहीं है, साथ ही वह राही को भी यह भरोसा दिलाता है कि वह उसके साथ किसी भी प्रकार का विवाद या बैर नहीं रखना चाहता। अनुपमा प्रेम के दर्द को याद कर आंसुओं में डूब जाती है और राही भी उसे संभालते हुए आवाज देती है। थोड़ी देर में इशानी आकर यह खुशखबरी देती है कि आरवी ने संदेश भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि प्रेम अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। यह सुनते ही अनुपमा चैन की सांस लेती है। हसमुख अनुपमा को शांत होकर कुछ भोजन करने और आराम करने के लिए समझाते हैं, परंतु अनुपमा यह दृढ़ फैसला लेती है कि जब तक प्रेम पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो जाता, तब तक वह अन्न का त्याग कर व्रत रखेगी और लगातार ईश्वर से उसकी लंबी उम्र की प्रार्थना करती रहेगी।
आरवी और गौतम का तीखा टकराव
अस्पताल की गहमागहमी के बीच आरवी सीधे गौतम से मिलने पहुंचता है और उसके चेहरे से नकाब उतारने की कोशिश करता है। आरवी गौतम से कड़े लहजे में सीधा सवाल पूछता है कि उसने मथिला के सामने यह झूठा दावा क्यों किया कि शाही परिवार ने प्रेम का अपहरण कराया था। आरवी साफ शब्दों में गौतम को अंतिम चेतावनी देता है कि वह उसके परिवार के किसी भी सदस्य को तंग करने अथवा परेशान करने की कोशिश न करे। इसके साथ ही वह गौतम को तुरंत मथिला को वापस घर सुरक्षित लौटाने का निर्देश देता है।
गौतम इस चेतावनी से बेपरवाह होकर आरवी को मथिला की पत्नी और उसके चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के बारे में उल्लेख करते हुए सभी चीजों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने का सुझाव देता है। आरवी मन ही मन यह तय कर चुका है कि प्रेम के साथ घटित पूरे षड्यंत्र का हिसाब वह गौतम से चुकता करके रहेगा। इसी गहमागहमी के बीच गौतम की नजर माही के मोबाइल फोन पर पड़ती है, जिस पर आरवी का इनकमिंग कॉल दिख रहा होता है। माही के फोन पर आरवी का कॉल देखते ही गौतम का पारा चढ़ जाता है और वह भड़क उठता है। इसके बाद गौतम भी आरवी को बर्बाद करने और उससे अपना बदला लेने की योजना बनाने लगता है।
प्रेम को मिला नया जीवन, कानूनी शिकंजा और अनुपमा को नई शक्ति
उधर कानूनी मोर्चे पर भी तेजी से घटनाक्रम आगे बढ़ता है। दिव्यराज बिना किसी देरी के मथिला के विरुद्ध पुलिस थाने पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज करा देता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस इंस्पेक्टर अनुपमा की सहायता करने का निर्णय लेता है और मथिला को कानूनी रूप से घेरने के लिए उसके विरुद्ध सभी पुख्ता सबूत एकत्र करने में जुट जाता है। इसी दौरान जब अनुपमा घर पर शांति और सलामती के लिए हवन अनुष्ठान कर रही होती है, तब अचानक किंजल का स्वास्थ्य बिगड़ने की बात सामने आती है, जिससे परिवार में एक बार फिर चिंता की लहर दौड़ जाती है। दूसरी तरफ वसुंधरा और गौतम भी प्रेम की स्थिति और उसके ठीक होने की संभावनाओं को लेकर गहरे तनाव में दिखाई देते हैं।
आखिरकार सभी प्रार्थनाओं का असर होता है और प्रेम को होश आ जाता है। प्रेम की आंखें खुलते ही राही की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। होश में आते ही प्रेम सबसे पहले अनुपमा के संबंध में पूछता है, जिस पर राही उसे बताती है कि अनुपमा ने उसकी जान बचाने के लिए किस तरह दिन-रात एक कर दिया और ईश्वर से प्रार्थनाएं कीं। इसके बाद प्रेम आरवी से मिलने की इच्छा प्रकट करता है। आमने-सामने आने पर प्रेम सही वक्त पर रक्तदान कर उसकी जान बचाने के लिए आरवी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है। हसमुख भी अनुपमा के पास आकर यह तसल्ली देते हैं कि प्रेम अब पूरी तरह संकट से बाहर निकल चुका है।
आगे के घटनाक्रम के पूर्वावलोकन में दिखाया जाता है कि दुखों और संघर्षों से घिरी अनुपमा मंदिर में भगवान की प्रतिमा के समक्ष नतमस्तक होकर अपनी हिम्मत टूटने और हार मान लेने का संकेत देती है। ठीक उसी क्षण वातावरण में गूंजती देवी की दिव्य वाणी उसे भीतर से झकझोर देती है और नए सिरे से संघर्ष करने का अदम्य साहस प्रदान करती है। देवी का संदेश होता है कि जब भी कोई नारी अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करती है, तो संसार से बुराई का अंत निश्चित हो जाता है।



















