अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों ने डिजिटल एसेट बाजार के नियामक परिदृश्य को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। संसद के दोनों सदनों में जीत दर्ज करने के बाद हाउस डेमोक्रेट्स अगले कांग्रेस सत्र में एक व्यापक क्रिप्टो मार्केट स्ट्रक्चर बिल पेश करने की विस्तृत योजना बना रहे हैं। इस नए विधायी प्रयास के केंद्र में प्रतिनिधि मैक्सिन वॉटर्स का क्रिप्टो इन्वेस्टर एंड कंज्यूमर बिल ऑफ राइट्स शामिल है, जिसके प्रावधानों को एक बार फिर मुख्यधारा के कानून में शामिल करने की कवायद चल रही है। नई संसद जनवरी 2027 में औपचारिक रूप से कामकाज संभालेगी, जिससे नीति निर्माण की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
कानून के मसौदे में SEC की भूमिका और सख्त एथिक्स पाबंदियां
डेमोक्रेटिक पार्टी के नीतिगत मसौदे पर बातचीत कर रहे उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में उन उपायों को जोड़ने की योजना है जो पहले प्रतिनिधि सभा में पारित नहीं हो सके थे। इसमें वे बिंदु भी शामिल हैं जिन पर सीनेट डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन सदस्यों के साथ विचार-विमर्श किया था। इस नए मसौदे का सबसे अहम हिस्सा अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग यानी SEC को डिजिटल एसेट बाजार की निगरानी के लिए व्यापक और कड़े अधिकार सौंपना है।
इसके विपरीत, कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन यानी CFTC के अधिकार क्षेत्र को सीमित रखने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके साथ ही, बिल में सरकारी अधिकारियों के लिए बेहद कड़े एथिक्स नियम लाने का प्रस्ताव है। इन प्रावधानों का सीधा मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य शीर्ष संघीय अधिकारियों को क्रिप्टो से जुड़े वाणिज्यिक या व्यावसायिक उपक्रमों में व्यक्तिगत भागीदारी से रोकना है, ताकि किसी भी तरह के हितों के टकराव को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
रिपब्लिकन खेमे की प्रतिक्रिया और राजनीतिक समीकरण
रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने डेमोक्रेट्स के इस आगामी कदम को एक मैसेजिंग बिल करार दिया है। उनका तर्क है कि यह मसौदा किसी द्विदलीय सहमति या तत्काल समझौते के इरादे से नहीं, बल्कि केवल डेमोक्रेटिक पार्टी की वैचारिक प्राथमिकताओं को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करने के लिए लाया जा रहा है। 3 नवंबर को संपन्न हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस दोनों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। जब जनवरी 2027 में नई कांग्रेस की बैठक शुरू होगी, तब विधायी प्राथमिकताओं का झुकाव निवेशक सुरक्षा और सख्त अनुपालन की ओर मुड़ना तय माना जा रहा है।
इससे पहले के विधायी इतिहास को देखें तो रिपब्लिकन सदस्यों ने क्रिप्टो अनुकूल नीतियों को आगे बढ़ाने में प्राथमिक भूमिका निभाई थी। रिपब्लिकन सीनेटर बिल हैगर्टी द्वारा पेश किया गया जीनियस एक्ट (GENIUS Act), जो भुगतान से जुड़े स्टेबलकॉइन्स के लिए एक युगांतरकारी संघीय ढांचा तैयार करता है, 18 जुलाई को कानून के रूप में हस्ताक्षरित हुआ था।
क्लैरिटी एक्ट का गतिरोध और पुराने मतभेद
प्रतिनिधि फ्रेंच हिल द्वारा प्रायोजित क्लैरिटी एक्ट (CLARITY Act) को भी रिपब्लिकन सांसदों ने ही आगे बढ़ाया था। यह विधेयक जुलाई 2025 में प्रतिनिधि सभा द्वारा तब पारित किया गया था, जब सभी 216 रिपब्लिकन सदस्यों और 78 डेमोक्रेट्स ने इसके पक्ष में मतदान किया था। क्लैरिटी एक्ट का मूल उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि विभिन्न डिजिटल संपत्तियों को किस प्रकार वर्गीकृत किया जाए और उनकी निगरानी SEC तथा CFTC के बीच कैसे बांटी जाए।
प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बावजूद यह विधेयक सीनेट में महीनों तक गंभीर वार्ताओं और असहमतियों में फंसा रहा। मुख्य विवाद नियामक शक्तियों के बंटवारे, डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस यानी DeFi, बैंकिंग क्षेत्र की चिंताओं और एथिक्स से जुड़े सुरक्षा उपायों को लेकर था। डेमोक्रेट्स ने स्पष्ट तर्क दिया था कि यह कानून ट्रंप और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से जुड़े हितों के संभावित टकराव को रोकने के लिए पर्याप्त कड़े कदम नहीं उठाता।
उसी दौरान पारंपरिक बैंकिंग संगठनों ने भी आगाह किया था कि अतिरिक्त प्रतिफल या रिवॉर्ड देने वाले क्रिप्टो उत्पाद पारंपरिक वित्तीय संस्थानों से जमा पूंजी को अपनी ओर खींच सकते हैं। इन चिंताओं के जवाब में रिपब्लिकन पक्ष ने सितंबर में एक संशोधित मसौदा जारी किया था, जिसमें डेमोक्रेट्स द्वारा सुझाए गए 126 ठोस नीतिगत संशोधनों को शामिल करने की बात कही गई थी। इन बदलावों में स्टेबलकॉइन डिपॉजिट से जुड़े वित्तीय जोखिम, ब्लॉकचेन डेवलपर्स के लिए कानूनी सुरक्षा और एथिक्स से जुड़े नए खंड शामिल थे, लेकिन इसके बावजूद सहमति नहीं बन सकी थी।
जनवरी 2027 की नई व्यवस्था और बाजार का मिजाज
जनवरी 2027 में दोनों सदनों की बागडोर संभालने के बाद डेमोक्रेट्स का रुख डिजिटल एसेट बाजार में सरकारी निगरानी तंत्र को मजबूत करने और व्यक्तिगत हितों पर लगाम कसने पर केंद्रित रहेगा। दूसरी ओर, राजनीतिक हलचलों के बीच क्रिप्टो बाजार में तेजी का माहौल देखा गया है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, बिटकॉइन की मौजूदा कीमत 80,402 डॉलर पर दर्ज की गई है, जो पिछले बंद स्तर 77,345 डॉलर के मुकाबले 3.95 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 57,748 डॉलर से 87,364 डॉलर के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम इसके 20 दिनों के औसत से 1.48 गुना अधिक दर्ज हुआ है।
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो बिटकॉइन का 14 दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 51 पर तटस्थ बना हुआ है। मूविंग एवरेजेज के मोर्चे पर 20 दिवसीय EMA 79,831 डॉलर, 50 दिवसीय EMA 80,063 डॉलर और 200 दिवसीय EMA 76,320 डॉलर पर स्थित है, जो दीर्घकालिक स्तर पर बुलिश गोल्डन क्रॉस की पुष्टि करता है। 20 दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 76,153 डॉलर से 84,254 डॉलर के बीच हैं। इसके लिए तात्कालिक पिवट स्तर 80,478 डॉलर है, जबकि पहला रेजिस्टेंस R1 80,718 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस R2 81,035 डॉलर पर आंका गया है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट S1 80,161 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 79,921 डॉलर पर मौजूद है।
बाजार के अन्य प्रमुख टोकनों में इथेरियम 2,300 डॉलर के पार कारोबार करता नजर आया, जबकि रिपल 1.28 डॉलर के ऊपर पहुंच गया। इसके विपरीत, पाई नेटवर्क डेरिवेटिव्स बाजार में खुदरा गतिविधियों में कमी और ओपन इंटरेस्ट घटकर 7.50 मिलियन डॉलर पर आ जाने के कारण दबाव में रहा और 0.0755 डॉलर के आसपास देखा गया। अमेरिकी नीतिगत बदलावों की यह पूरी प्रक्रिया आने वाले महीनों में वैश्विक डिजिटल एसेट बाजार की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगी।



















