त्योहारों की दस्तक के साथ ही बाजारों में मिष्ठान भंडारों पर रौनक बढ़ जाती है, जहां तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां सजी दिखाई देती हैं। इन सब में सोनपापड़ी सबसे लोकप्रिय और पहचानी जाने वाली मिठाई मानी जाती है। दीपोत्सव के पावन अवसर पर सोनपापड़ी की मांग सबसे ज्यादा देखी जाती है और लगभग हर घर में लोग इसे बेहद चाव से खाते हैं। हालांकि, त्योहारी दिनों में मिठास के साथ-साथ बाजार में मिलने वाले सामानों में मिलावट का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। नकली मावा, अशुद्ध घी और हानिकारक तत्वों से बनी ये मिठाइयां सेहत पर भारी पड़ सकती हैं और त्योहार के आनंद को किरकिरा कर सकती हैं।
यदि आप और आपका परिवार भी सोनपापड़ी के शौकीन हैं, तो बाजार के अशुद्ध विकल्पों पर निर्भर रहने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। अपनी रसोई में उपलब्ध बुनियादी चीजों की मदद से आप पूरी तरह शुद्ध और हलवाई जैसी परतदार सोनपापड़ी खुद बना सकते हैं। घर पर बनी मिठाई न केवल सेहत के लिहाज से सुरक्षित रहती है, बल्कि इसका स्वाद भी लाजवाब होता है। नीचे दी गई सरल विधि से आप बिना किसी झंझट के इसे बहुत कम समय में तैयार कर सकते हैं।
सोनपापड़ी तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री
इस पारंपरिक भारतीय मिष्ठान को बनाने के लिए किसी दुर्लभ सामान की आवश्यकता नहीं होती। रसोई के सामान्य डिब्बों से ही आप पूरी तैयारी कर सकते हैं
- घी, 1.5 चम्मच (भूनने के लिए प्रारंभिक मात्रा) तथा पकाने के लिए 1.5 कप
- बेसन, 1.5 कप
- हल्दी, रंगत निखारने के लिए हल्की मात्रा
- इलायची पाउडर, स्वाद और भीनी सुगंध के लिए
- चीनी, 1.5 कप
- पानी, आधा कप
- नींबू का रस, 1 चम्मच
- बारीक कटे हुए ड्राई फ्रूट्स, सजावट और गार्निशिंग के लिए
बेसन को भूनने और मिश्रण तैयार करने का चरण
मिठाई बनाने की शुरुआत बेसन की सिकाई से होती है। सबसे पहले गैस पर एक कड़ाही या पैन चढ़ाएं और उसे हल्का गर्म होने दें। इसके बाद पैन में 1.5 कप घी डालें। जब घी पिघलकर अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब इसमें नापकर रखा हुआ 1.5 कप बेसन मिला दें। आंच को मध्यम रखते हुए बेसन को लगातार चलाते रहें ताकि उसमें गांठें न पड़ें और वह तले से न चिपके।
बेसन को तब तक भूनना है जब तक कि उसमें से सोंधी महक न आने लगे। इसके बाद बेहतरीन फ्लेवर के लिए मिश्रण में पिसी हुई इलायची का पाउडर मिलाएं। सोनपापड़ी को पारंपरिक पीली रंगत देने के लिए इसमें चुटकी भर हल्दी डालकर अच्छी तरह मिक्स करें। जब बेसन का यह मिश्रण पूरी तरह भुन जाए और घी छोड़ने लगे, तो गैस बंद कर दें और पैन को एक तरफ ठंडा होने के लिए रख दें।
चाशनी पकाने और कैरामलाइज करने का तरीका
सोनपापड़ी की असली बनावट उसकी चाशनी पर निर्भर करती है। इसके लिए एक दूसरा पैन लें और उसमें 1.5 कप चीनी डालें। चीनी के साथ आधा कप पानी मिलाएं और धीमी आंच पर पकने के लिए रख दें। इसे लगातार चलाते हुए एक तार की चाशनी तैयार करें। जब चाशनी गाढ़ी होने लगे और कैरामलाइज होने लगे, तब इसमें 1 चम्मच ताजा नींबू का रस मिला दें। नींबू का रस चाशनी में क्रिस्टल बनने से रोकता है और उसे सही खिंचाव देता है।
अब एक चौड़ी प्लेट या थाली लें और उसकी सतह पर अच्छी तरह घी लगाकर उसे चिकना (ग्रीस) कर लें। तैयार चाशनी को तुरंत इस ग्रीस की हुई प्लेट में पलट दें। चाशनी को किनारों से समेटते हुए ठंडा होने दें और स्पैचुला की मदद से उसे एक जगह इकट्ठा करना शुरू करें। जब चाशनी खिंचने लायक गाढ़ी और बंधी हुई अवस्था में आने लगे, तब इसे तुरंत पहले से भूनकर रखे गए बेसन के मिश्रण में पलट दें।
परतें बनाना और सर्विंग के लिए सेट करना
चाशनी को बेसन के साथ तुरंत और फुर्ती से मिलाना शुरू करें। दोनों को इस तरह अच्छी तरह मिक्स करें ताकि भुना हुआ सारा बेसन उस गाढ़ी चाशनी के ऊपर पूरी तरह लिपट जाए और चिपक जाए। इस प्रक्रिया से मिठाई में पारंपरिक लच्छेदार बनावट उभर कर आती है।
मिश्रण अच्छी तरह एकसार हो जाने के बाद, उससे छोटी-छोटी लोई या पेड़े तोड़ लें। अब एक छोटी कटोरी लें और उसके तले में थोड़े से बारीक कटे हुए मेवे (ड्राई फ्रूट्स) डाल दें। इसके ऊपर तैयार लोई को रखें और उंगलियों से दबाकर कटोरी के आकार में अच्छी तरह सेट कर लें। अंत में इसे हल्के हाथों से पलटकर प्लेट में निकालें। आपकी ताजी, शुद्ध और स्वादिष्ट होममेड सोनपापड़ी पूरी तरह तैयार है, जिसे आप पूरे परिवार और मेहमानों के साथ परोस सकते हैं।



















