छोटे परदे के चर्चित धारावाहिक अनुपमा के आने वाले एपिसोड्स में दर्शकों को बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरे ट्रैक देखने को मिलेंगे। कहानी में प्रांशी के आने के बाद से राही और प्रेम की निजी जिंदगी में तनाव काफी बढ़ गया है, जिसका असर उनके रिश्तों पर भी साफतौर पर दिखाई दे रहा है। शो के दौरान अनुपमा की भेंट एक ऐसी साहसी महिला से होती है, जो मैथेला के खिलाफ छिड़ी इस कानूनी और सामाजिक जंग में उसका पूरी शिद्दत से साथ निभाने का पक्का इरादा करती है।
राही और प्रेम के बीच बढ़ती दूरियां
प्रांशी के वजूद और उससे जुड़ी यादों को लेकर राही का दिल बैठ जाता है और वह बुरी तरह भावुक होकर आंसू बहाने लगती है। ऐसे नाज़ुक मोड़ पर प्रेम आगे आकर प्यार से उसे ढांढस बंधाता है और हालात को संभालने की कोशिश करता है। प्रेम उसे सलाह देता है कि उन्हें तुरंत शाह हाउस चले जाना चाहिए, लेकिन राही इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर देती है। राही के मन में एक गहरा डर बैठा हुआ है कि अगर वे वहां गए, तो वसुंधरा एक बार फिर प्रांशी को उसकी आंचल से छीन सकती है। इस उधेड़बुन के बीच प्रेम उसे नकारात्मकता से दूर रहने की नसीहत देता है और दिलासा देता है कि ईश्वर की मर्जी हुई तो वे बहुत जल्द माता-पिता का सुख प्राप्त करेंगे।
दुर्गा माता की तरह अकेले लड़ने का संकल्प
कहानी में आगे बढ़ते हुए अनुपमा नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्र की आराधना और उसके महत्व पर प्रकाश डालती है। जिस नई महिला से उसकी मुलाकात हुई है, वह उसे पीछे न हटने और पूरी ताकत से मुकाबले में डटे रहने के लिए प्रेरित करती है। वह महिला अनुपमा को समझाती है कि उसे इस बड़ी लड़ाई को देवी दुर्गा की भांति अकेले ही लड़ना होगा। इन तमाम बातों से प्रेरणा पाकर अनुपमा भी अटल फैसला करती है कि वह इस बड़े फ्रॉड के खिलाफ अकेले ही मैदान में उतरेगी। इस कठिन दौर में दिग्विजय और किंजल भी अनुपमा का साथ देने के लिए आगे आते हैं और उसकी हिम्मत बढ़ाते हैं।
पारितोष की बात और घर का कलह
दूसरी तरफ घर के भीतर का माहौल भी तनावपूर्ण बना हुआ है, जहां अंश प्रांशी को जगाने का प्रयास करता है। यह सब देखकर इशानी अंश से सवाल करती है कि आखिर माजरा क्या है। अंश प्रेरणा के पास जाकर आग्रह करता है कि उन्हें तान्या के आवास पर दोपहर के भोजन के लिए चलना चाहिए, मगर प्रेरणा इस बात से साफ इंकार कर देती है। अंश जब ऊंची आवाज में बातचीत करता है, तो उसकी आवाज से प्रांशी नींद से जाग जाती है, जिससे नाराज होकर अंश प्रेरणा पर अपना गुस्सा उतारने लगता है। इस पूरी घटना के बीच प्रेरणा को पारितोष की कही वह पुरानी बात जेहन में आ जाती है कि एक बच्चा अक्सर पति-पत्नी के रिश्ते में दूरियां और बढ़ाने का काम करता है।
मोहनलाल मैथेला की गंदी नजर
आने वाले एपिसोड के प्रीकैप में एक ऐसा खतरनाक मोड़ दिखाया जाता है जो सभी को हैरान कर देता है। मोहनलाल मैथेला की बुरी और नीच नजर अब सीधे तौर पर इशानी पर पड़ती है, जिससे परिवार पर एक और मुसीबत मंडराने लगती है। अपनी बेटी इशानी को इस नए खतरे से महफूज रखने के लिए अनुपमा खुद एक चट्टान की भांति मोहनलाल के सामने सीना तानकर डट जाती है। इसके जवाब में मोहनलाल तंज कसते हुए अनुपमा को आराम से बैठने की हिदायत देता है, जिससे अनुपमा हक्की-बक्की रह जाती है। अब आने वाले वक्त में यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि अनुपमा इस नए और खतरनाक खतरे से अकेले दम पर कैसे पार पाती है।



















