भारतीय रसोई में गरम मसाले का इस्तेमाल किसी भी साधारण दाल या सब्जी के स्वाद को आसमान पर पहुँचाने के लिए किया जाता है। हालाँकि बाजार में यह पैकेटबंद रूप में आसानी से मिल जाता है, लेकिन घर की तैयार की गई खुशबू और शुद्धता की बात ही कुछ और होती है। घर पर सामग्री खुद चुनने की आज़ादी मिलती है, जिससे आप अपनी पसंद के हिसाब से तीखापन या खूशबू का स्तर तय कर सकते हैं। इस विधि को अपनाकर आप आसानी से बढ़िया मसाला बना सकते हैं।
आवश्यक सामग्री और सही मात्रा
इस खुशबूदार मिश्रण को तैयार करने के लिए धनिया, जीरा, काली मिर्च, लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता, सौंफ और जावित्री की जरूरत होती है। साथ ही इसमें 1 छोटा चम्मच जायफल पाउडर या फिर आधा जायफल मिलाया जाता है। मसालों का यह संतुलन ही भोजन को एक अलग ही महक और जायका प्रदान करता है।
मसालों की सफाई और भूनने की प्रक्रिया
सबसे पहले सभी साबुत मसालों को ध्यान से बीनकर साफ कर लें ताकि उनमें किसी भी तरह की धूल या कंकड़ न रहे। अब एक भारी तले वाली कढ़ाई को धीमी आँच पर रखें। इसके बाद धनिया, जीरा, काली मिर्च, लौंग, इलायची, दालचीनी, तेजपत्ता, सौंफ और जावित्री को कड़ाही में डालकर लगभग 3 से 5 मिनट तक भूनें। भूनते समय करछी को लगातार चलाते रहना बेहद जरूरी है ताकि मसाले नीचे से जल न जाएँ।
पीसने और स्टोर करने का सही तरीका
जब मसालों से सोंधी और बेहतरीन खुशबू आने लगे, तब गैस के चूल्हे को बंद कर दें। इसके बाद मसालों को पूरी तरह से ठंडा होने के लिए छोड़ दें, क्योंकि गरम अवस्था में पीसने से उनमें नमी पैदा हो सकती है। अब इन ठंडे मसालों में जायफल को मिलाएं और एक मिक्सी या मसाला ग्राइंडर की सहायता से एकदम बारीक पीस लें। अंत में इस तैयार चूर्ण को एक छन्नी से छान लें और नमी से बचाने के लिए किसी एयरटाइट काँच के जार में सुरक्षित रख दें। इस जार को हमेशा किसी सूखी और ठंडी जगह पर ही रखें।
इस्तेमाल करने के उपयोगी सुझाव
भोजन बनाते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि सब्जी या करी के पूरी तरह पक जाने के बाद ही ऊपर से गरम मसाला छिड़कें। इसका उपयोग हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, अन्यथा खाने का प्राकृतिक स्वाद बिगड़ सकता है। घर पर तैयार किया गया यह ताज़ा मसाला लगभग 3 से 6 महीने तक अपनी सौंधी खुशबू और ताज़गी को बरकरार रखता है।
घर में बने मसालों के फायदे
बाजार में मिलने वाले विकल्पों की तुलना में घर पर तैयार किया गया गरम मसाला पूरी तरह मिलावट-मुक्त होता है। इसमें कृत्रिम रंगों या घटिया चीज़ों का कोई खतरा नहीं रहता। अपनी पसंद के अनुसार घटकों का अनुपात तय कर पाना इसे और भी ज़्यादा फायदेमंद बनाता है।



















