टेलीविजन जगत के जाने-माने कलाकार देबीना बनर्जी और गुरमीत चौधरी अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं। लंबे समय तक अभिनय की दुनिया में सक्रिय रहने के बाद देबीना बनर्जी अब बतौर फिल्म निर्माता सामने आई हैं। वह आगामी रोमांटिक ड्रामा फिल्म तुम मेरे हो के जरिए प्रोडक्शन के मैदान में अपना पहला कदम रख रही हैं। इस पूरे सफर को लेकर देबीना बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि खुद की फिल्म तैयार करने की पूरी योजना उनके पति गुरमीत चौधरी की थी, और उन्होंने इस रचनात्मक फैसले में उनका पूरा सहयोग किया है।
देबगुरु फिल्म्स बैनर की स्थापना और पहली परियोजना
दोनों कलाकारों ने साझेदारी करते हुए अपने नए प्रोडक्शन हाउस की नींव रखी है, जिसे देबगुरु फिल्म्स नाम दिया गया है। इसी नए बैनर के अंतर्गत उनकी पहली रोमांटिक ड्रामा फिल्म तुम मेरे हो रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी है। अपनी इस नई पहल के पीछे के कारणों को साझा करते हुए देबीना बनर्जी ने बताया कि गुरमीत चौधरी अपने रचनात्मक विचारों और प्राथमिकताओं के अनुरूप काम करना चाहते थे। जब उन्हें बाहरी प्रोजेक्ट्स में अपनी पसंद के मुताबिक काम करने की पूरी स्वतंत्रता नहीं मिल पा रही थी, तब दोनों ने मिलकर अपनी फिल्में खुद बनाने का यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया।
एक्शन की भरमार के बीच रोमांटिक कहानी की तलाश
गुरमीत चौधरी के मन में अपने स्तर पर फिल्म बनाने का विचार काफी लंबे समय से घूम रहा था। देबीना बनर्जी के अनुसार गुरमीत इस बात को लेकर बेहद बेचैन थे क्योंकि उनके जेहन में बिल्कुल साफ था कि उन्हें किस तरह की प्रेम कहानी पर काम करना है। गुरमीत चौधरी एक बेहतरीन रोमांटिक हीरो की क्षमता रखते हैं, लेकिन ओटीटी और अन्य मंचों से उन्हें जो भी काम ऑफर हो रहा था, उनमें ज्यादातर सिर्फ एक्शन को ही प्रमुखता दी जा रही थी। गुरमीत को एक्शन जॉनर पसंद तो है, लेकिन उनके अभिनय का एक बेहद संवेदनशील और खूबसूरत रोमांटिक पहलू भी है। जब उन्हें अपने मनपसंद मिजाज की कोई स्क्रिप्ट बाहर से नहीं मिल सकी, तब उन्होंने खुद आगे आकर फिल्म बनाने की हिम्मत जुटाई।
अभिनय और निर्माण की जिम्मेदारियों में गहरा अंतर
एक कलाकार और एक निर्माता के दायित्वों के बीच मौजूद बुनियादी फर्क पर बात करते हुए देबीना बनर्जी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विस्तार से बताया कि एक अभिनेता के तौर पर आपका काम केवल अपने किरदार और अपने अभिनय प्रदर्शन तक ही सीमित रहता है, जहां शॉट पूरा होते ही आपकी जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। इसके ठीक उलट, एक निर्माता के रूप में आपको फिल्म के सेट पर होने वाली हर छोटी और बड़ी व्यवस्था की सीधी निगरानी करनी पड़ती है। इसमें कहानी की पटकथा से लेकर निर्माण का पूरा बजट, शूटिंग के लिए तय की जाने वाली लोकेशंस, मुख्य कलाकारों की तारीखों का तालमेल और उनके कॉस्ट्यूम तक हर बात पर बारीक नजर रखनी होती है। शूटिंग के दौरान सेट पर जब भी कोई व्यवधान या समस्या खड़ी होती है, तो उसे सुलझाने के लिए निर्माता को ही सबसे आगे आना पड़ता है।


















