टेलीविजन धारावाहिकों की शूटिंग के दौरान अक्सर सेट के अंदर के कई किस्से सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला टीवी अभिनेत्री आम्रपाली गुप्ता के बयानों से सामने आया है। आम्रपाली गुप्ता ने अपने पूर्व सह-कलाकार धीरज धूपर की काम करने की शैली और उनके रवैये को लेकर खुलकर बात की है। अभिनेत्री का कहना है कि शूटिंग के दौरान धीरज धूपर के देर से पहुंचने और उनकी अपनी तय शर्तों के कारण सेट पर मौजूद बाकी कलाकारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उनके मुताबिक धीरज धूपर को अपने साथ काम करने वाले अन्य कलाकारों के कीमती समय की कोई परवाह नहीं थी, जिससे पूरी शूटिंग की समय-सारणी प्रभावित होती थी।
लेट आने की वजह और अनजाने कॉन्ट्रैक्ट का असर
आम्रपाली गुप्ता के अनुसार धीरज धूपर ने धारावाहिक के निर्माण घराने यानी प्रोडक्शन हाउस के साथ एक विशेष समझौता किया हुआ था। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत उन्हें सुबह 11 बजे से लेकर रात 9 बजे तक ही सेट पर काम करना होता था। हालांकि इस खास समझौते के बारे में सेट पर काम कर रहे अन्य अभिनेताओं को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इसी कारण धीरज धूपर कभी भी सुबह 11 बजे से पहले शूटिंग स्थल पर नहीं पहुंचते थे। बाकी कलाकार अपने तय समय पर पहुंच जाते थे और उन्हें धीरज का इंतजार करना पड़ता था।
मेकअप और स्क्रिप्ट रीडिंग में बीतता समय
सेट पर 11 बजे पहुंचने के बाद भी तुरंत शूटिंग शुरू नहीं हो पाती थी। आम्रपाली गुप्ता ने बताया कि सेट पर आने के बाद धीरज धूपर को तैयार होने और अपना मेकअप कराने में करीब एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता था। चूंकि टेलीविजन धारावाहिकों में संवाद काफी लंबे होते हैं, इसलिए सभी कलाकारों को एक साथ बैठकर दृश्यों की पढ़ाई यानी स्क्रिप्ट रीडिंग करनी पड़ती थी। इस रीडिंग प्रक्रिया में भी लगभग आधा घंटा बीत जाता था।
इस पूरी तैयारी में दोपहर के 1:00 या 1:30 बज जाते थे। वहीं नियम के अनुसार दोपहर 2:00 बजे सभी के लिए लंच ब्रेक तय था। ऐसे में लंच से पहले मुश्किल से आधा घंटा ही बचता था। इतने कम समय में जब तक कैमरा सेट किया जाता और कलाकारों की ब्लॉकिंग समझाई जाती, तब तक लंच का समय हो जाता था। इसके चलते दोपहर के पहले सत्र में नाममात्र की ही शूटिंग हो पाती थी।
लंच के बाद 1 घंटे की नींद और अफरातफरी में शूटिंग
दोपहर के भोजन के बाद भी परिस्थितियां सामान्य नहीं होती थीं। आम्रपाली गुप्ता ने खुलासा किया कि लंच खत्म होने के बाद धीरज धूपर रोजाना लगभग एक घंटे के लिए सोने चले जाते थे। जब तक वह विश्राम करते थे, तब तक क्रू सदस्य अन्य सह-कलाकारों के क्लोजअप दृश्य शूट करते रहते थे।
जब धीरज धूपर अपनी नींद पूरी करके उठते थे, तो उनके दृश्यों को बेहद जल्दबाजी में रिकॉर्ड किया जाता था। चूंकि रात 9 बजे उनका काम खत्म करने का समय तय था और उन्हें सेट से निकलना होता था, इसलिए पूरे काम को अफरातफरी में निपटाना पड़ता था। इस व्यवस्था का सीधा असर अन्य कलाकारों के काम और उनके निजी शेड्यूल पर पड़ता था।
कलाकारों के समय का सम्मान और छोटे-बड़े का फर्क
इस पूरे अनुभव पर अपनी राय रखते हुए आम्रपाली गुप्ता ने कहा कि किसी भी शो में काम करने वाला हर व्यक्ति एक कलाकार ही होता है। चाहे कोई बड़ा अभिनेता हो या छोटा, सभी के समय की कीमत बराबर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े और छोटे कलाकार में अंतर केवल इतना होता है कि बड़े कलाकार को अधिक धन और प्रसिद्धि मिलती है, जबकि छोटे कलाकार को कम पारिश्रमिक मिलता है। लेकिन काम के स्तर पर सभी को समान सम्मान मिलना चाहिए।
गौरतलब है कि आम्रपाली गुप्ता और धीरज धूपर ने प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक 'रब से दुआ' में एक साथ अभिनय किया था। इस शो को दर्शकों की ओर से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। इस धारावाहिक की सफलता के बाद ही धीरज धूपर को रियलिटी शो 'लॉक अप 2' में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ था।



















