क्रिकेट की पिच पर विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए मशहूर वीरेंद्र सहवाग अब छोटे पर्दे पर एक रियलिटी शो का संचालन करते नजर आएंगे। नए रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल' की मेजबानी को लेकर उन्होंने अपनी रणनीति और शुरुआती हिचकिचाहट के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैमरे के सामने वे किसी तय पटकथा पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि परिस्थितियों और प्रतियोगियों के व्यवहार के आधार पर स्वाभाविक प्रतिक्रिया देंगे।
शुरुआती झिझक और निर्माताओं से मुलाकात
सहवाग ने खुलासा किया कि जब निर्माताओं ने पहली बार उनके सामने शो की मेजबानी का प्रस्ताव रखा था, तब उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया था। उस वक्त उनके मन में संशय था कि वे एक रियलिटी शो के मंच को सही ढंग से संभाल पाएंगे या नहीं। निर्माताओं के साथ हुई दूसरी बैठक के दौरान स्थिति पूरी तरह बदल गई। मेकर्स ने उन्हें शो से जुड़े कुछ अंश दिखाए और समझाया कि उन्हें किसी अन्य प्रस्तोता की शैली अपनाने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल उसी स्वाभाविक व्यक्तित्व को बनाए रखना है, जिसके साथ वे क्रिकेट मैदान पर पेश आते थे।
निर्माताओं की इसी सलाह ने सहवाग का भरोसा जीता। प्रोडक्शन टीम की तरफ से रिकॉर्डिंग के दौरान हर संभव तकनीकी और रचनात्मक सहयोग का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने इस शो की कमान संभालने की स्वीकृति दे दी।
शो का आधार और क्रिकेट के अनुभव का मेल
सहवाग के अनुसार, इस कार्यक्रम की अमीर और गरीब के विभाजन पर आधारित अवधारणा उन्हें काफी दिलचस्प लगी। उन्होंने बताया कि खेल कमेंट्री करते वक्त भी वे विभिन्न टीमों की क्षमताओं और खिलाड़ियों के स्तर के अंतर का अक्सर विश्लेषण करते रहे हैं। उनका मानना है कि खेल और मनोरंजन भले ही दो अलग माध्यम हों, लेकिन इंसानी स्वभाव को परखने की कला हर जगह समान रूप से उपयोगी सिद्ध होती है। अपने मूल अंदाज में शो की मेजबानी करने से दर्शकों को स्क्रीन पर एक अनूठा अनुभव देखने को मिलेगा।
मानव स्वभाव और बीस साल के खेल का सबक
अपने लगभग 20 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर का हवाला देते हुए सहवाग ने कहा कि इस सफर में उनका पाला हर तरह के मिजाज वाले व्यक्तियों से पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हमेशा आक्रामक रवैया ही नहीं अपनाते थे। टेस्ट क्रिकेट में कई मौकों पर टीम को संकट से उबारने के लिए रक्षात्मक खेल दिखाना पड़ता था, जबकि सीमित ओवरों के मैचों में भी परिस्थिति देखकर पारी की गति धीमी करनी पड़ती थी।
उनका मानना है कि जिंदगी की हकीकत भी बिल्कुल ऐसी ही है। हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है। कोई बेहद शांत रहता है, किसी को बहुत जल्द गुस्सा आ जाता है, कोई प्यार से बात संभालता है तो कोई मामूली बात पर भी उत्तेजित हो जाता है। ऐसे में सामने वाले के मनोविज्ञान को समझना और उसी के अनुसार बर्ताव करना सबसे अहम कौशल है।
प्रतियोगियों के साथ पेश आने का तरीका
सहवाग ने 'राइज एंड फॉल' की पूरी प्रक्रिया को एक तरह का मनोवैज्ञानिक परीक्षण करार दिया। ड्रेसिंग रूम और टीम के भीतर विभिन्न खिलाड़ियों की सोच को समझने का जो अनुभव उन्हें मिला, उसका इस्तेमाल वे इस शो में शामिल प्रतियोगियों को परखने में करेंगे। वे प्रत्येक प्रतियोगी के हाव-भाव और गतिविधियों पर नजर रखेंगे ताकि यह तय किया जा सके कि किससे किस लहजे में बात करनी है।
वे शुरुआत में सभी को शालीनता और प्रेमपूर्वक समझाने का प्रयास करेंगे, लेकिन अगर किसी ने मर्यादा लांघी तो उसे डांटने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने दोहराया कि उनके पास कोई रटी-रटाई स्क्रिप्ट नहीं होगी, बल्कि वे हर स्थिति के अनुसार तुरंत निर्णय लेंगे।
अनुशासनहीनता पर सख्त रुख और निष्कासन का अधिकार
प्रतियोगियों के लिए शो के तय नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य रहेगा। उन्हें दिए गए कार्यों को जिम्मेदारी से पूरा करना होगा और आपस में अभद्र भाषा के प्रयोग या बेवजह के विवादों से दूर रहना होगा। सहवाग ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि नियम तोड़ने वालों को पहले एक या दो बार सुधरने का अवसर दिया जाएगा।
यदि किसी प्रतियोगी ने बार-बार समझाने के बावजूद अपनी आदतों में सुधार नहीं किया, तो मेजबान के तौर पर उन्हें सीधे शो से बाहर का रास्ता दिखाने का पूरा अधिकार उनके पास होगा। रियलिटी शोज की लगातार बढ़ती लोकप्रियता के सवाल पर सहवाग ने कहा कि इस विषय पर कार्यक्रम के निर्देशक, निर्माता और टीवी चैनल ज्यादा सटीक राय रख सकते हैं, क्योंकि उन्होंने खुद बहुत अधिक संख्या में रियलिटी शोज कभी नहीं देखे हैं।



















