शारीरिक वजन में अवांछित बढ़ोतरी आजकल एक व्यापक चुनौती बन चुकी है, जिससे निपटने के लिए लोग अक्सर जल्दबाजी में कई तरह के शॉर्टकट तलाशने लगते हैं। इसी चक्कर में कई लोग अवास्तविक लक्ष्य तय कर लेते हैं और महज सात दिनों के भीतर पांच किलो तक वजन गिराने की कोशिश में जुट जाते हैं। कुछ लोग इसके लिए अचानक घंटों तक पैदल चलना शुरू कर देते हैं, लेकिन इस तरह की तीव्र कवायद शरीर को फायदे की जगह गहरा नुकसान पहुंचा सकती है। फोर्टिस अस्पताल, मानेसर की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ दीक्षा सहवाग ने इस तरह के कड़े लक्ष्यों के जैविक प्रभाव और सुरक्षा पहलुओं पर महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए हैं।
तीव्र वजन घटाने के खतरे और कैलोरी का गणित
सात दिनों के भीतर पांच किलोग्राम वजन घटाने के लिए शरीर में अत्यधिक कैलोरी डेफिसिट बनाना पड़ता है, जिसे सामान्य खानपान और केवल पैदल चलने के सहारे एक हफ्ते में हासिल करना अधिकांश लोगों के लिए जैविक रूप से संभव नहीं है। यदि कोई अत्यधिक भोजन त्यागकर या अत्यधिक व्यायाम करके ऐसा करने का प्रयास भी करता है, तो उससे शरीर में गंभीर कमजोरी, डिहाइड्रेशन और मांसपेशियों में खिंचाव या कमजोरी जैसी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
शारीरिक गतिविधियों की दृष्टि से किसी भी स्वस्थ वयस्क के लिए प्रतिदिन लगभग 5 से 7 किलोमीटर चलना अथवा 7,000 से 10,000 कदम पूरा करना एक व्यावहारिक शुरुआती लक्ष्य जरूर माना जा सकता है। इसके बावजूद कैलोरी बर्न होने की वास्तविक दर व्यक्ति के शारीरिक वजन, चलने की गति, उम्र, फिटनेस के मौजूदा स्तर और स्वास्थ्य की समग्र स्थिति पर निर्भर करती है। इसी कारण वजन नियंत्रित करने की प्रक्रिया में केवल वॉक करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कैलोरी पर नियंत्रण, संतुलित भोजन, पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन, नियमित नींद और निरंतर शारीरिक सक्रियता का समन्वय अनिवार्य होता है।
स्थायी और सुरक्षित वेट लॉस का सही खाका
सेहत को नुकसान पहुंचाए बिना वजन घटाने का सुरक्षित पैमाना प्रति सप्ताह लगभग 0.5 से 1 किलोग्राम वजन कम करना है। पांच किलोग्राम वजन घटाने का लक्ष्य किसी एक सप्ताह के बजाय एक महीने या उससे अधिक हफ्तों में विभाजित किया जाना चाहिए, जो शरीर के आंतरिक अंगों और मेटाबॉलिज्म के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है। एक ही हफ्ते में जबरन इतना भार कम करने से समग्र स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पैदल चलने के साथ-साथ खानपान में जरूरी बदलाव करने की सख्त जरूरत होती है। इसके तहत रोजमर्रा के भोजन से चीनी, मीठे पेय पदार्थ, तले हुए व्यंजन और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड की मात्रा घटानी चाहिए। इसके स्थान पर ताजी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और भरपूर प्रोटीन को थाली में शामिल करना चाहिए।
डॉ दीक्षा सहवाग का स्पष्ट सुझाव है कि प्रतिदिन गिने जाने वाले किलोमीटर की संख्या के पीछे भागने के बजाय अपनी दिनचर्या में निरंतरता और स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। इसकी शुरुआत रोजाना 30 से 60 मिनट की ब्रिस्क वॉक से की जा सकती है और बाद में अपनी व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे इस समय सीमा या तीव्रता को बढ़ाया जा सकता है।


















