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अयोध्या: राम मंदिर दानपात्र चोरी में बड़ी बरामदगी, पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर छापेमारी कर सोना और नकदी पकड़ीउत्तर प्रदेश
10 जुल॰ 2026, 12:30 am (111 दिन पहले)· 2

अयोध्या: राम मंदिर दानपात्र चोरी में बड़ी बरामदगी, पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर छापेमारी कर सोना और नकदी पकड़ी

राम मंदिर में दान की राशि चोरी करने के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। रिमांड के दौरान आरोपियों के खुलासों के बाद पुलिस ने रात भर तलाशी अभियान चलाकर नकदी, सोने के आभूषण और एक वाहन बरामद किया है।

अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्र से हुई चोरी के मामले में जांच कर रही टीम को रिमांड के दौरान अहम सफलता हासिल हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर रात भर विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में पुलिस ने भारी मात्रा में नकदी, सोने के गहने और एक चार पहिया वाहन अपने कब्जे में लिया है। आरोपी अनुकल्प के पास से 20 हजार रुपये की नकदी, सोने की चेन और एक मोबाइल फोन मिला है। इसके अतिरिक्त, उसके पिता के नाम पर खरीदी गई एक डिजायर कार भी पुलिस ने जब्त की है।

बैंक खातों से लेनदेन के साक्ष्य

जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस ने अन्य आरोपियों से भी बरामदगी की है। आरोपी लवकुश ने अपनी पत्नी को जो सोने का लॉकेट उपहार में दिया था, उसे पुलिस ने बरामद कर लिया है। लवकुश के पास से 38 हजार रुपये की नकदी भी मिली है, जबकि आरोपी करुणेश के पास से 15 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। शुरुआती छानबीन से पता चला है कि आरोपी अलग-अलग खातों के जरिए चोरी की राशि को अपने खातों में स्थानांतरित कर उसे वैध रूप देने की कोशिश कर रहे थे।

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आउटसोर्स स्टाफ की भूमिका और भर्ती प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, दानपात्र से पैसे चोरी होने के मामले में कुल 8 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और अब तक कोई नया आउटसोर्स कैशियर नियुक्त नहीं किया गया है। महाकुंभ के दौरान भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट ने एक आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से हाउस कीपिंग स्टाफ की भर्ती की थी। हालांकि, बैंक सूत्रों का कहना है कि इन पदों के लिए किसी विशेष योग्यता या अनुभवी स्टाफ की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि आउटसोर्स कर्मचारियों का कार्य केवल नोटों को व्यवस्थित करना था, न कि उन्हें गिनना।

इन आउटसोर्स कर्मियों का मुख्य काम नोटों की गड्डियों को सही तरीके से लगाना और मुड़े हुए नोटों को सीधा करना था, जिन्हें दानपात्र में लोग मोड़कर डाल देते थे। नोट गिनने की प्रक्रिया का जिम्मा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारियों का था। इस कार्य के लिए उच्च तकनीक वाली मशीनों का उपयोग किया जाता था, जिनमें 500, 200 और 100 रुपये के मिश्रित नोट डालने पर मशीन उन्हें अलग-अलग छांट देती थी और नकली नोटों की पहचान भी हो जाती थी।

बैंक कर्मियों से पूछताछ की संभावना

दानपात्र से जुड़ी व्यवस्था संभालने वाले सुभाष श्रीवास्तव बैंक के कर्मचारी नहीं थे, बल्कि वह एक पूर्व बैंकर थे। अब अयोध्या पुलिस की रडार पर भारतीय स्टेट बैंक के पूर्व मैनेजर गोविंद मिश्र हैं, जो वर्तमान में लखनऊ शाखा में तैनात हैं। जांच टीम जल्द ही उनसे और मंदिर में गणना कार्य में लगे बैंक कर्मियों से पूछताछ कर सकती है। साथ ही, बैंक के साथ MOU पर हस्ताक्षर करने वाले अनिल मिश्रा के बयान भी इसी सप्ताह दर्ज किए जाने की उम्मीद है। ड्रेस कोड से लेकर भर्ती तक की प्रक्रिया एक निजी एजेंसी देखती है, जिसमें बैंक की सीधी भूमिका नहीं होती।

अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि आरोपी केवल नोटों को व्यवस्थित करने का काम करते थे और गिनती का काम बैंक के कर्मचारी करते थे, तो चोरी के दौरान बैंक कर्मचारी क्या कर रहे थे। आखिर गणना कक्ष (काउंटिंग रूम) में मौजूद बैंक के लोग नोटों की कमी को कैसे नहीं भांप सके। यह अब जांच का एक मुख्य हिस्सा बन गया है, जिसके चलते एसबीआई के कर्मचारियों की भूमिका और उनके बयान बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं।

सवाल-जवाब

राम मंदिर दानपात्र चोरी मामले में अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं?
इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने छापेमारी में क्या बरामद किया है?
पुलिस ने छापेमारी में नकद रुपये, सोने के आभूषण, एक मोबाइल फोन और एक डिजायर कार बरामद की है।
आउटसोर्स कर्मचारियों का काम क्या था?
आउटसोर्स कर्मचारियों का काम केवल नोटों की गड्डियों को व्यवस्थित करना और दानपात्र में डाले गए मुड़े हुए नोटों को सीधा करना था।
नोट गिनने का काम कौन करता था?
नोट गिनने का काम भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारी हाईटेक मशीनों की मदद से करते थे।
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