भारत और अमेरिका के महाकुंभ जैसा युद्धाभ्यास शुरू, बीकानेर में ۱۲۰۰ सैनिक दिखा रहे दमझारखंड के गांवों में जलकुंभी और बांस से बन रहे होम डेकोर प्रोडक्ट, सायन की पहल से कारीगरों को मिल रहा रोजगारउत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को नरेंद्र मोदी ने दी जन्मदिन की बधाईसीमा पाहुजा संभालेंगी दिशा सालियान मौत मामले की कमान, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआरडांस के शौक को बनाएं कमाई का जरिया, जानें अंबाला के एक्सपर्ट से एकेडमी शुरू करने का पूरा गणितराजस्थान के उदयपुर में संगमरमर की कलाकृतियों का जादू, देश-विदेश के सैलानी खरीदने से खुद को नहीं रोक पातेगुरुग्राम हिट एंड रन मामले में मुख्य आरोपी और उसका साथी गिरफ्तार, शिवानी चौहान ने बयां की पूरी डरावनी दास्तानजालोर में 56 फ्लेवर के मोदक, कीमत 480 रुपये किलो से शुरूपलामू में सर्पदंश का अजीब मामला, जानिए क्या एक ही व्यक्ति को दो बार डंस सकता है कोई सांपबरेली से श्वेत क्रांति का नया अध्याय, १५०० करोड़ रुपये के निवेश से तैयार होंगी उन्नत नस्ल की गायें
बलिया में अनाथ हुए चार भाई-बहन, 19 साल की खुशबू पर आई पूरे परिवार की जिम्मेदारीउत्तर प्रदेश
16 सित॰ 2026, 9:14 am (35 मिनट पहले)· 0

बलिया में अनाथ हुए चार भाई-बहन, 19 साल की खुशबू पर आई पूरे परिवार की जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के बलिया में माता-पिता का साया उठने के बाद 19 साल की खुशबू पर छोटे भाई-बहनों के पालन-पोषण की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। मां ने अंतिम समय में बेटी से बच्चों का सहारा बनने की बात कही थी, जिसके बाद अब खुशबू खुद मजदूरी कर परिवार चला रही है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियर वार्ड नंबर 13 से एक बेहद मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है। इस परिवार ने माता-पिता दोनों को खो दिया है, जिससे बच्चों के सिर से बड़ों का साया पूरी तरह उठ चुका है। इस कठिन परिस्थिति ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया है, क्योंकि बच्चों के पिता के निधन के बाद अब उनकी मां भी इस दुनिया में नहीं रहीं। मां की अंतिम सांसें जब चल रही थीं, तब उन्होंने अपनी सबसे बड़ी बेटी से जो शब्द कहे, वे आज भी उस परिवार और पूरे क्षेत्र के जेहन में गूंज रहे हैं।

मां के आखिरी शब्द बने जीने का सहारा

जब मां अंतिम समय में थीं, तब उन्होंने अपनी बेटी से कहा था कि छोटे-छोटे बच्चे हैं और अब उनका आधार वही है। मां की इन बातों को सुनकर आसपास के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए थे। साल 2016 में इन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका था, उस समय सभी बच्चे बहुत छोटे थे। इसके बाद मां ने खेतों में मजदूरी करके किसी तरह अपने चारों बच्चों का पेट पाला और उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। लेकिन करीब दो-तीन महीने पहले गंभीर बीमारियों और लगातार अभावों के चलते मां भी महज 41 वर्ष की आयु में दुनिया छोड़कर चली गईं।

ये भी पढ़ें

19 साल की उम्र में कंधों पर आया पूरा घर

अब इस परिवार की सारी जिम्मेदारी 19 साल की बड़ी बेटी खुशबू प्रसाद के कंधों पर आ गई है। जिस उम्र में एक युवती को अपनी मां के आंचल में रहकर अपने भविष्य के सपने देखने चाहिए थे, उस उम्र में उसे अपनी मां की अर्थी को कंधा देना पड़ा। परिवार में खुशबू के अलावा दो छोटी बहनें और एक 14 साल का भाई शामिल है, जो सभी नाबालिग हैं। मां के अंतिम संस्कार के दौरान चारों भाई-बहनों ने मिलकर अर्थी को कंधा दिया था। उस पल ऐसा लगा मानो खुशबू की पूरी दुनिया ही उजड़ गई हो, लेकिन मां की आखिरी सीख ने उसे भीतर से मजबूत बना दिया।

दिनभर संघर्ष और रात को चूल्हे-चौके की फिक्र

आज खुशबू अपने छोटे भाई-बहनों के लिए माता और पिता दोनों की भूमिका निभा रही है। उसकी रोजमर्रा की सुबह बहुत संघर्ष के साथ शुरू होती है, जहाँ वह सुबह जल्दी उठकर बच्चों को तैयार करती है, उनके टिफिन का इंतजाम करती है और उन्हें स्कूल भेजती है। इसके बाद वह खुद बस स्टेशन के पास जाकर कड़ी मेहनत और मजदूरी करती है। शाम को घर लौटने पर वह भाई-बहनों की देखभाल करने के साथ-साथ खाना बनाती है और घर में पाली गई एक गाय के चारे-पानी की व्यवस्था भी खुद ही संभालती है। मजदूरी से मिलने वाले थोड़े-बहुत पैसों से वह किसी तरह घर का चूल्हा जलाने और सबकी पढ़ाई लिखाई को बचाने की कोशिश कर रही है।

प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार

इतनी कम उम्र में इस तरह की विकट परिस्थितियों का सामना कर रही खुशबू के मन में यही सबसे बड़ा सवाल रहता है कि वह अपने भाई-बहनों को कब तक और कैसे पढ़ा पाएगी। इस अनाथ परिवार को इस समय किसी की दया की नहीं, बल्कि एक ठोस सरकारी सहारे और अवसर की आवश्यकता है। खुशबू और उसके परिवार ने बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह तथा शासन से गुहार लगाई है कि उनकी कुछ आर्थिक मदद की जाए। उसे पूरी उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस मामले में सुध लेगा और उनके टूटे हुए सपनों को फिर से संबल प्रदान करेगा।

सवाल-जवाब

यह घटना किस जगह की है?
यह घटना उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियर वार्ड नंबर 13 की है।
खुशबू की उम्र कितनी है और उसके परिवार में कौन-कौन है?
खुशबू की उम्र 19 साल है और उसके परिवार में दो छोटी बहनें तथा एक 14 साल का भाई है।
बच्चों के माता-पिता का निधन कब और कैसे हुआ?
बच्चों के पिता का निधन सन 2016 में हुआ था, जबकि उनकी मां का निधन बीमारी और अभावों के चलते करीब दो-तीन महीने पहले हुआ।
वर्तमान में परिवार का खर्च कैसे चल रहा है?
19 साल की खुशबू खुद बस स्टेशन के पास मेहनत-मजदूरी करती है और घर में पाली गई गाय की देखभाल करके परिवार का खर्च चलाती है।
परिवार ने किससे मदद की गुहार लगाई है?
खुशबू ने बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और सरकार से अपने छोटे भाई-बहनों की मदद की गुहार लगाई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR