दिशा सालियान की मौत के रहस्य को सुलझाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने औपचारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कर ली है। यह गुत्थी अब हत्या है या आत्महत्या, इस पर से पर्दा उठाने के लिए सीबीआई ने अपनी अनुभवी अधिकारी सीमा पाहुजा को इसकी कमान सौंपी है। सीमा पाहुजा इस महत्वपूर्ण मामले की जांच की देखरेख करेंगी। उनके पास इस तरह के कई सनसनीखेज और पेचीदा मामलों को सुलझाने का लंबा और ठोस अनुभव रहा है। इससे पहले वह देश भर के कई चर्चित आपराधिक मामलों की जांच से जुड़ी रही हैं।
जांच के दायरे में पार्टी में शामिल लोग
जांच एजेंसी अब उन तमाम लोगों के बयान दर्ज करने की तैयारी में है जो 8 जून 2020 की रात दिशा सालियान की मौत से ठीक पहले मुंबई में उनके मंगेतर रोहन रॉय के आवास पर हुई एक पार्टी या मेल-मिलाप में उपस्थित थे। सीमा पाहुजा वर्तमान में दिल्ली में स्थित सीबीआई मुख्यालय की स्पेशल क्राइम यूनिट में एसपी के पद पर कार्यरत हैं। इस पूरी जांच प्रक्रिया में उनकी सहायता जांच अधिकारी और डिप्टी एसपी पुरण कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। सीमा पाहुजा को सूक्ष्मता से जांच करने और साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच करने में खासी महारत हासिल है। जटिल साक्ष्यों को आपस में जोड़कर मामले की कड़ियां सुलझाने की उनकी विशेषज्ञता के कारण उन्हें वर्ष 2021 में उत्कृष्ट जांच अधिकारी का स्वर्ण पदक भी मिल चुका है।
कई हाई-प्रोफाइल मामलों को सुलझा चुकी हैं सीमा पाहुजा
सीमा पाहुजा की गिनती देश की बेहद तेज-तर्रार और दबंग महिला अधिकारियों में होती है। वह गाजियाबाद स्थित सीबीआई इकाई के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में डीएसपी के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। अपने शानदार और उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें पुलिस पदक सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। वह पहले भी सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट-वन में काफी लंबे समय तक काम कर चुकी हैं। इसके अलावा, वह साल 2024 के कोलकाता आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े बहुचर्चित रेप और मर्डर केस की भी जांच कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए गैंगरेप मामले की गहराई से जांच करने वाली पंद्रह सदस्यीय टीम में भी सीमा पाहुजा सक्रिय रूप से शामिल थीं। अपनी सख्त और बेहद ईमानदार कार्यशैली के कारण उन्हें आमतौर पर ऐसे मामलों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जो अत्यधिक उलझे होते हैं या जहां राजनीतिक दबाव की आशंका बहुत अधिक होती है। हिमाचल प्रदेश के चर्चित गुड़िया मामले की उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने के लिए भी केंद्रीय एजेंसी ने सीमा पाहुजा को ही मैदान में उतारा था। वर्ष 2017 में उन्होंने उन्नाव रेप केस की भी जांच की थी और इसके साथ ही शिमला में एक सोलह वर्षीय लड़की के साथ हुए दुष्कर्म और उसकी हत्या के सनसनीखेज मामले की तह तक जाने का काम भी किया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया कदम
अब सीमा पाहुजा को साल 2020 में हुई दिशा सालियान की मौत की विभिन्न परिस्थितियों की गहन जांच का जिम्मा सौंपा गया है। इस पूरे मामले पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं और सीबीआई टीम को कई महत्वपूर्ण गवाहों और लोगों के बयान दर्ज करने हैं। गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद ही सीबीआई ने दिशा सालियान मौत मामले में यह एफआईआर दर्ज की है। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करते हुए इस प्राथमिकी में फिलहाल किसी भी व्यक्ति को बतौर आरोपी नामजद नहीं किया गया है। यह नई प्राथमिकी 13 सितंबर को दर्ज की गई थी। इसमें आपराधिक साजिश रचने, सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, साक्ष्यों को नष्ट करने और अपराधियों को बचाने के लिए लोक सेवकों द्वारा गलत दस्तावेज या रिकॉर्ड तैयार करने से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं। सीबीआई के अधिकारियों ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए यह मामला दर्ज किया गया है और इसके साथ ही औपचारिक जांच और बयानों को दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।



















