बरेली अब केवल अपने पारंपरिक झुमके और सुरमे के लिए ही नहीं, बल्कि पशुपालन और डेयरी सेक्टर में होने वाले बड़े वैज्ञानिक प्रयोगों के कारण भी खास पहचान हासिल कर रहा है। हाल ही में शहर में एक कैटल जीनोमिक्स समिट का आयोजन किया गया था, जिसमें मवेशियों की नस्लों में सुधार लाने और दूध की पैदावार को कई गुना बढ़ाने को लेकर कई अहम और दूरदर्शी कदम सामने आए हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आधुनिक तकनीक की सहायता से विशेष रूप से तैयार किए गए एलीट गिर बछड़ों का सफल जन्म हुआ है। इस घटनाक्रम को देश में पशु नस्ल सुधार की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।
१५०० करोड़ रुपये का भारी निवेश और वैज्ञानिक तकनीक
बरेली की प्रमुख कंपनी बीएल एग्रो ने पशुपालन क्षेत्र को अत्याधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपनी बायोटेक्नोलॉजी इकाई लीड्स जेनेटिक्स के माध्यम से लगभग १५०० करोड़ रुपये का भारी निवेश करने का ऐलान किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली ऐसी गायों की नस्लें तैयार करना है, जिनमें सामान्य पशुओं के मुकाबले कहीं अधिक दूध देने की क्षमता मौजूद हो। इस पूरी प्रक्रिया के तहत मवेशियों के बेहतरीन आनुवंशिक गुणों की गहरी पहचान की जाती है और फिर उनका उपयोग अगली पीढ़ी के स्वस्थ पशुओं को विकसित करने में किया जाता है। यदि इसे सरल शब्दों में समझें तो अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण तैयार किए जाते हैं और बाद में इन्हें गाय के गर्भ में सुरक्षित रूप से प्रत्यारोपित किया जाता है। इस वैज्ञानिक विधि से जन्म लेने वाली बछिया आगे चलकर ऐसी गाय में विकसित होती है, जो पारंपरिक मवेशियों की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में दूध दे सकती है।
रोजाना ६० लीटर तक दूध देने की क्षमता
बरेली में संपन्न हुए इस आधुनिक प्रयोग के परिणामस्वरूप गिर नस्ल के आनुवंशिक रूप से चयनित एलीट बछड़ों का धरती पर आगमन हुआ है। कंपनी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन बेहतर आनुवंशिक क्षमताओं से लैस गायों के माध्यम से भविष्य में हर दिन ४० से लेकर ६० लीटर तक दूध का उत्पादन होने की पूरी संभावना है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि वास्तविक दूध उत्पादन पूरी तरह से पशु की सही देखभाल, उसके खानपान, संतुलित पोषण और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा। बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल का इस संबंध में कहना है कि इस पूरी व्यवस्था में देश का किसान सबसे अहम कड़ी साबित होगा। उन्नत नस्ल, वैज्ञानिक तरीकों से पशुओं का पालन और उन्हें सीधे बाजार से जोड़ने की व्यवस्था के जरिए किसानों की आय में भारी इजाफा करने के नए रास्ते खोले जाएंगे। कंपनी न केवल देश की पारंपरिक देशी नस्लों को मजबूत करने का कार्य कर रही है, बल्कि एलीट बुल, भ्रूण और सेक्स्ड सीमेन का उत्पादन भी देश के भीतर ही करने पर पूरी तरह से फोकस कर रही है। बरेली में तेजी से विकसित किए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में वर्ष २०२७ के अंत तक हर महीने लगभग १५ हजार भ्रूण तैयार करने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।



















