राम जन्मभूमि ट्रस्ट में चंदा चोरी के बड़े मामले के उजागर होने के बाद इस्तीफा दे चुके पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने पूरी तरह साफ कर दिया है कि वह अयोध्या छोड़कर कहीं भी नहीं जा रहे हैं और विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक इसी पावन नगरी में डटे रहेंगे। इस पूरे घोटाले की जांच के लिए गठित की गई SIT ने मामले में वित्तीय गबन के पुख्ता सबूत पाए थे, जिसके आधार पर कुल 8 लोगों को सीधे तौर पर कसूरवार ठहराया गया और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन सभी को गिरफ्तार कर लिया है। चंदा चोरी की इस घटना के सामने आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिससे इस मामले को लेकर देश भर में राजनीतिक और सामाजिक बहस बेहद तेज हो गई है। दूसरी तरफ, अयोध्या के स्थानीय संतों ने चंपत राय का खुलकर बचाव किया है। संतों का स्पष्ट कहना है कि चंपत राय का इस वित्तीय हेराफेरी से कोई संबंध नहीं है और उन्हें अयोध्या के संपूर्ण संत समाज का पूरा समर्थन और विश्वास प्राप्त है।
जांच पूरी होने तक अयोध्या में ही रहेंगे चंपत राय
इस पूरे प्रशासनिक और कानूनी घटनाक्रम के बीच, श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने इस विपरीत परिस्थिति में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने अपने बेहद करीबी सहयोगियों और सलाहकारों से बातचीत के दौरान यह बात साझा की है कि जब तक SIT अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश नहीं कर देती और इस पूरे घोटाले के पीछे के असली गुनहगारों का चेहरा जनता के सामने बेनकाब नहीं हो जाता, तब तक वह अयोध्या में ही निवास करेंगे। वह किसी भी प्रकार के आरोपों से पीछे हटने या भागने के बजाय जांच का डटकर सामना करना चाहते हैं। चंपत राय ने अयोध्या में ही रहकर जांच एजेंसियों का हर संभव सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। वह जांच प्रक्रिया पूरी होने तक स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध रहेंगे ताकि यदि जांच दल को किसी भी स्तर पर किसी विशेष दस्तावेज, स्पष्टीकरण या ट्रस्ट से जुड़ी अन्य आवश्यक जानकारियों की जरूरत पड़े, तो वह तत्काल उनकी सहायता के लिए उपस्थित हो सकें।
बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट का नया ढांचा
चंपत राय के इस फैसले और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने उनकी सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया है। उनके निवास स्थान पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और परिसर के भीतर आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की कड़ी जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन इस संवेदनशील मामले को लेकर कोई भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। चंपत राय ने स्पष्ट किया है कि वह वर्तमान में किसी भी तरह की सार्वजनिक बयानबाजी या सवालों के जवाब देने से पूरी तरह बचेंगे। उनका सारा ध्यान इस समय केवल जांच प्रक्रिया को सुचारू ढंग से पूरा करवाने और सच को सबके सामने लाने में सहयोग करने पर केंद्रित है। SIT की पूरी जांच समाप्त होने के बाद ही वह जनता और मीडिया के सामने आकर सभी सवालों का खुलकर जवाब देंगे। इस बीच, राम मंदिर ट्रस्ट ने अपने आंतरिक प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद ट्रस्ट ने दैनिक कार्यों को संचालित करने के लिए अंतरिम महासचिव की नियुक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने का निर्णय लिया है।
आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर टिकी निगाहें
चंदा चोरी के इस बड़े मामले में पुलिस की कानूनी कार्रवाई भी तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस ने अब अदालत से दो मुख्य आरोपियों रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव की पुलिस कस्टडी रिमांड की औपचारिक मांग की है। इस रिमांड याचिका पर अदालत आगामी 14 जुलाई को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाने वाली है। जांच अधिकारियों का दृढ़ विश्वास है कि यदि इन दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर गहनता से पूछताछ की जाती है, तो चंदे की इस भारी-भरकम राशि की हेराफेरी, बैंक खातों में धन के अवैध हस्तांतरण और इस साजिश में शामिल अन्य बड़े चेहरों का पर्दाफाश हो सकता है, जिससे जांच को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने में बड़ी सहायता मिलेगी।











