उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में करीब साढ़े तीन साल पहले अंजाम दिए गए जघन्य हत्याकांड में अदालत की ओर से कड़ा फैसला सामने आया है। किशनपुर थाना क्षेत्र के सिलमी गांव में स्कूल बस चालक रज्जन तिवारी की पीट-पीटकर जान लेने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अजय सिंह की अदालत ने दोनों सगे भाइयों रामलखन और शिवलखन को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कठोर कारावास के साथ-साथ दोनों मुजरिमों पर एक-एक लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।
लाठी-डंडों से चालीस मिनट तक किया गया था हमला
शासकीय अधिवक्ता अंजय सिंह की ओर से अदालत के समक्ष रखे गए ब्योरे के मुताबिक यह खूनी वारदात 3 फरवरी 2023 की रात को घटी थी। पुरानी रंजिश को लेकर सिलमी गांव के रहने वाले स्कूल बस चालक रज्जन तिवारी को दोनों भाइयों ने घेर लिया और उन पर लाठी-डंडों से अंधाधुंध वार करना शुरू कर दिया था। हमलावरों ने तकरीबन 40 मिनट तक रज्जन पर बेरहमी से लाठियां बरसाईं। गंभीर हालत में लहूलुहान पड़े रज्जन को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, मगर डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उन्होंने दम तोड़ दिया। शव परीक्षण की रिपोर्ट में साफ हुआ कि उनके जिस्म पर चोट के 15 निशान थे और सिर की गहरी चोट उनकी मौत की मुख्य वजह बनी।
पुलिस कार्रवाई और अदालत में पेश किए गए पुख्ता सबूत
इस दिल दहलाने वाली वारदात के अगले दिन मृतक के भाई विमलेश कुमार ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। तहरीर के आधार पर पुलिस ने हत्या, गंभीर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने से जुड़ी धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया। पुलिस टीम ने तेजी दिखाते हुए रामलखन को घटना के कुछ ही दिन बाद दबोचकर जेल भेज दिया था, जबकि दूसरा भाई शिवलखन मौके से भाग निकला था। शिवलखन को करीब नौ दिन तक चले तलाशी अभियान के बाद गिरफ्तार किया जा सका। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और ठोस साक्ष्य पेश किए, जिसके चलते दोनों आरोपी अपने बचाव में टिक नहीं पाए और अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया।
परिजनों का विरोध और छह घंटे बाद अंतिम संस्कार
रज्जन तिवारी का पार्थिव शरीर जब अस्पताल से गांव सिलमी पहुंचा तो शोक संतप्त परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। मृतक की पत्नी मीना देवी और मां गोमती देवी ने कातिलों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई थी। परिवार के लोगों का कहना था कि उन्होंने घटना से पहले ही अनहोनी का अंदेशा जताते हुए स्थानीय पुलिस चौकी में शिकायत दी थी, लेकिन उस वक्त कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया गया। हालात बिगड़ते देख मौके पर पहुंचे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया, जिसके बाद करीब 6 घंटे की मशक्कत के उपरांत अंतिम संस्कार संपन्न हो सका था।
मां के नाम पर जांच और अदालत का आदेश
पीड़ित परिवार ने घटना के तुरंत बाद दी गई तहरीर में दोनों भाइयों के साथ उनकी मां सरस्वती देवी को भी नामजद आरोपी बनाया था। हालांकि विवेचना अधिकारी की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने साक्ष्यों के अभाव में सरस्वती देवी का नाम केस डायरी से अलग कर दिया था। इस बिंदु पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने कानूनी प्रक्रिया के तहत सरस्वती देवी को भी तलब किया है।




















