सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश की निर्वाचक नामावली को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों पर प्रदेश के निर्वाचन तंत्र ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन दावों को पूरी तरह तथ्यहीन और मनगढ़ंत करार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR)-2026 के अंतर्गत मतदाता सूची में अचानक 16.18 लाख रहस्यमयी मतदाताओं को शामिल कर लिया गया। निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पूरी पुनरीक्षण कवायद लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और भारत निर्वाचन आयोग के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी निष्पक्षता और खुलेपन के साथ संपन्न की गई है।
घर-घर सत्यापन के दौरान वैध तरीके से जमा हुए थे फॉर्म-6
मतदाता सूची के इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए नवदीप रिणवा ने आंकड़ों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन की निर्धारित तारीख 06-01-2026 तय थी। इससे ठीक पहले 27-10-2025 से 06-01-2026 तक गणना का चरण संचालित किया गया था। इस चरण में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन का कार्य किया था। इसी सत्यापन प्रक्रिया के तहत कुल 16.18 लाख फॉर्म-6 एकत्र किए गए थे, जो नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए निर्धारित प्रारूप है।
यह कवायद भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 27-10-2025 को जारी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण संबंधी निर्देशों के अनुपालन में की गई थी, जिसे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी लागू किया गया था। आयोग के नियमों के मुताबिक, ऐसे कई योग्य नागरिक थे जिनके नाम 27-10-2025 को पुनरीक्षण अभियान शुरू होने के वक्त पुरानी मतदाता सूची में मौजूद नहीं थे। इस कारणवश उनके पूर्व-मुद्रित गणना प्रपत्र तैयार नहीं हो सके थे। ऐसे ही लगभग 16.18 लाख पात्र नागरिकों को बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर भ्रमण के दौरान फॉर्म-6 उपलब्ध कराए और उन्हें विधिवत भरकर एकत्र किया।
वेबसाइट पर नाम प्रदर्शित करने और नियमों के पालन की स्थिति
मतदाताओं के नाम छिपाने अथवा उन्हें सार्वजनिक न करने के संबंध में इंटरनेट पर लगाए जा रहे आरोपों का भी निर्वाचन अधिकारी ने खंडन किया। उन्होंने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 तथा आयोग के नियमावली का हवाला देते हुए बताया कि केवल वे फॉर्म-6 (आवेदन), जो 06-01-2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद दावे और आपत्तियों के आधिकारिक दौर में हासिल हुए थे, उनकी सूची यानी फॉर्म-9 को ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के आधिकारिक वेब पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य होता है।
प्रशासन ने साफ तौर पर कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी विधिक प्रावधान, नियमावली या आयोग के निर्देशों का कतई उल्लंघन नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, वार्षिक संक्षिप्त पुनरीक्षण की सामान्य व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन से पहले एक निर्धारित समय-सारणी के अनुसार मतदाता सूची को ईआरओ नेट पर फ्रीज कर दिया जाता है। इस तकनीकी प्रक्रिया के कारण ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने से ठीक पहले प्राप्त कुछ फॉर्म-6 अनिस्तारित रह जाते हैं या ई-रोल अपडेट न होने से वे प्रारंभिक ड्राफ्ट में सीधे नहीं दिखते। इन सभी आवेदनों का वैधानिक निस्तारण दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान करते हुए अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाती है।
स्वीकृति दर पर मनगढ़ंत अटकलें और राजनीतिक दलों की सहभागिता
फॉर्म-6 स्वीकार किए जाने के प्रतिशत को लेकर चल रही चर्चाओं को खारिज करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि इस तरह के आरोप बिना किसी तार्किक समझ के केवल मनमानी कल्पना के आधार पर गढ़े गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉर्म स्वीकार करने के लिए किसी पूर्व-निर्धारित गणितीय फॉर्मूले या निश्चित प्रतिशत का कोई नियम नहीं होता है। हर फॉर्म का सत्यापन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है और जांच पूरी होने के उपरांत ही पात्रता के आधार पर उसे स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है।
नवदीप रिणवा ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 की पूरी कार्यवाही पूरी तरह सहभागी, पारदर्शी और विधि सम्मत रही है। इस प्रक्रिया में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सक्रिय रूप से शामिल किया गया था। उन्होंने बताया कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अब तक किसी भी पंजीकृत राजनीतिक दल अथवा किसी व्यक्ति की तरफ से इस प्रकार का कोई औपचारिक आरोप या शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
























