ओपनएआई के गणितीय दावों और जल्दबाजी पर भड़के विशेषज्ञ, अकादमिक मानकों की अनदेखी का आरोपहर महीने 10,000 रुपये बचाकर बन सकते हैं करोड़पति, समझें 12 प्रतिशत रिटर्न पर समय का पूरा गणितमहानगरों को पछाड़ते 11 उभरते शहर, आवासीय संपत्तियों के दाम 63 प्रतिशत उछलेब्रेट एडकॉक के स्टार्टअप हार्क ने लॉन्च किया एआई असिस्टेंट 'हार्क प्रो', कंप्यूटर टास्क और प्राइवेसी पर रहेगा जोरसिंगापुर डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में ठहराव, एमएएस के आगामी फैसले पर टिकी निगाहेंक्यूबेक चुनाव और अल्बर्टा जनमत संग्रह के साए में कनाडाई डॉलर सुस्त, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से वैश्विक मुद्राओं पर दबावअमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारी श्मिट ने महंगाई पर चेताया, साख बचाने के लिए लंबी लड़ाई जरूरीफिल्म 'काला हिरण' विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने सलमान खान से मांगा जवाब, निर्माता अमित जानी ने लगाई रोक की गुहारडॉलर इंडेक्स में 102 के नीचे फिसलन, फेड मिनट्स से पहले वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजार सतर्कपीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कैप्टन स्मित मच्छार के लिए अशोक चक्र की सिफारिश, 174 यात्रियों की बचाई थी जान
उत्तर प्रदेश मतदाता सूची में 16.18 लाख रहस्यमयी नामों के दावों को चुनाव आयोग ने बताया निराधारउत्तर प्रदेश
7 अक्तू॰ 2026, 12:07 am (2 घंटे पहले)· 0

उत्तर प्रदेश मतदाता सूची में 16.18 लाख रहस्यमयी नामों के दावों को चुनाव आयोग ने बताया निराधार

सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 16.18 लाख फर्जी नाम जोड़ने के आरोपों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे भ्रामक करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नाम विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के तहत वैध प्रक्रिया से एकत्र फॉर्म-6 के जरिए जोड़े गए हैं।

सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश की निर्वाचक नामावली को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों पर प्रदेश के निर्वाचन तंत्र ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन दावों को पूरी तरह तथ्यहीन और मनगढ़ंत करार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR)-2026 के अंतर्गत मतदाता सूची में अचानक 16.18 लाख रहस्यमयी मतदाताओं को शामिल कर लिया गया। निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पूरी पुनरीक्षण कवायद लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और भारत निर्वाचन आयोग के कड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी निष्पक्षता और खुलेपन के साथ संपन्न की गई है।

घर-घर सत्यापन के दौरान वैध तरीके से जमा हुए थे फॉर्म-6

मतदाता सूची के इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए नवदीप रिणवा ने आंकड़ों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन की निर्धारित तारीख 06-01-2026 तय थी। इससे ठीक पहले 27-10-2025 से 06-01-2026 तक गणना का चरण संचालित किया गया था। इस चरण में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन का कार्य किया था। इसी सत्यापन प्रक्रिया के तहत कुल 16.18 लाख फॉर्म-6 एकत्र किए गए थे, जो नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए निर्धारित प्रारूप है।

ये भी पढ़ें

यह कवायद भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 27-10-2025 को जारी विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण संबंधी निर्देशों के अनुपालन में की गई थी, जिसे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी लागू किया गया था। आयोग के नियमों के मुताबिक, ऐसे कई योग्य नागरिक थे जिनके नाम 27-10-2025 को पुनरीक्षण अभियान शुरू होने के वक्त पुरानी मतदाता सूची में मौजूद नहीं थे। इस कारणवश उनके पूर्व-मुद्रित गणना प्रपत्र तैयार नहीं हो सके थे। ऐसे ही लगभग 16.18 लाख पात्र नागरिकों को बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर भ्रमण के दौरान फॉर्म-6 उपलब्ध कराए और उन्हें विधिवत भरकर एकत्र किया।

वेबसाइट पर नाम प्रदर्शित करने और नियमों के पालन की स्थिति

मतदाताओं के नाम छिपाने अथवा उन्हें सार्वजनिक न करने के संबंध में इंटरनेट पर लगाए जा रहे आरोपों का भी निर्वाचन अधिकारी ने खंडन किया। उन्होंने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 तथा आयोग के नियमावली का हवाला देते हुए बताया कि केवल वे फॉर्म-6 (आवेदन), जो 06-01-2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद दावे और आपत्तियों के आधिकारिक दौर में हासिल हुए थे, उनकी सूची यानी फॉर्म-9 को ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के आधिकारिक वेब पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य होता है।

प्रशासन ने साफ तौर पर कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी विधिक प्रावधान, नियमावली या आयोग के निर्देशों का कतई उल्लंघन नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, वार्षिक संक्षिप्त पुनरीक्षण की सामान्य व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन से पहले एक निर्धारित समय-सारणी के अनुसार मतदाता सूची को ईआरओ नेट पर फ्रीज कर दिया जाता है। इस तकनीकी प्रक्रिया के कारण ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने से ठीक पहले प्राप्त कुछ फॉर्म-6 अनिस्तारित रह जाते हैं या ई-रोल अपडेट न होने से वे प्रारंभिक ड्राफ्ट में सीधे नहीं दिखते। इन सभी आवेदनों का वैधानिक निस्तारण दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान करते हुए अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाती है।

स्वीकृति दर पर मनगढ़ंत अटकलें और राजनीतिक दलों की सहभागिता

फॉर्म-6 स्वीकार किए जाने के प्रतिशत को लेकर चल रही चर्चाओं को खारिज करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि इस तरह के आरोप बिना किसी तार्किक समझ के केवल मनमानी कल्पना के आधार पर गढ़े गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉर्म स्वीकार करने के लिए किसी पूर्व-निर्धारित गणितीय फॉर्मूले या निश्चित प्रतिशत का कोई नियम नहीं होता है। हर फॉर्म का सत्यापन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है और जांच पूरी होने के उपरांत ही पात्रता के आधार पर उसे स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है।

नवदीप रिणवा ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 की पूरी कार्यवाही पूरी तरह सहभागी, पारदर्शी और विधि सम्मत रही है। इस प्रक्रिया में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सक्रिय रूप से शामिल किया गया था। उन्होंने बताया कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अब तक किसी भी पंजीकृत राजनीतिक दल अथवा किसी व्यक्ति की तरफ से इस प्रकार का कोई औपचारिक आरोप या शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर क्या दावा किया जा रहा था?
सोशल मीडिया पर यह भ्रामक दावा किया जा रहा था कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के दौरान उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 16.18 लाख रहस्यमयी वोटर जोड़े गए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
उन्होंने कहा कि यह आरोप तथ्यहीन हैं और ये 16.18 लाख नाम घर-घर गणना चरण के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा वैध फॉर्म-6 के माध्यम से एकत्र किए गए थे।
यह 16.18 लाख फॉर्म-6 किस समयावधि में एकत्र किए गए थे?
यह फॉर्म 27-10-2025 से 06-01-2026 तक चले गणना चरण के दौरान पात्र नागरिकों से एकत्र किए गए थे।
वेबसाइट पर फॉर्म-9 के तहत कौन से नाम प्रदर्शित किए जाते हैं?
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के अनुसार, केवल वही नाम फॉर्म-9 पर प्रदर्शित किए जाते हैं जो 06-01-2026 को ड्राफ्ट सूची प्रकाशन के बाद दावा और आपत्ति अवधि में प्राप्त होते हैं।
क्या फॉर्म-6 स्वीकार करने का कोई निश्चित प्रतिशत या फॉर्मूला होता है?
नहीं, फॉर्म स्वीकार करने का कोई निश्चित प्रतिशत नहीं होता; विहित कानूनी प्रक्रिया और पात्रता की जांच के बाद ही फॉर्म-6 स्वीकार किया जाता है।
क्या किसी राजनीतिक दल ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति या औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है?
नहीं, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार किसी भी राजनीतिक दल अथवा व्यक्ति ने इस संबंध में कोई आरोप या औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·1 घंटे पहले

आजकल सोशल मीडिया पर कुछ भी फैला देते हैं बिना सोचे समझे। अच्छा हुआ चुनाव आयोग ने समय रहते सब साफ़ कर दिया, वरना लोग तो हर बात पर अफवाह फैलाने को बैठे ही रहते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

चुनाव के समय ऐसी अफवाहें जानबूझकर फैलाई जाती हैं ताकि लोग भ्रमित हों। अच्छा हुआ आयोग ने समय रहते सब साफ कर दिया।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब हमारे यहाँ बीएलओ घर आए थे, तो उन्होंने भी फॉर्म भरने में पूरी मदद की थी, लोग वैसे ही बेवजह बातें बनाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

चुनाव के दिनों में घर आए बीएलओ से फॉर्म भरवाने की वो भागदौड़ याद आ गई। लोग बिना सोचे-समझे सोशल मीडिया पर कुछ भी अफवाह फैला देते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, सही कहा आपने! बीएलओ की उस मेहनत को लोग सोशल मीडिया पर एक झटके में फर्जी बता देते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp