कानपुर के चुन्नीगंज चौराहे पर कमल के फूल के सुंदर डिजाइन में तैयार किया गया अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनकर तो खड़ा है, लेकिन इसके दरवाजे अब तक आम जनता और शहर के उद्योगपतियों के लिए नहीं खुल सके हैं. राष्ट्रीय स्तर के औद्योगिक आयोजनों और विशाल व्यापारिक सम्मेलनों को समर्पित 95 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्तमान में नियमित संचालन और देखरेख की राह देख रही है. महीनों से इमारत का नियमित उपयोग न होने के कारण इसकी सतहों और दीवारों पर धूल जमने लगी है, परिसर की शोभा बढ़ाने के लिए लगाए गए पौधे अब बेतरतीब झाड़ियों में बदलने लगे हैं, और वहां रखी पानी की टंकियों में रुके पानी से मच्छरों के पनपने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है. जिस ढांचे को कानपुर के औद्योगिक पुनरुद्धार और आर्थिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा था, उसका वास्तविक जमीनी फायदा स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को अब तक नहीं मिल पाया है.
प्रशासनिक सुस्ती से अटका उद्घाटन और संचालन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस परियोजना को शहर के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना था और इसके उन्नत निर्माण व आधुनिक सुविधाओं की खुले दिल से प्रशंसा भी की थी. इस तरह के शीर्ष स्तरीय समर्थन के बावजूद, सिविल निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद भी इसके संचालन की मुकम्मल व्यवस्था तय करने में लंबा वक्त बर्बाद हो गया. नगर निगम और स्थानीय प्रशासनिक मशीनरी के स्तर पर समय रहते एजेंसी तय करने और आवश्यक नीतिगत फैसले न लिए जाने से पूरे प्रोजेक्ट का वास्तविक उपयोग महीनों तक लटका रहा. वर्तमान में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इसके संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने के लिए निजी कंपनी का चयन पूरा कर लिया गया है तथा संपत्ति को सौंपने यानी हैंडओवर की प्रक्रिया जारी है. उम्मीद जताई जा रही है कि अक्टूबर के अंत तक इसे पूर्ण रूप से चालू कर दिया जाएगा.
रखरखाव की कमी से परिसर में उपजी चिंताएं
कन्वेंशन सेंटर की स्थापना का मूल ध्येय कानपुर में बड़े स्तर की व्यापारिक प्रदर्शनियों, उद्योग जगत की उच्चस्तरीय बैठकों, नीतिगत सेमिनारों और सांस्कृतिक सम्मेलनों के लिए विश्वस्तरीय मंच प्रदान करना था. इसकी अनूठी वास्तुकला और आधुनिक सुविधाएं इसे शहर के सबसे प्रतिष्ठित निर्माणों की सूची में खड़ा करती हैं. इसके बावजूद, लंबे समय से ताला बंद रहने और नियमित मानवीय आवाजाही न होने की वजह से इमारत के रखरखाव को लेकर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं. परिसर के भीतरी कमरों से लेकर बाहरी परिसरों तक गर्द छाई हुई है और हरित क्षेत्र की नियमित बागवानी का अभाव साफ नजर आ रहा है. स्थानीय लोग अब यह सवाल उठा रहे हैं कि जनता के टैक्स के 95 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी समय पर इसकी सुरक्षा और साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था क्यों नहीं की गई. यदि निर्माण पूरा होने से पहले ही संचालन और मेंटेनेंस की योजना तय कर ली जाती, तो न तो यह संपत्ति धूल फांकती और न ही सरकारी संसाधनों की उपेक्षा की नौबत आती.
दो विशाल प्रदर्शनी हॉल और आधुनिक कारोबारी सुविधाएं
इस बहुउद्देशीय कन्वेंशन सेंटर को उद्योग जगत की हर आधुनिक जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. परिसर के भीतर 16 हजार वर्गफुट और 12 हजार वर्गफुट के दो बड़े प्रदर्शनी हॉल बनाए गए हैं, जहां विशाल औद्योगिक मेले लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा 300 व्यक्तियों की क्षमता वाला एक मुख्य सम्मेलन कक्ष और 100-100 सीटों की क्षमता वाले तीन अलग-अलग बैठक कक्ष भी मौजूद हैं. आगंतुकों और गणमान्य अतिथियों के ठहरने के लिए छह अतिथि कमरे और दो वीआईपी सुइट बनाए गए हैं. खान-पान की जरूरतों के लिए आठ हजार वर्गफुट का एक बड़ा फूड कोर्ट और 68 चारपहिया वाहनों के लिए कवर्ड पार्किंग क्षेत्र का प्रावधान किया गया है. इन सुविधाओं के माध्यम से ट्रेड एक्सपो, बिज़नेस सम्मेलनों, उत्पाद लॉन्च और बी2बी बैठकों का शानदार आयोजन संभव होगा. इस केंद्र के पूरी तरह क्रियाशील हो जाने पर कानपुर के उद्यमियों को बड़े आयोजनों के लिए लखनऊ या दिल्ली जैसे दूसरे बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी और स्थानीय वाणिज्य को नई गति मिलेगी.
अधिकारियों का दावा और आगे की रूपरेखा
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय और मंडलायुक्त के. विजयेंद्र पांडियन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी देने के लिए कंपनी का चयन औपचारिक तौर पर कर लिया गया है. वर्तमान में कागजी कार्यवाही और हैंडओवर से जुड़ी अंतिम प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. मंडलायुक्त के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जल्द ही कानपुर दौरा संभावित है और उनके हाथों ही इस भव्य केंद्र का औपचारिक लोकार्पण कराया जाएगा. प्रशासनिक अमला लोकार्पण की तैयारियों में जुटा होने का दावा कर रहा है. हालांकि, अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती न सिर्फ तय समयसीमा में इसे शुरू कराने की है, बल्कि निजी कंपनी के जरिए परिसर की स्वच्छता, सुरक्षा और उपकरणों के नियमित रखरखाव को सुचारू बनाए रखने की भी होगी.
नगर निगम की भूमिका और जवाबदेही पर मंथन
कन्वेंशन सेंटर के परिचालन मॉडल और नगर निगम के नियंत्रण को लेकर पहले भी निगम के सदन और कार्यकारिणी की बैठकों में गरमागरम चर्चाएं हो चुकी हैं. पार्षदों और जन प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया है कि निजी एजेंसी को जिम्मा सौंपने के बाद भी नगर निगम की निगरानी समिति को संपत्ति की देखरेख और राजस्व के बंटवारे पर कड़ी नजर रखनी चाहिए. कानपुर की जनता और कारोबारी वर्ग को उम्मीद है कि इस केंद्र के शुरू होने से होटल, खान-पान, परिवहन और इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में सैकड़ों नए रोजगार और व्यापारिक अवसर पैदा होंगे. शहरवासियों की मांग है कि अब केवल बयानों और तैयारियों का दौर खत्म होना चाहिए और 95 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस राष्ट्रीय स्तर की संरचना को वास्तविक रूप से धरातल पर क्रियाशील किया जाए ताकि कानपुर को उसका खोया हुआ औद्योगिक गौरव वापस दिलाने में मदद मिल सके.




















