धार्मिक नगरी अयोध्या स्थित अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र से जुड़ी तीन शताब्दियों पुरानी एक ऐतिहासिक कलाकृति को आम जनता के अवलोकन के लिए प्रस्तुत करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. दक्षिण भारतीय कलमकारी शैली में रची गई यह अद्वितीय धरोहर सूती वस्त्र पर पूरी रामायण कथा को चित्रों के माध्यम से विस्तार से सामने लाती है. इस विशाल कृति को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पिछले छह महीनों से विशेषज्ञों द्वारा इसका गहन जीर्णोद्धार और वैज्ञानिक संरक्षण कार्य किया जा रहा था, जो अब सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है.
18वीं सदी की अनूठी ब्लॉक प्रिंटिंग कारीगरी
संग्रहालय के आधिकारिक और पंजीकृत दस्तावेजों के अनुसार यह कृति करीब 300 वर्ष पुरानी यानी 18वीं शताब्दी की मानी जाती है. सूती कपड़े पर ब्लॉक प्रिंटिंग तकनीक का अत्यंत बारीकी से उपयोग करते हुए रामायण के विभिन्न प्रमुख अध्यायों और प्रसंगों को सजीव रूप में चित्रित किया गया है. आकार की दृष्टि से भी यह कलाकृति बेहद भव्य है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 17.5 फीट (साढ़े 17 फीट) और चौड़ाई करीब 6 फीट दर्ज की गई है. इतने बड़े फलक पर पूरी रामकथा को सिलसिलेवार चित्रों में समेटना तत्कालीन कारीगरों के उत्कृष्ट कलात्मक कौशल को सिद्ध करता है.
दक्षिण भारतीय चित्रकला परंपरा और केंद्र
कलमकारी मूल रूप से दक्षिण भारत की एक अत्यंत प्रतिष्ठित पारंपरिक चित्रकला विधा मानी जाती है. इतिहास में इस कला शैली के दो सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध केंद्र आंध्र प्रदेश के श्रीकालहस्ती और मछलीपट्टनम रहे हैं. प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक विधियों से कपड़े पर तैयार की जाने वाली इस विधा के माध्यम से भगवान राम की गाथा को जिस गहराई के साथ उकेरा गया है, वह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प का एक दुर्लभ साक्ष्य प्रस्तुत करता है.
राम दरबार का अंकन और सार्वजनिक प्रदर्शन
अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीव सिंह के मुताबिक, करीब तीन सौ साल पुरानी इस ऐतिहासिक आकृति में संपूर्ण राम दरबार को भी पूरी गरिमा के साथ अंकित किया गया है. संरक्षण के कड़े मानकों के तहत इसे राष्ट्रीय स्तर के इस संग्रहालय में संजोया जा रहा है. छह महीने के लंबे तकनीकी उपचार के बाद अब इसे जल्द ही संग्रहालय की दीर्घा में स्थापित किया जाएगा, जिससे देश भर के साथ-साथ विदेश से आने वाले श्रद्धालु, इतिहास प्रेमी और पर्यटक रामायण परंपरा से जुड़ी इस अनमोल विरासत को प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे.


















