महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र जब भीषण सूखे और पानी की विकट समस्या से जूझ रहा है, ठीक उसी वक्त जालना शहर से सामने आई एक घटना ने राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा कर दिया है। शहर के मंमादेवी मंदिर परिसर में आयोजित एक रात्रि भजन संध्या के दौरान भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल पर जमकर नोट उड़ाए गए। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से सामने आया है, जिसके बाद से आम लोगों के साथ-साथ कई राजनीतिक दल भी इस सार्वजनिक आचरण पर कड़े सवाल उठा रहे हैं।
मंमादेवी मंदिर परिसर में भजन संध्या और फिल्मी धुन पर डांस
जालना के मंमादेवी मंदिर प्रांगण में भजन गायन का कार्यक्रम रखा गया था। इस धार्मिक आयोजन में पार्टी कार्यकर्ताओं के विशेष आग्रह पर पूर्व विधायक कैलास गोरंट्याल ने भी हिस्सा लिया। भजनों के बीच माहौल कुछ ऐसा बना कि कार्यकर्ताओं के कहने पर गोरंट्याल खुद भी थिरकने लगे। प्रत्यक्ष दर्शियों और वीडियो फुटेज के अनुसार, वह 'मैं हूं डॉन' गाने की धुन पर जमकर नाचे। इसी दौरान कुछ लोगों ने मंच के आसपास पहुंचकर 500 रुपये और 200 रुपये के नोट हवा में उड़ाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते मंच के सामने नोटों की बारिश होने लगी, जिसका वीडियो तेजी से सार्वजनिक हो गया।
राज्य भर में जल संकट और किसानों की भारी बर्बादी
यह पूरा वाकया ऐसे समय में हुआ है जब समूचे महाराष्ट्र में जल संकट और सूखे की स्थिति बेहद नाजुक मोड़ पर है। राज्य सरकार ने पहले ही राज्य की कुल 358 तहसीलों में से 305 तहसीलों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित कर रखा है। बारिश की भारी कमी के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूख चुकी हैं। स्थिति इस हद तक बिगड़ गई है कि किसानों को अपने बर्बाद हो चुके खेतों पर रोटावेटर चलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते कर्ज, पानी की भीषण किल्लत और मवेशियों के चारे के संकट ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने उठाए कड़े सवाल
सूखे की मार झेल रहे जिले में इस तरह के प्रदर्शन पर विपक्षी दल शिवसेना (यूबीटी) ने तीखा ऐतराज जताया है। वहीं बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना के नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने भी इस पूरे वाकये पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट सवाल उठाया कि जब किसान अपनी बर्बाद होती फसलों, कर्ज के बोझ और चारे-पानी के अभाव में परेशान हैं, तब क्या किसी जननेता का ऐसा बर्ताव उचित माना जा सकता है। हाल ही में वरिष्ठ राजनेता शरद पवार ने भी संकटग्रस्त किसानों की मदद के लिए सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग रखी थी। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में इस तरह सार्वजनिक रूप से धन का प्रदर्शन लोगों के बीच गहरी नाराजगी का सबब बन चुका है।
























