कानपुर की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे नेटवर्क मार्केटिंग गिरोह को बेनकाब किया है जो आयुर्वेदिक किट बेचने के बहाने नौकरी और मोटी कमाई का लालच देकर देशभर में लोगों को चूना लगा रहा था। इस गिरोह ने भारत के नौ शहरों में अपनी शाखाएं खोल रखी थीं और अब तक 60 हजार से ज्यादा लोगों से 150 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ऐंठ चुका है। पुलिस ने छह लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि सरगना समेत कई आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
पीड़ित की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई
मामला तब खुला जब एक पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पूछताछ में सामने आया कि सिर्फ डेढ़ महीने के भीतर कानपुर में ही 2000 से ज्यादा लोगों को इस गिरोह ने अपने जाल में फंसाया था। शहर के अर्रा रोड इलाके में मंगलम गार्डन नाम की जगह पर एक सेमिनार चल रहा था, जिसकी सूचना पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल तक पहुंची। उनके निर्देश पर डीसीपी दक्षिण और एडिशनल डीसीपी ऑपरेशन सुमित रामटेक की अगुवाई में क्राइम ब्रांच की 25 सदस्यों की टीम ने वहां छापा मारा। मौके पर ढाई सौ से अधिक युवाओं को प्रोडक्ट बेचने, ऊंचे वेतन और प्रमोशन का लालच देकर मोटिवेशनल तरीके से ट्रेनिंग दी जा रही थी, यहां तक कि स्क्रीन पर कल्पना आधारित वीडियो दिखाकर लोगों को प्रोडक्ट सेल की फैमिली चेन बनाने की सीख दी जा रही थी। छापे के दौरान पुलिस ने वहां मौजूद छह युवा ट्रेनरों को दबोचा, जो बिना पंजीकरण वाले घटिया प्रोडक्ट्स की बिक्री और मेंबरशिप की क्लासेस चला रहे थे।
विन मेकर आयुर्वेदा के नाम पर चल रहा था खेल
जांच में सामने आया कि विन मेकर आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी इस पूरे रैकेट के पीछे थी। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों के बेरोजगार नौजवानों को निशाना बनाकर उन्हें नौकरी, अच्छी सैलरी और जल्द अमीर बनने के सपने दिखाए जाते थे। पुलिस के अनुसार बिना रजिस्ट्रेशन वाली आयुर्वेदिक दवाओं की किट बेचने के नाम पर हर व्यक्ति से 12 हजार से 30 हजार रुपये तक जमा कराए जाते थे। इसके बदले हर महीने 25 हजार से 50 हजार रुपये की नौकरी और भारी कमाई का झांसा दिया जाता था। नए जुड़ने वालों को अलग-अलग होटलों में ठहराकर पहले ट्रेनिंग दी जाती, फिर उन्हें बड़े सेमिनारों में बुलाकर लग्जरी लाइफस्टाइल, प्रमोशन, बाइक और इनाम दिखाकर और लोगों को जोड़ने के लिए उकसाया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी और फरार सरगना
पुलिस ने जिन छह लोगों को पकड़ा है उनमें बिहार के बेगूसराय जिले के रविंद्र यादव, पटना के मनेर इलाके के कमलेश कुमार, भोजपुर के शाहपुर के मंतोष पासवान, पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना के रोहित शॉ, मध्य प्रदेश के दतिया के मंगल शाक्य और देवरिया के राजू कुमार शामिल हैं। वहीं गिरोह का मास्टरमाइंड विजय कुशवाहा, इनामुलहक और उनकी टीम के दस से ज्यादा साथी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
दो नए सदस्य जोड़ने का दबाव, न मानने पर धमकी
जांच में यह भी पता चला कि गिरोह में शामिल किए गए युवाओं का सोच-समझकर मनोवैज्ञानिक तरीके से ब्रेनवॉश किया जाता था। हर सदस्य पर यह दबाव बनाया जाता था कि वह कम से कम दो नए लोगों को नेटवर्क से जोड़े। जो ऐसा नहीं कर पाता, उसे सैलरी रोकने और जमा की गई रकम वापस न करने की धमकी दी जाती थी। पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क ने देशभर में 60 हजार से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया है और इनसे 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की उगाही की गई है। इनमें से करीब दो हजार पीड़ित सिर्फ कानपुर यूनिट से जुड़े थे।
सरगना की तलाश में बिहार रवाना हुई टीम
छापेमारी के बाद अब पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन टीम गिरोह के सरगना और अन्य फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए बिहार रवाना हो गई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही बाकी बचे आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जाएगा।




















