सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद पर प्रशासन का बुलडोजर चल गया है। जिला अदालत द्वारा मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज किए जाने के ठीक बाद यह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती के बीच अंजाम दी गई। जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने पिछले सप्ताह सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को सही ठहराते हुए इस भूमि को सरकारी जमीन करार दिया था।
रात में सील करने के बाद सुबह शुरू हुआ ध्वस्तीकरण
जिला प्रशासन की टीम ने शुक्रवार देर रात को ही कलेक्ट्रेट परिसर की इस मस्जिद को पूरी तरह सील कर दिया था। इसके अगले दिन शनिवार की सुबह कड़े सुरक्षा पहरे के बीच बुलडोजर मौके पर पहुंच गया और उस हिस्से को ढहाना शुरू कर दिया जिसे प्रशासन सरकारी जमीन मानता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्ट्रेट के सभी एंट्री पॉइंट पूरी तरह बंद कर दिए गए थे। मौके पर एडीएम और नगर निगम के अधिकारी लगातार मौजूद रहे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए 10 से ज्यादा थानों की फोर्स के साथ पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था।
कानूनी लड़ाई और अदालती फैसलों का क्रम
इससे पहले पिछले महीने सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर की इस मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए इसे खाली करने और गिराने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने जिला जज की अदालत में अपील दाखिल कर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग उठाई थी। गुरुवार को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया और 16 जुलाई 2026 के सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। अदालत के इस रुख के बाद प्रशासन ने बिना देर किए शुक्रवार रात को मस्जिद को सील किया और शनिवार सुबह बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और हाई कोर्ट जाने की तैयारी
मस्जिद गिराए जाने की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि सिटी मजिस्ट्रेट ने केवल मस्जिद को खाली करने का निर्देश दिया था, न कि उसे पूरी तरह गिराने का। इस कानूनी विवाद के बाद अब जिला अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जा रही है। पूर्व सांसद फजलुर्रहमान ने प्रशासन से बिना जल्दबाजी किए कदम उठाने की अपील की थी। उनका कहना था कि जिला अदालत से राहत न मिलने के बावजूद हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी और उनके पास अपनी बात रखने के लिए करीब 22 दिन का समय बाकी था।
इमरान मसूद और इकरा हसन का बयान
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने स्पष्ट किया था कि पूरा मामला अब हाई कोर्ट में ले जाया जाएगा। उन्होंने आम जनता से शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की थी। इमरान मसूद का दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड में यह विवादित जमीन वाहिद खान और याकूब खान के नाम पर दर्ज है और यह रिकॉर्ड काफी पुराना है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे पुराने राजस्व दस्तावेजों और लंबे वक्त से खड़े धार्मिक स्थल के अस्तित्व को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। रात के समय उनके कैराना स्थित आवास पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था और उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। इकरा हसन के अनुसार, वह सहारनपुर जाकर प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर पूरी स्थिति की जानकारी लेना चाहती थीं। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच सहारनपुर कलेक्ट्रेट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त बनी हुई है।


















