दिल्ली के द्वारका इलाके में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक संगठित और बड़े पैमाने पर चल रहे अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क को बेनकाब किया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरोह से जुड़े छह शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह आपराधिक सिंडिकेट देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय था और इसके तार कई बड़े मामलों से जुड़े हुए हैं। अब तक की पड़ताल में कुल 89 साइबर धोखाधड़ी की ऐसी शिकायतें सामने आई हैं जो सीधे तौर पर इसी नेटवर्क से संचालित हो रही थीं। इन सभी मामलों में कुल मिलाकर 83.23 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ठगी किए जाने का खुलासा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के दौरान पुलिस टीमों ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री भी जब्त की है, जिसमें 109 बैंक चेकबुक और 12 मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा फर्जी कंपनियों के पंजीकरण कागजात और कई अन्य वित्तीय दस्तावेज भी हाथ लगे हैं जो इस पूरे षड्यंत्र की गहराई को बयां करते हैं।
संदिग्ध बैंक खाते से खुला राज
इस पूरे मामले की आधिकारिक शुरुआत थाना द्वारका नॉर्थ में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत दर्ज एफआईआर संख्या 101/26 के जरिए हुई थी। जांच एजेंसियों ने जब राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज दर्जनों शिकायतों का तकनीकी विश्लेषण किया, तो एक संदिग्ध बैंक खाते पर संदेह गहराया। यह खाता द्वारका सेक्टर-23ए में स्थित यस बैंक की शाखा में रजिस्टर्ड पाया गया था। जब इस खाते की गहराई से छानबीन की गई तो पता चला कि इसमें केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि तेलंगाना, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे दूरदराज के राज्यों से भी ठगी की बड़ी रकम ट्रांसफर होकर आई थी। अपराधियों ने इस खाते का इस्तेमाल अवैध रूप से हड़पे गए धन को ठिकाने लगाने और उसे अलग-अलग चैनल्स के जरिए घुमाने के लिए एक सुरक्षित माध्यम के रूप में किया था।
म्यूल अकाउंट और फर्जी फर्मों का जाल
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी लोगों को भ्रमित करने के लिए फर्जी नामों और दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते और नई फर्में खुलवाते थे। इस संगठित सिंडिकेट का तौर-तरीका यह था कि वे ठगी के पैसों को एक साथ कई खातों में तेजी से ट्रांसफर करते थे ताकि एजेंसियों का ध्यान भटकाया जा सके और अंत में उस रकम को आसानी से नकद निकाल लिया जाता था। पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क ने यस बैंक के अलावा फेडरल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसे वित्तीय संस्थानों में भी इसी तरह के फर्जी खाते खुलवा रखे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई बैंक खाते ऐसे भोले-भाले और जरूरतमंद लोगों के नाम पर खुलवाए गए थे जिन्हें नौकरी दिलाने या किसी कंपनी में वेतन खाता शुरू करने का लालच दिया गया था। इन तमाम गतिविधियों के पीछे चेतन सहरावत को इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य संचालक या मास्टरमाइंड बताया जा रहा है जो बाकी सभी सदस्यों को निर्देशित करता था।
करोड़ों की राशि होल्ड और क्रिप्टो कनेक्शन
वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल के दौरान पुलिस को कई ऐसे बैंक खाते हाथ लगे जिनमें फंड भेजने वाले और उसके अंतिम लाभार्थी की पहचान एक ही जैसी प्रतीत होती थी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पैसों को सुनियोजित तरीके से इधर-उधर किया जा रहा था। इस पर त्वरित कानूनी कदम उठाते हुए अधिकारियों ने विभिन्न खातों में मौजूद कुल 1,14,84,394 रुपये की भारी रकम को सफलताપૂર્વक होल्ड करवा दिया है। इसके साथ ही मुख्य आरोपी चेतन सहरावत और गौरव कादियान के बीच आपसी वित्तीय लेनदेन के पुख्ता प्रमाण भी मिले हैं। इसके अलावा माही इनोवेटिव सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ करीब 94,000 रुपये के लेनदेन का भी पता चला है। जांच के दायरे में सिसुपाल एंटरप्राइजेज और प्लेंटिवा ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों द्वारा एसबीआई खातों में जमा कराई गई नकदी का विवरण भी शामिल किया गया है। पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी ने अमेरिकी डॉलर टीथर यानी यूएसडीटी और बाइनेंस प्लेटफॉर्म के जरिए भी वित्तीय लेनदेन करने की बात स्वीकार की है, हालांकि उसने जांच में अपना मोबाइल फोन उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया था जिसके चलते डिजिटल सबूत जुटाने के लिए तकनीकी मदद ली जा रही है।
विदेश भागने की कोशिश और एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी
कानून के शिकंजे से बचने के लिए आरोपियों ने देश छोड़कर भागने की फिराक में मास्टरप्लान तैयार किया था। एफआईआर दर्ज होने की भनक लगते ही मुख्य आरोपी चेतन सहरावत ने भारत छोड़ दिया और वह पहले थाईलैंड गया तथा वहां से दुबई फरार हो गया। इस हरकत को भांपते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने उसके खिलाफ तुरंत लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया, जिसके आधार पर जैसे ही वह इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरा, उसे दबोच लिया गया। इसी प्रकार एक अन्य आरोपी तरुण भी देश से भागने की तैयारी में था और दुबई जाने की फिराक में था, लेकिन समय रहते लुक आउट सर्कुलर सक्रिय होने के कारण उसे मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ही धर दबोचा गया। पुलिस ने इन छापों के दौरान कई अन्य अहम दस्तावेज भी बरामद किए जिनमें द ओलिम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के कागजात भी शामिल हैं। यह कंपनी उसी पते पर पंजीकृत थी और दस्तावेजों के अनुसार शक्ति गुर्जर तथा धर्मेंद्र कुमार इसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता थे।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची और आगे की कार्रवाई
इस बहुराज्यीय साइबर धोखाधड़ी मामले में अब तक कुल छह लोगों को विधिवत गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस पूरे सिंडिकेट को लीड करने वाला मुख्य हैंडलर चेतन सहरावत है। इसके अलावा जिन अन्य पांच सहयोगियों को दबोचा गया है उनमें शक्ति गुर्जर, धर्मेंद्र कुमार, तरुण, दीपक और गौरव कादियान शामिल हैं। कानून प्रवर्तन अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकरण की तह तक जाने के लिए अभी आगे की जांच तेजी से जारी है। आरोपियों के पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और डिजिटल वॉलेट्स की फारेंसिक जांच के जरिए इस बात का पूरा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ठगी के जाल में और कौन-कौन से चेहरे शामिल थे। पुलिस ने आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियों के साथ-साथ अन्य गुप्त ठिकानों से और अधिक बरामदगी होने की भी प्रबल संभावना जताई है।




















