उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहन स्वामियों और आवेदकों से अवैध धन वसूलने के एक बड़े मामले में कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। शिकायतों के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों की टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद दो सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (ARTO) को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) प्रशासन को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। पूरे प्रकरण में विभागीय कर्मियों तथा बिचौलियों सहित कुल 15 लोगों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
औचक निरीक्षण और 50 लोगों से गहन पूछताछ
यह प्रशासनिक कार्रवाई राज्य के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के कड़े निर्देशों के बाद शुरू हुई। कानपुर के जिलाधिकारी के आदेश पर अपर पुलिस उपायुक्त तथा ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सह उप जिलाधिकारी के संयुक्त नेतृत्व में एक विशेष जांच दल ने संभागीय एवं सहायक परिवहन कार्यालय परिसर पर अचानक छापा मारा। निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद करीब 50 लोगों को रोककर उनसे गहन पूछताछ की गई। इस पूछताछ के दौरान जांच टीम ने 11 ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की जो दलाली और अनधिकृत गतिविधियों में लिप्त थे। ये लोग नया वाहन पंजीकरण कराने और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए आवेदकों से अनुचित धनराशि ऐंठ रहे थे।
कैश की बरामदगी और क्लर्कों की संलिप्तता
छापेमारी की इस कार्रवाई में संदिग्धों की तलाशी लेने पर उनके पास से 43485 रुपये की नकद राशि जब्त की गई। जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा, कार्यालय में तैनात दो विभागीय लिपिकों मधुर मिश्रा और विपिन कुमार की भूमिका भी इस अवैध खेल में उजागर हुई। इसके उपरांत प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से थाना काकादेव में कुल 15 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस प्राथमिकी के बाद विभागीय स्तर पर अधिकारियों की निगरानी क्षमता और मिलीभगत की भी जांच शुरू कर दी गई है।
ट्रक चालक से अधिक वसूली का मामला
निरीक्षण के समय परिसर में मौजूद एक ट्रक चालक ने जांच दल के सामने अपना बयान दर्ज कराया। चालक ने बताया कि कार्यालय के एक कर्मचारी ने उससे वाहन संबंधी कार्य के लिए 26750 रुपये नकद जमा करवाए, लेकिन जब उसे रसीद दी गई तो वह केवल 21750 रुपये की थी। इस तरह एक ही काम में 5000 रुपये की सीधी अवैध वसूली की बात उजागर हुई। सरकारी खाते और मौके पर मौजूद नकद राशि के मिलान में भी भारी अंतर पाया गया। इसके बाद जिलाधिकारी ने पूरी जांच रिपोर्ट तैयार करके परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेज दी।
दो अधिकारियों पर निलंबन की गाज
निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई भारी अनियमितताओं, कार्यालय की दैनिक गतिविधियों पर निगरानी में गंभीर लापरवाही और अपने मातहत कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण न रख पाने के आरोपों के तहत शासन ने तुरंत कदम उठाया। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर एआरटीओ प्रवर्तन तृतीय दल सोमलता यादव और एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार को निलंबित कर दिया गया है।
आरटीओ प्रशासन को नोटिस और विभागीय जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरटीओ प्रशासन राकेन्द्र सिंह के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया गया है। उन्हें औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर शासन को अपना लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। उनसे पूछा गया है कि कार्यालय में अनधिकृत लोगों का प्रवेश और अवैध लेन-देन कैसे चलता रहा। संपूर्ण मामले की विस्तृत विभागीय जांच का दायित्व उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), वाराणसी को सौंपा गया है। निलंबन अवधि के दौरान सोमलता यादव और आलोक कुमार को परिवहन विभाग के मुख्यालय से संबद्ध रखा जाएगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
परिवहन मंत्री का सख्त रुख और कड़ी चेतावनी
कार्रवाई पर बोलते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यालयों में बाहरी या अनधिकृत व्यक्तियों के कार्य करने पर पूर्ण प्रतिबंध के स्पष्ट निर्देश पहले से लागू हैं। इसके बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अनधिकृत गतिविधियां संचालित होना बेहद गंभीर विषय है। दयाशंकर सिंह ने कहा, "परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और लोगों के साथ धोखाधड़ी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" उन्होंने दोहराया कि आम जनता को परेशान करने वाले हर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कठोरतम दंडात्मक कदम उठाए जाते रहेंगे।





















