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संभागीय परिवहन कार्यालय में रिश्वतखोरी पर बड़ी कार्रवाई, दो ARTO सस्पेंड और 15 पर मुकदमा दर्जउत्तर प्रदेश
3 सित॰ 2026, 10:23 am (1 दिन पहले)· 0

संभागीय परिवहन कार्यालय में रिश्वतखोरी पर बड़ी कार्रवाई, दो ARTO सस्पेंड और 15 पर मुकदमा दर्ज

कानपुर के संभागीय परिवहन कार्यालय में औचक निरीक्षण के दौरान अवैध वसूली का भंडाफोड़ हुआ है। शासन ने दो एआरटीओ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और आरटीओ प्रशासन को 15 दिनों में स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहन स्वामियों और आवेदकों से अवैध धन वसूलने के एक बड़े मामले में कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। शिकायतों के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों की टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण के बाद दो सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (ARTO) को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) प्रशासन को कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। पूरे प्रकरण में विभागीय कर्मियों तथा बिचौलियों सहित कुल 15 लोगों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

औचक निरीक्षण और 50 लोगों से गहन पूछताछ

यह प्रशासनिक कार्रवाई राज्य के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के कड़े निर्देशों के बाद शुरू हुई। कानपुर के जिलाधिकारी के आदेश पर अपर पुलिस उपायुक्त तथा ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सह उप जिलाधिकारी के संयुक्त नेतृत्व में एक विशेष जांच दल ने संभागीय एवं सहायक परिवहन कार्यालय परिसर पर अचानक छापा मारा। निरीक्षण के दौरान परिसर में मौजूद करीब 50 लोगों को रोककर उनसे गहन पूछताछ की गई। इस पूछताछ के दौरान जांच टीम ने 11 ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की जो दलाली और अनधिकृत गतिविधियों में लिप्त थे। ये लोग नया वाहन पंजीकरण कराने और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए आवेदकों से अनुचित धनराशि ऐंठ रहे थे।

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कैश की बरामदगी और क्लर्कों की संलिप्तता

छापेमारी की इस कार्रवाई में संदिग्धों की तलाशी लेने पर उनके पास से 43485 रुपये की नकद राशि जब्त की गई। जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा, कार्यालय में तैनात दो विभागीय लिपिकों मधुर मिश्रा और विपिन कुमार की भूमिका भी इस अवैध खेल में उजागर हुई। इसके उपरांत प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से थाना काकादेव में कुल 15 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस प्राथमिकी के बाद विभागीय स्तर पर अधिकारियों की निगरानी क्षमता और मिलीभगत की भी जांच शुरू कर दी गई है।

ट्रक चालक से अधिक वसूली का मामला

निरीक्षण के समय परिसर में मौजूद एक ट्रक चालक ने जांच दल के सामने अपना बयान दर्ज कराया। चालक ने बताया कि कार्यालय के एक कर्मचारी ने उससे वाहन संबंधी कार्य के लिए 26750 रुपये नकद जमा करवाए, लेकिन जब उसे रसीद दी गई तो वह केवल 21750 रुपये की थी। इस तरह एक ही काम में 5000 रुपये की सीधी अवैध वसूली की बात उजागर हुई। सरकारी खाते और मौके पर मौजूद नकद राशि के मिलान में भी भारी अंतर पाया गया। इसके बाद जिलाधिकारी ने पूरी जांच रिपोर्ट तैयार करके परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेज दी।

दो अधिकारियों पर निलंबन की गाज

निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई भारी अनियमितताओं, कार्यालय की दैनिक गतिविधियों पर निगरानी में गंभीर लापरवाही और अपने मातहत कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण न रख पाने के आरोपों के तहत शासन ने तुरंत कदम उठाया। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर एआरटीओ प्रवर्तन तृतीय दल सोमलता यादव और एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार को निलंबित कर दिया गया है।

आरटीओ प्रशासन को नोटिस और विभागीय जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए आरटीओ प्रशासन राकेन्द्र सिंह के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया गया है। उन्हें औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर शासन को अपना लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। उनसे पूछा गया है कि कार्यालय में अनधिकृत लोगों का प्रवेश और अवैध लेन-देन कैसे चलता रहा। संपूर्ण मामले की विस्तृत विभागीय जांच का दायित्व उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), वाराणसी को सौंपा गया है। निलंबन अवधि के दौरान सोमलता यादव और आलोक कुमार को परिवहन विभाग के मुख्यालय से संबद्ध रखा जाएगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

परिवहन मंत्री का सख्त रुख और कड़ी चेतावनी

कार्रवाई पर बोलते हुए परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यालयों में बाहरी या अनधिकृत व्यक्तियों के कार्य करने पर पूर्ण प्रतिबंध के स्पष्ट निर्देश पहले से लागू हैं। इसके बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अनधिकृत गतिविधियां संचालित होना बेहद गंभीर विषय है। दयाशंकर सिंह ने कहा, "परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और लोगों के साथ धोखाधड़ी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" उन्होंने दोहराया कि आम जनता को परेशान करने वाले हर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कठोरतम दंडात्मक कदम उठाए जाते रहेंगे।

सवाल-जवाब

कानपुर आरटीओ मामले में किन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है?
शासन ने एआरटीओ प्रवर्तन तृतीय दल सोमलता यादव और एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार को निलंबित कर दिया है।
कितने लोगों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है?
कार्यालय से जुड़े दो लिपिकों (मधुर मिश्रा और विपिन कुमार) तथा बिचौलियों सहित कुल 15 लोगों के खिलाफ थाना काकादेव में एफआईआर दर्ज की गई है।
निरीक्षण के दौरान संदिग्धों से कितनी नकद राशि बरामद हुई?
जांच टीम ने मौके पर चिन्हित संदिग्ध लोगों के पास से 43485 रुपये की अनधिकृत नकद राशि जब्त की।
आरटीओ प्रशासन को क्या निर्देश दिया गया है?
आरटीओ प्रशासन राकेन्द्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
मामले की विभागीय जांच कौन अधिकारी कर रहे हैं?
पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच का जिम्मा उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), वाराणसी को सौंपा गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

कानपुर परिवहन कार्यालय में यह औचक कार्रवाई प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देती है। मंत्री के सीधे निर्देशों और संयुक्त मजिस्ट्रेट की अगुवाई में हुई इस रेड से स्पष्ट है कि दलाल-कर्मचारी गठजोड़ अब शासन के राडार पर है। आरटीओ प्रशासन को जारी नोटिस और 15 लोगों पर एफआईआर से यह तय है कि आने वाले दिनों में गाज अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों के भ्रष्ट तंत्र पर भी गिर सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यह स्पष्ट है कि समस्या केवल निचले स्तर के दलालों तक सीमित नहीं है, बल्कि दो एआरटीओ और आरटीओ प्रशासन को नोटिस इस बात का प्रमाण है कि वरिष्ठ अधिकारियों की प्रशासनिक जवाबदेही तय होना आवश्यक है। रसीद में हेराफेरी और सरकारी व नकदी के मिलान में अंतर यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार संगठित रूप से चल रहा था। आगामी जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों में भी ऐसी ही सांठगांठ की परतें खुलती हैं या नहीं।

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