लखनऊ के इंदिरा कैनाल रोड इलाके में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई एक भीषण मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी संजय उर्फ संजीव मारा गया है। इस बदमाश पर पुलिस की ओर से 1,00,000 रुपये का भारी इनाम घोषित था। वह 27 मई, 2026 को राजधानी के PGI थाना क्षेत्र में चर्चित बिल्डर संदीप सिंह की दिनदहाड़े हुई हत्या का मुख्य शूटर था। पुलिस के अनुसार, यह अपराधी अंबेडकर नगर, बस्ती और अयोध्या जैसे जिलों में कई बड़ी वारदातों को अंजाम दे चुका था। इसके तार अंबेडकर नगर के दिलीप वर्मा और खान मुबारक जैसे सक्रिय आपराधिक गिरोहों से भी जुड़े हुए थे।
मुठभेड़ और कार्रवाई का ब्यौरा
बीती रात इंदिरा कैनाल रोड पर अपर पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस की टीम गश्त कर रही थी, तभी संदिग्धों के साथ मुठभेड़ शुरू हो गई। इस दौरान संजय को गोली लगी। पुलिस ने उसे तुरंत इलाज के लिए डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लखनऊ पुलिस आयुक्त द्वारा उस पर गिरफ्तारी के लिए एक लाख रुपये की इनामी राशि तय की गई थी।
कैसे हुई थी संदीप सिंह की हत्या
घटनाक्रम के अनुसार, 27 मई को दोपहर करीब 12 से 12:30 बजे के बीच 42 वर्षीय संदीप सिंह अपने ड्राइवर प्रदीप सिंह के साथ PGI क्षेत्र स्थित अपने कार्यालय पहुंचे थे। जैसे ही वे कार से उतरकर दफ्तर की ओर बढ़े, बाइक सवार दो नकाबपोश हमलावरों ने उन पर धावा बोल दिया। सफेद शर्ट और नीली जींस पहने हुए मुख्य हमलावर ने संदीप पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। पहली गोली उनके सीने में लगी, जिससे वे जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद भी हमलावर रुका नहीं और उसने संदीप के सिर के करीब से फिर गोली मारी।
इस दौरान उसका साथी एक चालू हालत में अपाचे बाइक पर पास ही खड़ा था। वारदात के फौरन बाद शूटर बाइक पर बैठा और दोनों फरार हो गए। हमलावर ने अपना चेहरा सफेद कपड़े से ढक रखा था, जबकि बाइक चलाने वाले ने हेलमेट पहन रखा था। स्थानीय लोग घायल संदीप को आनन-फानन में अपेक्स ट्रॉमा सेंटर ले गए, लेकिन वहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस को इस पूरी घटना की 50 सेकंड की CCTV फुटेज भी मिली थी।
संदीप सिंह का जीवन परिचय
मूल रूप से जौनपुर जिले के टकारी गांव के निवासी संदीप सिंह लखनऊ की वृंदावन योजना स्थित कालिंदी पार्क में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा 11 साल का बेटा और नौ साल की बेटी है। संदीप वर्ष 2008 में लखनऊ आए थे और अपने चाचा राजेंद्र प्रसाद सिंह के साथ रहते थे, जो एक सरकारी इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल थे। बाद में उन्होंने रियल एस्टेट के कारोबार में अपना नाम बनाया था।













