उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारा थाना इलाके में स्थित प्रसिद्ध बुद्धेश्वर मंदिर में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने भक्तों की आस्था को गहरा धक्का पहुँचाया है। मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाला एक सेवादार ही यहां की कीमती वस्तुओं को चोरी करने का मुख्य आरोपी निकला। पिछले कई दिनों से मंदिर परिसर से लगातार बेशकीमती घंटों के गायब होने की खबरें सामने आ रही थीं, जिससे मंदिर प्रशासन और वहां के श्रद्धालु काफी परेशान थे। चोर का पता लगाने के लिए मंदिर प्रबंधन ने सतर्कता बढ़ाते हुए कड़ी निगरानी शुरू की। आखिरकार, प्रबंधन की यह कोशिश रंग लाई और आज आरोपी सेवादार को एक झोले में दर्जनों घंटे भरकर ले जाते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और आरोपी को उन्हें सौंप दिया।
रंगे हाथों पकड़ा गया सेवादार
पकड़े गए आरोपी की पहचान गोलू उर्फ गौरव के रूप में की गई है। इस आरोपी को मंदिर की श्रृंगार आरती की व्यवस्था संभालने का काम सौंपा गया था, जिस पद का फायदा उठाकर वह काफी समय से इस घिनौने कृत्य को अंजाम दे रहा था। स्थानीय निवासियों को पूरा संदेह है कि इससे पहले भी जो घटनाएं मंदिर से घंटों के गायब होने की हुई हैं, उनमें इसी सेवादार की मुख्य भूमिका रही होगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय निवासी सनी, विशाल और राकेश समेत कई लोगों ने पारा थाने पहुँचकर आरोपी के विरुद्ध लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
अपनी शिकायत में स्थानीय लोगों ने इस बात पर जोर दिया है कि मंदिर की देखरेख और प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन के पास है, इसलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पारा थाना पुलिस ने दी गई तहरीर के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है और बरामद किए गए घंटों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बारीकी से छानबीन की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून सम्मत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश के मंदिर में चंदा घोटाले की गूंज
हाल के दिनों में मंदिरों में गड़बड़ी का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले में स्थित मशहूर मां बगलामुखी मंदिर में भी चंदे और दान में बड़े घोटाले की शिकायतें सामने आई हैं। यहां नलखेड़ा स्थित मंदिर में चढ़ावे, नगद दान और सोने-चांदी के आभूषणों के प्रबंधन में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक दी गई भेंट में हुई गड़बड़ी की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर प्रीति यादव ने इस मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक विशेष टीम गठित की है। इस टीम को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपें। जांच में यह आरोप सामने आए हैं कि मंदिर की आधिकारिक सरकारी कमेटी को दरकिनार कर दिया गया था और एक दूसरी अनधिकृत कमेटी द्वारा भक्तों से चढ़ावा एकत्र किया जा रहा था। इस दान में मिले सोने, चांदी और नगदी के हिसाब में बड़ी धोखाधड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है।











