सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पीडीए का एक नया और अनोखा फुल फॉर्म पेश किया है। उन्होंने इस नारे की व्याख्या राज्य में हुए पिछले विधानसभा चुनावों के परिणामों और आने वाले राजनीतिक भविष्य से जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उनका दावा है कि साल 2017 और साल 2022 के बाद अब साल 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भी समाजवादी पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ेगा। राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, क्योंकि सभी प्रमुख दल अभी से अपनी चुनावी तैयारियों में जुट चुके हैं।
अंबेडकरनगर दौरे पर दिया बयान
अपने हालिया अंबेडकरनगर दौरे के दौरान, जहां वह जिला प्रभारी मंत्री के रूप में पहुंचे थे, ओम प्रकाश राजभर ने पीडीए शब्द की नई परिभाषा लोगों के सामने रखी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस संक्षिप्त शब्द का वास्तविक अर्थ समाजवादी पार्टी के लिए हार की कहानी बयां करता है। उनके मुताबिक पीडीए का अर्थ इस प्रकार है कि पी का मतलब पहली हार है जो साल 2017 के विधानसभा चुनावों में मिली थी, डी का मतलब दूसरी हार है जो साल 2022 के विधानसभा चुनावों में हाथ लगी थी, और ए का मतलब आने वाली हार है जो साल 2027 के विधानसभा चुनाव में निश्चित तौर पर समाजवादी पार्टी का इंतजार कर रही है।
पहले भी दे चुके हैं कई बयान
यह पहला मौका नहीं है जब ओम प्रकाश राजभर ने पीडीए नारे की इस तरह से अलग व्याख्या की हो। इससे पहले भी वह इस शब्द के कई अन्य अर्थ जनता के सामने रख चुके हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए पहले इसका मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी भी बताया था। राजभर का कहना है कि समाजवादी पार्टी और उसके नेता अपनी राजनीतिक सुविधा और जरूरत के हिसाब से इस नारे के अर्थ बदलते रहते हैं। उन्होंने यह भी कटाक्ष किया था कि इस नारे में इस्तेमाल होने वाले अक्षर ए का मतलब कभी अगड़ा और आदिवासी बताया जाता है, और आशंका जताई थी कि आने वाले समय में शायद इसे आतंकवादी भी न बता दिया जाए। इसके अलावा वह इसके अन्य मतलब जैसे पीट देगा अहीर, पीट देगा अल्पसंख्यक या पार्टी फॉर डिंपल एंड अखिलेश भी सार्वजनिक रूप से बता चुके हैं।
सपा के साथ रहा है पुराना सियासी सफर
गौरतलब है कि ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने साल 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के तहत ही लड़ा था। हालांकि उस गठबंधन को चुनाव में पूर्ण सफलता नहीं मिल पाई थी। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुल 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि सुभासपा को केवल 6 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद सियासी समीकरण बदले और ओम प्रकाश राजभर ने पाला बदलते हुए एनडीए का दामन थाम लिया, जिसके बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। तब से लेकर अब तक वह लगातार समाजवादी पार्टी पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं और आगामी चुनावों में भी सपा की हार तय होने का दावा कर रहे हैं। राजनीतिक सरगर्मी के बीच सभी पार्टियां अभी से चुनावी मूड में आ चुकी हैं और अपनी रणनीतियां तैयार कर रही हैं।



















