बिहार के कई जिलों में हर साल बाढ़ और नदी के कटाव से भारी तबाही देखने को मिलती है, लेकिन इस बार भागलपुर का राघोपुर गांव सबसे गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। गंगा नदी का आक्रामक रूप गांव के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है और तेज कटाव के चलते स्थानीय निवासी लगातार खौफ के साए में अपना जीवन बिता रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि तमाम परिवारों ने अपने घरों को खाली करना शुरू कर दिया है और वे अपने जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। ग्रामीणों के मन में इस बात का बड़ा डर बैठा हुआ है कि यदि समय रहते कटाव की इस रफ्तार पर ब्रेक नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में यह पूरा गांव गंगा की उफनाती धारा में पूरी तरह विलीन हो जाएगा।
पुरानी रेलवे लाइन बनी गांव की सुरक्षा ढाल
इस संकट के बीच राघोपुर गांव के लिए पुरानी रेलवे लाइन का बांध फिलहाल एकमात्र सुरक्षा कवच साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पुरानी रेलवे लाइन ही है जो अभी तक गांव को गंगा के सीधे प्रहार से बचाए हुए है। हालांकि, जिस प्रकार से लगातार कटाव हो रहा है, उससे ग्रामीणों की मुश्किलें और अधिक बढ़ती जा रही हैं। लोगों को इस बात की गहरी आशंका सता रही है कि यदि किसी तरह यह तटबंध या पुरानी रेलवे लाइन कमजोर पड़ गई, तो गांव पर बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा आ सकती है जिससे बचना बेहद कठिन होगा।
जिलाधिकारी की मौके पर नजर और निर्देश
इस पूरे मामले की गंभीरता को पूरी तरह समझते हुए भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडे खुद लगातार राघोपुर गांव का दौरा कर रही हैं। वह घटनास्थल पर ही कैंप डालकर स्थिति का जायजा ले रही हैं और लगातार अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश जारी कर रही हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग के तमाम संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया है कि हरसंभव और आवश्यक प्रयास किए जाएं ताकि राघोपुर गांव को बचाया जा सके। इसके अलावा जिलाधिकारी ने गांव के सभी डरे हुए लोगों से संयम बनाए रखने और घबराहट से बचने की खास अपील भी की है।
आंखों में आंसू और ट्रैक्टरों पर पलायन का दर्द
कटाव के कारण इस वक्त ग्रामीणों के सामने अपने परिवार और आशियाने को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। लोग अपने घरों का सारा जरूरी सामान ट्रैक्टरों पर लादकर सुरक्षित स्थानों की तरफ रवाना हो रहे हैं। कई परिवारों ने तो अपने घरों को पूरी तरह से खाली भी कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रात के वक्त अचानक रेलवे लाइन का यह बांध टूट गया, तो उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा। एक स्थानीय महिला ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि जिस जमीन पर उनका पूरा बचपन बीता और जहां से उनकी अनगिनत यादें जुड़ी हुई हैं, आज उसी जन्मभूमि को मजबूरी में छोड़कर जाना पड़ रहा है। महिला का दर्द झलकता है कि यदि कटाव नहीं रुका तो मानचित्र से गांव का नामोनिशान मिट जाएगा।
मंदिर और धार्मिक स्थल भी खतरे की जद में
राघोपुर में इस विकराल कटाव का असर अब केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव के तमाम महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। गांव का प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर और बरहम बाबा स्थान भी अब सीधे तौर पर कटाव के दायरे में आ गए हैं, जिससे लोगों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का रोष इस बात पर भी है कि यदि शुरुआती दौर में ही ठोस कटावरोधी कार्य शुरू कर दिए जाते, तो शायद आज इस बुरे दिन का सामना नहीं करना पड़ता। हालांकि, अब प्रशासन की तरफ से जिओ बैग, बांस के बंडलों और बड़े पेड़ों के सहारे कटाव को रोकने के लिए आपातकालीन प्रयास किए जा रहे हैं।


















