कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संस्थापक और आधिकारिक प्रवक्ता विजेता दहिया इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर उनका एक नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अत्यधिक गुस्से में दिखाई दे रहे हैं। यह क्लिप संभवतः उनकी अपनी कार के भीतर फिल्माई गई है। शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि शायद उनका यह भारी गुस्सा दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे मौजूदा विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा हो सकता है, लेकिन मामले की हकीकत पूरी तरह से अलग है। उनका यह आक्रोश मुख्य रूप से हिंदू धर्म और विशेष रूप से प्रेमानंद महाराज से जुड़े एक हालिया विवाद को लेकर सामने आया है। अपने आधिकारिक अकाउंट से साझा किए गए इस क्लिप में दहिया ने खुलकर अपने विरोधियों पर निशाना साधा है और अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
हमले की कोशिश और पुलिस से सुरक्षा की मांग
अपने इस तीखे वीडियो संदेश में, कॉकरोच जनता पार्टी के नेता ने कुछ असामाजिक तत्वों पर उन्हें लगातार निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। दहिया ने दावा किया कि बीती छह जून से ही कुछ लोग उनके पीछे पड़े हुए हैं। स्थिति तब और भी ज्यादा बिगड़ गई जब हाल ही में दोपहर के समय दो अज्ञात व्यक्तियों ने कथित तौर पर उनकी हत्या करने का प्रयास किया। अपने हमलावरों को सीधे तौर पर 'आतंकवादी' और 'मनुवादी' करार देते हुए उन्होंने अपनी शारीरिक सीमाओं का भी उल्लेख किया। दहिया ने स्पष्ट किया कि वह कोई छह फुट लंबे, हट्टे-कट्टे बॉडी बिल्डर नहीं हैं जो सड़क पर एक साथ चार हमलावरों से शारीरिक तौर पर मुकाबला कर सकें। उनका कहना है कि इस तरह की हिंसक गतिविधियां उन्हें बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। इस पूरी घटना के बाद उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उनका तर्क है कि एक स्वतंत्र देश के नागरिक होने के नाते, यह पुलिस महकमे का प्राथमिक कर्तव्य है कि वह उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे और उन्हें अपनी बात कहने की आजादी का स्वतंत्र रूप से प्रयोग करने दे।
प्रेमानंद महाराज पर विवादित बयान और आसाराम का जिक्र
वीडियो के अगले हिस्से में विजेता दहिया का गुस्सा तब अपने चरम पर पहुंच जाता है, जब बातचीत का रुख प्रेमानंद महाराज की ओर मुड़ता है। वह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि वह व्यक्तिगत तौर पर प्रेमानंद को कोई 'महाराज' या संत नहीं मानते हैं। उनके इस भारी विरोध की मुख्य वजह एक पुराना बयान है। दहिया का आरोप है कि प्रेमानंद ने एक मौके पर विवादित कथावाचक आसाराम की तुलना सीधे तौर पर भगवान राम और भगवान कृष्ण जैसे आराध्य देवताओं से कर दी थी। सीजेपी नेता के नजरिए से यह तुलनात्मक टिप्पणी पूरी तरह से गलत और अस्वीकार्य थी, और इसी वैचारिक मतभेद के कारण वह प्रेमानंद महाराज का कोई भी सम्मान करने से इनकार कर रहे हैं। दहिया का कहना है कि लोग भले ही प्रेमानंद को भगवान का दर्जा देते हों, लेकिन उनके अपने विचार बिल्कुल अलग हैं और वे किसी के दबाव में आकर अपनी राय नहीं बदलेंगे।
अभिव्यक्ति की आजादी पर अडिग रहने का संकल्प
अपनी बात को खत्म करते हुए विजेता दहिया ने अपने विरोधियों को एक खुली और सख्त चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा, "तुम जान से मार दो, लेकिन तब भी मैं प्रेमानंद को महाराज नहीं कहूंगा।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपने विचार रखना उनका संवैधानिक अधिकार है, जिसे 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' कहा जाता है। दहिया ने स्पष्ट कर दिया कि चाहे उन पर कितना भी दबाव डाला जाए या उनकी जान ही क्यों न ले ली जाए, वह इस तरह की किसी भी गुंडागर्दी के सामने झुकने वाले नहीं हैं। उनका यह वीडियो अब इंटरनेट पर चर्चा का एक बड़ा विषय बन गया है, जहां लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के सम्मान के बीच की बहस में उलझ गए हैं।



















