भारत के हस्तशिल्प क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर अपना एक बहुत ही खास और ऐतिहासिक स्थान रखता है। इस शहर को इसके बेहतरीन धातु शिल्प के कारण दुनिया भर में 'पीतल नगरी' के गौरवशाली नाम से जाना जाता है। जैसे-जैसे समय बदल रहा है और ग्राहकों की पसंद में बदलाव आ रहा है, वैसे-वैसे यहां के अनुभवी शिल्पकारों ने भी अपने काम करने के तरीकों में काफी बड़े और सकारात्मक बदलाव किए हैं। आज के समय में यहां की सदियों पुरानी पारंपरिक कला में आधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर और बहुत ही शानदार तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कलात्मक बदलाव की कड़ी में आजकल यहां विशेष रूप से तैयार हो रही राधा-कृष्ण की मनमोहक मूर्तियां कला प्रेमियों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी तरफ बहुत ही तेजी से खींच रही हैं। इन मूर्तियों को जिस तरह से एक बिल्कुल नया और ताजा रूप दिया गया है, उसने शहर के पीतल उद्योग में एक नई जान फूंक दी है। यह नया कलात्मक चलन स्थानीय बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक काफी चर्चा का विषय बना हुआ है और शिल्पकारों के लिए व्यापार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।
सूक्ष्म नक्काशी और मनमोहक रंगों का बेहतरीन संगम
पुराने समय में बनने वाली पीतल की मूर्तियों के मुकाबले अब तैयार की जा रही कलाकृतियों का रूप-रंग बिल्कुल अलग और बेहद आकर्षक है। शिल्पकार अब मूर्तियों के निर्माण में बहुत ही बारीक और सूक्ष्म नक्काशी पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पहले के दौर में मूर्तियां केवल पीतल के सुनहरे रंग तक ही सीमित रहती थीं, लेकिन अब सिर्फ धातु को तराशने तक ही यह कला सीमित नहीं रह गई है। इन मूर्तियों के आकर्षण को और ज्यादा बढ़ाने के लिए उन पर अलग-अलग तरह के सुंदर और मनमोहक रंगों का भी बहुत ही सावधानी से प्रयोग किया जा रहा है। यह नया और रचनात्मक प्रयोग इन पीतल की मूर्तियों को बाजार में मौजूद अन्य साधारण मूर्तियों से एकदम अलग, जीवंत और बहुत ज्यादा खूबसूरत बनाता है। हर एक मूर्ति पर कारीगरों की कड़ी मेहनत साफ तौर पर झलकती है। यही कारण है कि कला को समझने वाले लोग इन खूबसूरत कलाकृतियों की जमकर तारीफ कर रहे हैं। नक्काशी का यह नया और उन्नत तरीका मुरादाबाद के हुनर को दुनिया के सामने एक अलग ही स्तर पर पेश कर रहा है।
आकार, कीमत और विशेष ऑर्डर देकर बनवाने की सुविधा
बाजार में ग्राहकों की अलग-अलग मांग और उनके बजट के हिसाब से कई तरह के शानदार विकल्प मौजूद हैं। इस व्यापार से जुड़े पीतल कारोबारी किशन खन्ना बताते हैं कि इस बार नए रंग-रूप और बारीक कारीगरी के कारण खरीदारों में इन मूर्तियों को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। वर्तमान समय में जो मूर्तियां बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, उनका आकार 3 इंच से शुरू होकर पूरे 4 फीट तक जाता है। जहां तक इन उत्कृष्ट कलाकृतियों की कीमत का सवाल है, तो एक बहुत ही साधारण मूर्ति लगभग 1200 रुपये की शुरुआती कीमत पर आसानी से खरीदी जा सकती है। हालांकि, जैसे-जैसे मूर्ति का आकार बड़ा होता है और उस पर की गई कारीगरी अधिक जटिल होती जाती है, वैसे-वैसे उसकी कीमत भी हजारों रुपये के पार पहुंच जाती है। इसके अलावा, जो ग्राहक बाजार में मौजूद डिजाइन से कुछ अलग और विशेष चाहते हैं, वे अपनी व्यक्तिगत पसंद और जरूरत के अनुसार ऑर्डर देकर भी अपने लिए विशेष मूर्तियां तैयार करवा सकते हैं।
तीर्थ स्थलों से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बढ़ती लोकप्रियता
राधा-कृष्ण की इन बेहद आकर्षक मूर्तियों की मांग केवल मुरादाबाद या उसके आस-पास के स्थानीय इलाकों तक ही सीमित नहीं रह गई है। देश के प्रमुख और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर इनकी भारी मांग लगातार देखी जा रही है। विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन जैसे पवित्र शहरों में, जहां भगवान कृष्ण के भक्तों की भारी भीड़ जुटती है, वहां श्रद्धालु और पर्यटक इन मूर्तियों को बहुत ही उत्साह और श्रद्धा के साथ खरीद रहे हैं। इसके साथ ही, मुरादाबाद की यह अद्वितीय कला अब विदेशी बाजारों में भी अपनी बहुत ही मजबूत पकड़ बना चुकी है। दुनिया के अलग-अलग देशों में बसने वाले सनातन धर्म के अनुयायी और भारतीय संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इन कलाकृतियों के पूरी तरह से दीवाने हो रहे हैं। विदेशी धरती से कारीगरों को लगातार मिल रहे बड़े ऑर्डर्स ने यह बात साबित कर दी है कि भारतीय हस्तशिल्प की कद्र और मांग आज भी दुनिया के हर कोने में मजबूती से मौजूद है।
सावन के महीने में कारोबार में आने वाला भारी उछाल
भारतीय संस्कृति में धार्मिक त्योहारों और पवित्र महीनों का व्यापार के नजरिए से एक अलग ही महत्व होता है। यही कारण है कि भगवान शिव को समर्पित सावन के पवित्र महीने में इन मूर्तियों का व्यापार और भी कई गुना बढ़ जाता है। इस विशेष धार्मिक महीने के दौरान लोग पूजा-पाठ से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं और भगवान की प्रतिमाओं की खरीदारी बड़े पैमाने पर और पूरे उत्साह के साथ करते हैं। मुरादाबाद के कारीगरों द्वारा पुराने डिजाइन को छोड़कर किए गए इन नए कलात्मक प्रयोगों ने शहर की पुरानी और प्रतिष्ठित पहचान को न सिर्फ सुरक्षित रखा है, बल्कि उसे दुनिया भर में एक नई ऊंचाई भी प्रदान की है। अपनी बेहतरीन नक्काशी और मनमोहक डिजाइन की वजह से राधा-कृष्ण की ये खास मूर्तियां लोगों के घरों और मंदिरों की शोभा बढ़ाने के साथ-साथ मुरादाबाद शहर का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर रही हैं।


















