बारिश की झड़ी थमते ही सितंबर का महीना बगीचे में नई शुरुआत के लिए एक तरह से हरी झंडी लेकर आता है। तापमान धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है और मिट्टी में वह नमी बनी रहती है जो पौधों की जड़ों को जमने में मदद करती है। यही वजह है कि इस महीने रोपे गए ज्यादातर फूल सर्दियों तक पूरी तरह खिलकर बगीचे को रंगों से भर देते हैं।
सिर्फ शौक नहीं, कमाई का जरिया भी बनते हैं ये फूल
घर की बालकनी सजाने वालों के अलावा छोटे किसान और बागवान भी इस मौसम का पूरा फायदा उठाते हैं। गेंदा, गुलदाउदी, डहेलिया, कैलेंडुला और एस्टर जैसी किस्मों की खेती करके वे अच्छी अतिरिक्त आमदनी जुटा लेते हैं, क्योंकि त्योहारों, पूजा-अनुष्ठानों और शादी-समारोहों में इनकी खपत हमेशा बनी रहती है। कैलेंडुला और एस्टर जैसे मौसमी फूलों की मांग भी सजावट और गुलदस्तों में लगातार बनी रहती है, जिससे बागवानों को साल के इस हिस्से में अतिरिक्त विकल्प मिल जाता है। सितंबर की अनुकूल जलवायु में इन पौधों की बढ़वार भी तेज होती है, इसलिए बाजार में माल पहुंचाने का समय भी जल्दी आ जाता है।
रोपाई से पहले मिट्टी और पानी की निकासी जरूर परखें
माली अनूप कुमार बताते हैं कि रोपाई शुरू करने से पहले जमीन का चुनाव सबसे जरूरी कदम है। वे कहते हैं, "पौधे को भरपूर धूप और साफ जल-निकासी वाली जगह चाहिए।" बरसात के बाद मिट्टी में नमी ज्यादा टिकी रहती है और अगर पानी निकलने का रास्ता न हो तो जड़ें सड़ने लगती हैं। इसलिए क्यारी या गमला ऐसी जगह रखें जहां से अतिरिक्त पानी आसानी से बह जाए, और हर पौधे के बीच इतनी दूरी रखें कि जड़ों को फैलने की पूरी जगह मिले। पौधों के बीच सही फासला रखने से हर पौधे को हवा और रोशनी बराबर मिलती है, जिससे बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।
गेंदा: पूजा-पाठ से शादी तक हर मौके पर मांग
अगर आसान देखभाल में उगने वाला फूल चाहिए तो गेंदे से बेहतर विकल्प शायद ही कोई हो। गमले से लेकर बड़े खेतों तक इसे हर जगह उगाया जा सकता है। धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों और घर की सजावट में इसकी खपत साल भर बनी रहती है, जिससे किसानों को नकदी फसल के तौर पर यह खासा फायदेमंद साबित होता है। कम लागत और आसान देखभाल के चलते नए बागवानों के लिए भी यह फूल शुरुआत के लिए बेहतर माना जाता है। सितंबर में इसकी पौध तैयार की जा सकती है या सीधे रोपाई भी की जा सकती है, बस ध्यान रहे कि गमले या खेत में पानी टिककर न रहे।
गुलाब: थोड़ी मेहनत में खिलेगा फूलों का राजा
बगीचे में गुलाब की मौजूदगी उसकी शान बढ़ा देती है, लेकिन बदलते मौसम में इसे थोड़ी अतिरिक्त देखभाल चाहिए होती है। पौधे को ऐसी जगह लगाएं जहां दिन भर पर्याप्त रोशनी पहुंचती हो। मिट्टी में जैविक खाद मिलाने से पौधे को जरूरी पोषण मिलता रहता है, वहीं सूखी पत्तियों और कमजोर टहनियों की समय-समय पर छंटाई करने से पौधा स्वस्थ और घना बना रहता है। गमले में लगाए गुलाब को थोड़ी ज्यादा निगरानी की जरूरत होती है, क्योंकि वहां मिट्टी जल्दी सूख या भीग सकती है।
डहेलिया: बड़े आकार और रंगों की भरमार
डहेलिया की पहचान उसके बड़े और आकर्षक फूलों से होती है, जो इतने रंगों में मिलते हैं कि बागवान अक्सर इसे अपनी पहली पसंद बना लेते हैं। इसे क्यारी, लॉन या बड़े गमले, कहीं भी लगाया जा सकता है, बशर्ते मिट्टी उपजाऊ हो और पानी की निकासी अच्छी हो। पर्याप्त धूप मिलने पर पौधा तेजी से बढ़ता है, और जैसे-जैसे यह लंबा होता जाए, तने को सहारा देना जरूरी हो जाता है ताकि तेज हवा या फूलों के भार से वह टूटे नहीं। फूल आने के बाद कुछ दिनों के अंतराल पर सूखी कलियां हटाते रहने से नई कलियां जल्दी बनती हैं।
गुलदाउदी: सर्दियों की रौनक का प्रतीक
सफेद, पीले, गुलाबी और लाल जैसे कई रंगों में खिलने वाली गुलदाउदी को सर्दियों के सबसे खास फूलों में गिना जाता है। अलग-अलग आकार और बनावट के फूल बगीचे को दूर से ही आकर्षक बना देते हैं। सितंबर में इसकी रोपाई का सही समय माना जाता है, इसके लिए ऐसी जगह चुनें जहां भरपूर धूप मिले और मिट्टी में पानी जमा होने से बचाया जा सके। इसके पौधे झाड़ीनुमा होकर फैलते हैं, इसलिए इन्हें एक-दूसरे से थोड़ी दूरी पर लगाना बेहतर रहता है।
सूरजमुखी: चमकीले पीले फूलों की पहचान
अपने बड़े आकार और चमकीले पीले रंग के चलते सूरजमुखी दूर से ही पहचान में आ जाता है। इसे खेतों के साथ-साथ बड़े बगीचों में भी उगाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए दिन भर भरपूर रोशनी वाली जगह जरूरी है। पौधे बड़े होने के साथ उनके बीच पर्याप्त फासला बनाए रखना चाहिए, क्योंकि पास-पास रोपाई करने से उनकी बढ़वार पर सीधा असर पड़ता है। बीज से सीधी बुवाई करने पर भी सूरजमुखी अच्छी तरह उग आता है, इसलिए इसे बड़े रकबे में लगाना आसान होता है।


















