राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर तीखा घमासान छिड़ गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और देशविरोधी मानसिकता को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। अमित शाह ने कहा कि जो राष्ट्रगीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा तराना था, उसे पूरा गाने से इंकार करके कांग्रेस ने अपना असली चेहरा देश के सामने उजागर कर दिया है। यह विवाद तब गहराया जब कांग्रेस कार्य समिति ने बाकायदा एक प्रस्ताव पारित करके फैसला लिया कि पार्टी के किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो पैरा ही गाए जाएंगे, भले ही संसद ने पूरे राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर 2026 में विशेष कानून पारित किया हो।
राष्ट्रगीत पर विवाद और ऐतिहासिक संदर्भ
संसद के हालिया सत्र के अंतिम दिन तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखबीर सुक्खू सहित सभी कांग्रेस सांसदों ने खड़े होकर पूरा वंदे मातरम् गाया था। हालांकि, कांग्रेस मुख्यालय में सोनिया गांधी द्वारा पूरे राष्ट्रगीत के गायन पर नाराजगी जताए जाने के बाद पार्टी के रुख में बदलाव आया। कांग्रेस का तर्क है कि 1937 में पार्टी ने आधिकारिक तौर पर निर्णय लिया था कि वंदे मातरम् के केवल दो पैरा गाए जाएंगे और वह 89 साल पुराने उसी फैसले पर आज भी कायम है। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि पार्टी 2026 में बने संसदीय कानून की अनदेखी कर रही है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में वोट बैंक की राजनीति को माना जा रहा है। वंदे मातरम् के बाद के तीन पद्यखंडों में भारत माता का स्वरूप मां दुर्गा और मां लक्ष्मी के रूप में वर्णित है। वर्ष 1937 में मुस्लिम लीग ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद कांग्रेस ने समझौता कर लिया था। गृह मंत्री अमित शाह ने इसी संवेदनशील पहलू को रेखांकित करते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए कांग्रेस राष्ट्रगीत का अनादर करने से भी पीछे नहीं हट रही है।
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी जांच और चंपत राय की चिट्ठी
अयोध्या स्थित रामलला मंदिर में चढ़ावे की राशि चोरी होने के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पुनः चर्चा में आ गए हैं। चंपत राय ने 9 पन्नों का एक विस्तृत पत्र जारी किया है। हालांकि इस पत्र में चढ़ावा चोरी की घटना का सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन उन्होंने मंदिर के निर्माण कार्य, दैनिक व्यवस्थाओं और वित्तीय प्रबंधन की पूरी जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के तीन मुख्य बैंक खातों की कोई चेकबुक जारी नहीं की गई है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, वित्तीय गतिविधियों का आंतरिक ऑडिट अलग-अलग स्वतंत्र कंपनियों द्वारा कराया जाता है।
चंपत राय ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन, पूजा, आरती, सेवा और प्रसाद पूरी तरह से नि:शुल्क हैं और किसी भी भक्त से कोई दक्षिणा नहीं ली जाती। पत्र में उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े फैसलों का मुख्य श्रेय नृपेंद्र मिश्रा को दिया है। पिछले दो हफ्तों से चंपत राय और अनिल मिश्रा अयोध्या के विभिन्न मठों और मंदिरों में साधु-संतों से लगातार मुलाकात कर रहे थे। एसआईटी की जांच का मुख्य फोकस दान पात्र से नकदी चुराने वाले दोषियों की पहचान करना था, न कि प्रशासनिक लापरवाही। चंपत राय का रुख यह दर्शाता है कि वे प्रबंधन की बेगुनाही को लेकर आश्वस्त हैं और अपने सहयोगियों को बेकसूर मानते हैं।
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 की घोषणा और चुनौतियां
केंद्रीय शहरी आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राष्ट्रीय राजधानी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मास्टर प्लान 2047 की रूपरेखा देश के सामने रखी है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2047 तक दिल्ली की आबादी बढ़कर 3 करोड़ 20 लाख हो जाएगी, यानी अगले 20 वर्षों में लगभग 80 लाख नए नागरिक शहर से जुड़ेंगे। इस भारी आबादी को रहने की जगह देने के लिए शहर में 40 लाख नए फ्लैट बनाए जाने की योजना है।
मास्टर प्लान के तहत हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्रों और लुटयन्स जोन को छोड़कर बाकी दिल्ली में इमारतों की ऊंचाई सीमा बढ़ाई जाएगी, जिससे बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का रास्ता साफ होगा। साथ ही, 50 साल पुरानी जर्जर इमारतों को गिराकर उनकी जगह नए हाई-राइज अपार्टमेंट बनाए जाएंगे। झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों का पुनर्विकास करके वहां रहने वाले लोगों को बहुमंजिला इमारतों में पक्के फ्लैट आवंटित किए जाएंगे।
हालांकि, बुनियादी ढांचे के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इमारतें और मेट्रो नेटवर्क बढ़ाकर इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। दिल्ली मूल रूप से 70 से 80 लाख लोगों की क्षमता के लिए बनाई गई थी, जबकि वर्तमान में यहां लगभग 2.5 करोड़ लोग रह रहे हैं। मुफ्त बिजली, पानी और रोजगार की सुलभता के कारण देश भर से प्रवासन जारी है। दिल्ली के दबाव को कम करने के लिए विकसित किए गए गुड़गांव और नोएडा जैसे उपग्रह शहर भी अब अत्यधिक भीड़भाड़ का सामना कर रहे हैं। जब तक देश स्तर पर प्रवासन के कारणों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक शहरी मास्टर प्लान की सफलता पर संशय बना रहेगा।



















