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लखीमपुर खीरी के गन्ना किसानों के लिए बड़ी चेतावनी, इस खतरनाक फफूंद रोग से फसल को पहुंच सकता है भारी नुकसानव्यापार
22 अग॰ 2026, 6:24 pm (1 घंटे पहले)· 3

लखीमपुर खीरी के गन्ना किसानों के लिए बड़ी चेतावनी, इस खतरनाक फफूंद रोग से फसल को पहुंच सकता है भारी नुकसान

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में गन्ने की फसल को स्मट रोग से भारी खतरा पैदा हो गया है, जो पैदावार को पूरी तरह नष्ट कर सकता है।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में गन्ने की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, जहां बड़ी संख्या में कृषक इस नकदी फसल पर अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह निर्भर रहते हैं। क्षेत्र के खेतों से निकलने वाला गन्ना किसानों को समृद्ध बनाने का मुख्य जरिया है, लेकिन हालिया मौसम में लगातार बदलते तापमान और खेतों के भीतर नमी की अधिकता के कारण फसलों पर विभिन्न प्रकार की बीमारियों और कीटों का संकट मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस नाजुक दौर में जरा सी भी लापरवाही पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है।

स्मट रोग की पहचान और इसके गंभीर खतरे

स्मट गन्ने की फसलों को प्रभावित करने वाली एक अत्यंत गंभीर और विनाशकारी बीमारी है, जिसके समय रहते उपचार न किए जाने पर पैदावार पर बहुत बुरा असर पड़ता है। विशेष रूप से अगस्त का महीना गन्ने के विकास के लिहाज से सबसे अहम माना जाता है क्योंकि इस दौरान वातावरण में उमस और जमीन के अंदर नमी बनी रहती है। जैसे-जैसे फसल की लंबाई तेजी से बढ़ती है, किसानों के लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि वे अपने खेतों में पौधों की पत्तियों, तनों और नई उगने वाली कलियों की नियमित रूप से निगरानी करते रहें।

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यह एक प्रमुख फफूंदजनित रोग है, जिसकी सबसे अचूक पहचान पौधे के ठीक बीचों-बीच से उभरने वाली लंबी, पतली और काली चाबुक जैसी आकृति होती है। बीमारी के शुरुआती चरणों में पौधा बिल्कुल स्वस्थ और सामान्य नजर आ सकता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, पौधे का विकास रुक जाता है और उसकी पत्तियां काफी पतली तथा संकरी होने लगती हैं। जब यह काली संरचना परिपक्व होकर फटती है, तो इसके भीतर मौजूद अनगिनत काले बीजाणु हवा के जरिए आसपास के स्वस्थ पौधों तक फैल जाते हैं।

संक्रमित पौधों को तुरंत हटाने की आवश्यकता

एक बार जब बीजाणु हवा के माध्यम से स्वस्थ पौधों तक पहुंच जाते हैं, तो पूरे खेत में इस बीमारी के तेजी से फैलने का बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। यही मुख्य वजह है कि कृषि जानकारों का मानना है कि खेत में यदि एक भी संक्रमित पौधा दिखाई दे, तो उसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे रोगग्रस्त पौधों को जड़ से उखाड़कर तुरंत खेत से बाहर कर देना चाहिए ताकि अन्य स्वस्थ फसल सुरक्षित रह सके।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि गन्ने की फसल में स्मट रोग एक खतरनाक फफूंद जनित बीमारी है। उन्होंने निर्देश दिया कि खेत में रोग से ग्रसित पौधों को तुरंत उखाड़कर जमीन में गहराई में गाड़ देना चाहिए या फिर उन्हें जला देना चाहिए, ताकि इसके बीजाणु आसपास के क्षेत्र में बिल्कुल न फैल सकें। उनके अनुसार, यह बीमारी गन्ने की कुल पैदावार को 30 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

फफूंदनाशक का सही इस्तेमाल और छिड़काव की विधि

यदि किसानों को अपने खेतों में गन्ने की फसल पर स्मट रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगें, तो उन्हें तुरंत रासायनिक उपचार कासहारा लेना चाहिए। इस फंगस के प्रभावी नियंत्रण के लिए Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC के घोल का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इस दवा की निर्धारित मात्रा एक लीटर साफ पानी में एक मिलीलीटर के हिसाब से मिलाई जाती है। इस अनुपात को अपनाते हुए किसान आसानी से 10 लीटर पानी में 10 मिलीलीटर दवा का मिश्रण तैयार करके अपनी फसल पर छिड़काव कर सकते हैं।

फसल में बीमारी के शुरुआती लक्षण नजर आते ही फफूंदनाशी का छिड़काव शुरू कर देना किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है। यदि रोग का प्रकोप अधिक हो और पहली बार छिड़काव करने के बाद भी जरूरत महसूस हो, तो किसान भाई 10 से 15 दिनों के निश्चित अंतराल पर दूसरा छिड़काव भी कर सकते हैं। इस वैज्ञानिक तरीके से समय पर की गई देखरेख और सही दवा के प्रयोग से इस खतरनाक रोग के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है और फसल की पैदावार को बचाया जा सकता है।

सवाल-जवाब

गन्ने में स्मट रोग की मुख्य पहचान क्या है?
इस रोग की सबसे खास पहचान पौधे के बीच से निकलने वाली लंबी, पतली और काली चाबुक जैसी संरचना होती है।
स्मट रोग गन्ने की पैदावार को कितना घटा सकता है?
यह खतरनाक फफूंद जनित रोग गन्ने की पैदावार को 30% से लेकर 100% तक कम कर सकता है।
संक्रमित पौधों के साथ क्या करना चाहिए?
रोग से ग्रसित पौधों को तुरंत उखाड़कर जमीन में गाड़ देना चाहिए या जला देना चाहिए ताकि बीजाणु न फैल सकें।
स्मट रोग के नियंत्रण के लिए किस दवा का छिड़काव करना चाहिए?
इसकी रोकथाम के लिए Azoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SC का इस्तेमाल किया जाता है।
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